कोर्ट में लंबित बोल जमीन का दाखिल-खारिज नहीं लटका सकेंगे, विजय सिन्हा ने बता दी परिभाषा
बिहार में अब कोर्ट में लंबित कहकर अनावश्यक रूप से जमीन के दाखिल-खारिज के मामले राजस्व अधिकारी नहीं लटका सकेंगे। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने सक्षम न्यायालय और लंबित की परिभाषा तय कर दी है।

बिहार में जमीन के दाखिल-खारिज के मामलों को अब कोर्ट की आड़ में बेवजह नहीं लटकाया जाएगा। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस ओर अहम कदम उठाया है। कोर्ट की आड़ में दाखिल-खारिज लटकाने वालों पर कठोर कार्रवाई होगी। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अब ‘सक्षम न्यायालय’ और ‘लंबित’ शब्द की स्पष्ट परिभाषा तय कर दी गई है। इससे दाखिल-खारिज मामलों को बेवजह लंबित रखने की प्रवृत्ति समाप्त होगी और उनका त्वरित निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा।
सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा 6(12) में प्रयुक्त ‘सक्षम न्यायालय में लंबित’ शब्द की अलग-अलग व्याख्या के कारण कई अंचलों में दाखिल-खारिज वादों के निपटारे में अनावश्यक देरी हो रही थी। इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने विस्तृत समीक्षा कर सभी स्तर के राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
सक्षम न्यायालय का मतलब क्या है?
नए निर्देशों के अनुसार ‘सक्षम न्यायालय’ में दिवानी/व्यवहार न्यायालय, पटना हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट शामिल होंगे। इसके अलावा डीसीएलआर, एडीएम, डीएम, कमिश्नर कोर्ट, विधि विभाग द्वारा अधिकृत न्यायालय तथा बिहार भूमि न्यायाधिकरण को भी सक्षम न्यायालय की श्रेणी में रखा गया है।
लंबित शब्द का क्या अर्थ है?
डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि ‘लंबित’ का अर्थ केवल वही वाद होगा जो विधिवत दायर होकर न्यायालय में प्रक्रियाधीन हो और जिसमें कोर्ट द्वारा संज्ञान लिया गया हो, नोटिस निर्गत हुआ हो या स्थगन/अंतरिम आदेश जैसे स्टे ऑर्डर, अस्थायी या स्थायी निषेधाज्ञा अथवा स्टेटस प्रभावी हो। केवल किसी आवेदन, आपत्ति या अभ्यावेदन का दायर होना ‘सक्षम न्यायालय में लंबित’ नहीं माना जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर किसी सक्षम न्यायालय द्वारा स्पष्ट स्थगनादेश या अंतरिम आदेश प्रभावी नहीं है, तो राजस्व अधिकारी नियमानुसार अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे और दाखिल-खारिज मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दायर वाद की अभिप्रमाणित प्रति में स्पष्ट रूप से स्वीकारण अंकित नहीं है, तो उसे भी ‘लंबित’ नहीं माना जाएगा।
जमीन मालिकों की परेशानी कम होगी
राजस्व विभाग की कोशिश है कि जमीन की खरीद करने वालों को कम से कम परेशानी हो। इसलिए विभाग ने एक बार फिर इस मुद्दे पर जिलों को निर्देश भेजा है। विजय सिन्हा ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि वास्तविक क्रेताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए और भूमि से जुड़े मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इन स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करते हुए राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेह और त्वरित सेवा सुनिश्चित करें। मामलों में देरी करने वालों की पहचान कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
(हिन्दुस्तान ब्यूरो की रिपोर्ट)




साइन इन