बिहार में मतदाता पुनरीक्षण के बाद यहां वोटर लिस्ट में कई मरे हुए लोगों के नाम, बीएलओ भी घर पर नहीं आए; हड़कंप
बलिया विधानसभा क्षेत्र के प्रथम विधायक ब्रह्मदेव नारायण सिंह की पुत्रवधू किरण देवी ने बताया कि मतदाता सूची जारी होने के बाद पता चला कि मेरे पति का नाम मतदाता सूची में आया है। प्रेम कुमार उर्फ वरुण बाबू की मौत वर्ष 2024 में ही हो गई थी।

बिहार में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) कार्य के बाद बीते 1 अगस्त को मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन कर दिया गया है। इसके बाद बेगूसराय में वर्षों पूर्व मृत हो चुके लोगों के भी नाम मतदाता सूची में रहने की बात सामने आई है। मामला तब सामने आया जब मतदाता पुनरीक्षण कार्य के समापन के बाद प्रकाशित वोटर लिस्ट लोगों के हाथ लगी। यह सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। वायरल खबर की पुष्टि मृतकों के परिजनों के द्वारा कर दी गई। उनका भी नाम मतदाता सूची में है जिनकी मौत 14 वर्ष पूर्व हो चुकी है।
यह लापरवाही किसने की यह तो जांच का विषय है। लेकिन, मृत व्यक्ति के परिजनों द्वारा बताया गया कि उनके यहां कोई बीएलओ आए ही नहीं। सुना था कि हर घर में बीएलओ आएंगे। किसने यह गलती की है यह उन्हें पता नहीं। बलिया विधानसभा क्षेत्र के प्रथम विधायक ब्रह्मदेव नारायण सिंह की पुत्रवधू किरण देवी ने बताया कि मतदाता सूची जारी होने के बाद पता चला कि मेरे पति का नाम मतदाता सूची में आया है। प्रेम कुमार उर्फ वरुण बाबू की मौत वर्ष 2024 में ही हो गई थी।
उसी गांव के अभिनंदन कुमार उर्फ माखो सिंह के पुत्र अंकित कुमार ने बताया कि उनके पिता का निधन वर्ष 2022 में हो गया था। उनका मृत्यु प्रमाणपत्र भी उनके पास है। बावजूद उनका नाम मतदाता सूची में शामिल कर दिया गया। बीडीओ सन्नी कुमार ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा दावा-आपत्ति के लिए एक महीना का समय दिया गया है। मृत मतदाता सूची में अंकित हैं तो वैसे व्यक्ति के परिजन फार्म 7 भरकर देंगे।
ताकि मृतक का नाम मतदाता सूची से हटाया जा सके। वहीं किसी व्यक्ति का नाम छूट गया है तो फार्म 6 एवं किन्हीं के नाम में त्रुटि है तो वैसे व्यक्ति फार्म 8 भरकर बीएलओ के पास जमा करेंगे।




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