बढ़ती कीमतों ने छीनी रफ्तार, सपनों पर भारी पड़ा महंगा ईंधन
बढ़ती कीमतों ने छीनी रफ्तार, सपनों पर भारी पड़ा महंगा ईंधन बढ़ती कीमतों ने छीनी रफ्तार, सपनों पर भारी पड़ा महंगा ईंधनबढ़ती कीमतों ने छीनी रफ्तार, सपनों पर

कटिहार , हिन्दुस्तान प्रतिनिधि पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जिंदगी की रफ्तार धीमी कर दी है। कभी बिना सोचे-समझे बाइक निकालकर बाजार या रिश्तेदारी चले जाने वाले लोग अब हर किलोमीटर का हिसाब लगाने लगे हैं। महंगे ईंधन ने सिर्फ वाहनों की टंकी ही नहीं, बल्कि परिवारों की उम्मीदों और सपनों को भी प्रभावित किया है। शहर में नौकरी करने वाले युवाओं का कहना है कि वेतन जितना बढ़ नहीं रहा, उससे कहीं ज्यादा खर्च बढ़ता जा रहा है। रोजाना बाइक से आने-जाने में पहले जितना खर्च होता था, अब उससे काफी अधिक रुपये लग रहे हैं। कई परिवारों ने अनावश्यक यात्रा कम कर दी है। बच्चों की कोचिंग, बाजार की खरीदारी और छोटे-छोटे घरेलू कामों पर भी अब खर्च सोच-समझकर किया जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और चिंताजनक
ग्रामीण इलाकों में स्थिति और चिंताजनक है। किसान रामकुमार मंडल, रमेश चौघरी बताते हैं कि डीजल महंगा होने से खेतों की सिंचाई का खर्च बढ़ गया है। इसका असर सीधे खेती की लागत और आमदनी पर पड़ रहा है। कई छोटे किसान अब खेती में कटौती करने की बात सोचने लगे हैं। ऑटो चालकों और छोटे व्यापारियों की मुश्किलें भी बढ़ी हैं। कमाई वही है, लेकिन रोजाना का खर्च लगातार ऊपर जा रहा है। बाजार में माल ढुलाई महंगी होने से सब्जियों और जरूरी सामान के दाम भी बढ़ने लगे हैं। लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और ज्यादा बढ़ेगा। कटिहार में ईंधन की यह बढ़ती कीमत अब हर घर की चिंता और चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन चुकी है।
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