जेब पर ईंधन की चोट, सफर से खेती तक बढ़ी मुश्किलें
जेब पर ईंधन की चोट, सफर से खेती तक बढ़ी मुश्किलें जेब पर ईंधन की चोट, सफर से खेती तक बढ़ी मुश्किलेंजेब पर ईंधन की चोट, सफर से खेती तक बढ़ी मुश्किलेंजेब प

कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के असर अब कटिहार की सड़कों और खेतों तक साफ दिखाई देने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद देशभर में पेट्रोल में 3.32 रुपये और डीजल में 3.13 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर कटिहार जिले के आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। शहर से लेकर गांव तक हर वर्ग महंगाई की इस नई मार से परेशान है। कटिहार में पेट्रोल की कीमत अब 103 रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 94 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। कुछ महीने पहले तक पेट्रोल करीब 98 रुपये और डीजल 89 रुपये प्रति लीटर के आसपास मिल रहा था। लगातार बढ़ रही कीमतों ने मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट बिगाड़ दिया है। रोज बाइक से नौकरी या कारोबार के लिए आने-जाने वाले लोगों का खर्च अचानक बढ़ गया है। शहर के कई निजी कर्मियों का कहना है कि पहले जितने पैसे में महीने भर बाइक चल जाती थी, अब उसी दूरी के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है。
पेट्रोल महंगा होने से परिवार के अन्य खर्चों में कटौती
पेट्रोल महंगा होने से परिवार के अन्य खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है। सबसे अधिक असर किसानों पर दिखाई दे रहा है। जिले के ग्रामीण इलाकों में सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में डीजल पंप का उपयोग होता है। डीजल महंगा होने से खेतों की सिंचाई लागत बढ़ गई है। मक्का, धान और सब्जी की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि खेती पहले ही महंगे बीज, खाद और मजदूरी के कारण दबाव में है, ऊपर से डीजल की कीमतों ने परेशानी और बढ़ा दी है। कई किसानों ने बताया कि एक बीघा खेत की सिंचाई में अब पहले से कहीं अधिक खर्च आ रहा है, जिससे मुनाफा लगातार घट रहा है।
ऑटो और छोटे वाहन चालकों की हालत भी खराब
ऑटो और छोटे वाहन चालकों की हालत भी खराब होती जा रही है। चालक बताते हैं कि किराया बढ़ाने पर यात्रियों की नाराजगी झेलनी पड़ती है, जबकि पुराने किराये पर वाहन चलाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। दूसरी ओर माल ढुलाई महंगी होने से बाजार में सब्जी, राशन और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ने लगे हैं। छोटे कारोबारियों का कहना है कि परिवहन खर्च बढ़ने से व्यापार पर असर पड़ रहा है।
गृहिणियों की बढ़ी चिंता
गृहिणियों की चिंता भी बढ़ गई है। रसोई का बजट पहले से ही महंगाई के दबाव में था, अब ईंधन महंगा होने से खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका और गहरा गई है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में महंगाई और तेज हो सकती है।
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