कहलगांव विधानसभा सीट: 56 साल बाद नहीं दिखेगी सदानंद सिंह की भागीदारी, कांग्रेस के गढ़ में चुनावी टक्कर
बिहार चुनाव: 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सियासी पारी को विराम दिया। चुनाव में कांग्रेस ने सदानंद सिंह के पुत्र शुभानंद मुकेश को उनके उत्तराधिकारी के रूप में चुनाव मैदान में उतारा। शुभानंद मुकेश को सफलता नहीं मिली। चुनाव बाद 2021 में सदानंद सिंह का निधन हुआ।

बिहार चुनाव: बिहार के दिग्गज नेताओं में सदानंद सिंह शामिल थे। सदानंद सिंह बिहार विधानसभा अध्यक्ष के अलावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सूबे के मंत्री भी रहे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1985 में कांग्रेस ने उनका टिकट काटा तो वह कहलगांव विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। 1969 के विधानसभा चुनाव में इंट्री करने वाले सदानंद सिंह की 56 साल बाद पहली बार 2025 के विधानसभा चुनाव में भागीदारी नहीं दिखेगी।
सदानंद 12 चुनाव लड़े, नौ में जीत दर्ज की
आजादी के बाद से कहलगांव विधानसभा सीट पर 17 बार विधानसभा के चुनाव हुए। सदानंद सिंह ने 12 बार चुनाव लड़ा और नौ बार जीत दर्ज की। 1977 के चुनाव में बिहार में जनता पार्टी की लहर थी। लेकिन सदानंद सिंह ने विपरीत परिस्थिति में भी कहलगांव विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। एक बार उन्होंने भागलपुर लोकसभा सीट से भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली।
2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सियासी पारी को विराम दिया। चुनाव में कांग्रेस ने सदानंद सिंह के पुत्र शुभानंद मुकेश को उनके उत्तराधिकारी के रूप में चुनाव मैदान में उतारा। शुभानंद मुकेश को सफलता नहीं मिली। चुनाव बाद 2021 में सदानंद सिंह का निधन हुआ। उनके निधन के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहा है।
पहली बार भाजपा का खाता खुला
कहलगांव विधानसभा सीट पर 11 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। दो बार जनता दल, एक-एक बार भाजपा, जदयू, सीपीआई और निर्दलीय की जीत हुई है। 2020 में पहली बार भाजपा प्रत्याशी पवन कुमार यादव ने कांग्रेस प्रत्याशी शुभानंद मुकेश को 42 हजार 893 मतों से पराजित किया था। इस सीट पर यह रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज किया गया। सदानंद सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र शुभानंद मुकेश जदयू में शामिल हो गये।
कई दावेदारों की है नजर
अभी महागठबंधन और एनडीए में सीट और विधानसभा क्षेत्र का बंटवारा नहीं हुआ है। इस सीट पर कांग्रेस, भाजपा और जदयू नेताओं की नजर है। कहलगांव विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रहा है। इसको देखते हुए पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के खाते में आएगी। कई दावेदार क्षेत्र में संपर्क अभियान चला रहे हैं। दूसरी तरफ इस सीट पर एनडीए की तरफ से भाजपा के वर्तमान विधायक हैं। इसके बावजूद कई नेता इस सीट को जदयू के खाते में लाने के लिए वरीय नेताओं के संपर्क में हैं।
विधायक पवन यादव ने कहा कि ग्रामीण सड़कों का जाल बिछ रहा है। शहर में जलापूर्ति सुदृढ़ हुई। सन्हौला और गोराडीह में स्टेडियम की स्वीकृति मिली। एकचारी में रेल ओवरब्रिज का निर्माण कराया। अस्पताल में सुविधाएं बढ़ीं। रोजगार सृजन फोकस में है।
राजद के प्रखंड अध्यक्ष, मो. फखरुद्दीन, ने कहा कि विधायक ने छलावा करने का काम किया है किया है। एश डाइक से उड़ने वाले राख से क्षेत्रवासी परेशान हैं। विधायक ने भरोसा दिलाया था कि एश नहीं उड़ेगा। इसके लिए कोई काम नहीं हुआ। कटाव पीड़ित का पुनर्वास नहीं कराया जा सका।
पिछले पांच साल में जो विकास कार्य हुए
एनएच-80 निर्माण कार्य हो रहा। विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण कार्य विभाग से 224 सड़कों की स्वीकृति और काम। सन्हौला प्रखंड के ताड़र में आईटीआई कॉलेज भवन बना। भागलपुर-कोतवाली सड़क चौड़ीकरण की मंजूरी मिली। एकचारी में रेल फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण की स्वीकृति। कहलगांव नगर में एसटीपी का निर्माण हो रहा है। ताड़र कॉलेज मैदान एवं गोराडीह प्रखंड के विरनौध में उच्च विद्यालय मैदान में स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति।
इस बार चुनाव में भी जो मुद्दे बनेंगे
सनोखर बाजार को प्रखंड कार्यालय बनाए जाने की मांग हो रही है। एनटीपीसी के एस डाइक का मुद्दा बड़ा है। चंडिका स्थान के पास मेगा फूड पार्क के लिए 67 एकड़ अधिग्रहीत जमीन में उद्योग लगाने की मांग।




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