चाचा जी... पर उपदेश कुशल बहुतेरे, निशांत के डेब्यू पर नीतीश को लालू की बेटी रोहिणी ने घेरा
रोहिणी आचार्या ने आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार परिवारवाद का विरोध करते रहे पर खुद अपने बेटे को राजनीति में ले आए।

Rohini Acharya on Nishant Kumar: निशांत कुमार की पॉलिटिकल पारी पर राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या सीएम नीतीश कुमार पर तीखा वार किया है। परिवारवाद पर लालू की खिंचाई करने वाले नीतीश कुमार पर रोहिणी आचार्या ने निशांत की धमाकेदार एंट्री पर अपने सिद्धांतों से समझौता करने का आरोप लगाया है। तंज भरे लहजे में रोहिणी ने निशांत कुमार को पॉलिटिकल डेब्यू पर बधाई दी है। उन्होंने दोनों का एक फोटो भी शेयर किया है।
सोशल मीडिया पर पोस्ट करके रोहिणी आचार्या ने नीतीश कुमार से पूछा है, " चाचा जी ... कहाँ विलुप्त हो गयी दूसरों के संदर्भ में कही गयी आपकी परिवारवाद वाली थोंथी दलील व बेतुकी थ्योरी ?.. आपकी कथनी और करनी में हमेशा बड़ा फर्क रहा है .. सच कहूँ तो आप राजनीतिक व वैचारिक विरोधाभास की वो पराकाष्ठा रहे हैं , जिस पर सटीक बैठती है , ये कहावत " पर उपदेश कुशल बहुतेरे " ...
वैसे निशांत को मेरी तरफ से हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं ... राजनीति में स्वागत है निशांत का इस उम्मीद के साथ कि निशांत आपकी तरह कुर्सी से चिपके रहने की राजनीति के इतर जनसरोकार की राजनीति करेंगे और फासीवादी भाजपा के आगे आपकी तरह कभी मजबूर, लाचार और बेबस नहीं दिखेंगे।"
इससे पहले भी रोहिणी आचार्या ने नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के निर्णय पर टिप्पणी की थी। सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि चाचा जी आसमान से गिरे, खजूर पर अटके। पीएम की कुर्सी पर बैठने के अरमान धरे के धरे रह गए। चाचा जी मुख्यमंत्री की कुर्सी से भी बड़ी बेरुखी के साथ जबरन हटाए गए। कहा था कि एक दफा फिर से याद दिला देती हूँ आपको कि अपने किए का फल देर-सवेर अपने हिस्से ही आता है। अपनोंके साथ बारम्बार बेवफाई करने वाले नीतीश कुमार जी खुद के गर्त में धकेले जाने और अपनी बदहाली के आप खुद जिम्मेदार हैं। आपके साथ आज जो हो रहा आप उसके ही हक़दार हैं। आज अवसरवादिता के शिखर पुरुष श्री नीतीश कुमार जी को जैसा निर्णय लेने के लिए भाजपा के द्वारा मजबूर किया गया।
यह भी कहा था कि नीतीश कुमार जी को किनारे/ठिकाने लगाने के लिए चलाए गए ऑपरेशन लोटसकी स्क्रिप्ट जरूर भाजपा ने लिखी। मगर, अमलीजामा नीतीश जी की ही पार्टी के उनके ही कुछ बेहद करीबियों ने पहनाया। सियासी जल्लादों के प्रेम में बेचारे चाचा जी कुछ ऐसे फंसे कि न इज्जत बची , न नेम -प्लेट पर मुख्यमंत्री का नाम। देख रहे हम सब ज्यादा पलटी मारने से हासिल हुआ मुकाम। मुझे तो कोई अचरज नहीं , मुझे मालूम था ये अंजाम।




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