32 लाख कैश और सोने-चांदी के गहने फेंकते पकड़ा गया, एसवीयू रेड से बौखलाया इंजीनियर
बिहार एसवीयू की टीम ने पटना में बीएमएसआईसीएल के डीजीएम इंजीनियर पंकज कुमार के आवास पर छापेमारी की तो, वह घर में रखा 32 लाख रुपये कैश और सोने-चांदी के आभूषण खिड़की से बाहर फेंकने लगा।

विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) के उप महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट) पंकज कुमार के पटना स्थित कार्यालय और आवास सहित तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान डीजीएम के कदमकुआं स्थित आवास से 1.31 करोड़ रुपये के सोने, चांदी व हीरे के आभूषण और करीब 32 लाख रुपये नकद सहित निवेश संबंधित कई दस्तावेज बरामद हुए हैं। एसवीयू के मुताबिक आरोपी जांच टीम को देख कर बौखला गया और आनन-फानन में घर में रखे आभूषण और नकदी को खिड़की से बाहर फेंकने लगा, जिसे जब्त कर लिया गया है।
एसवीयू थाने में पंकज कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन शुरू की गई है। एसवीयू टीम ने गुरुवार को कोर्ट से अनुमति लेकर डीजीएम के ठिकानों को खंगाला। जांच एजेंसी के मुताबिक डीजीएम एवं उनकी पत्नी के नाम से अचल संपत्ति के कई दस्तावेज मिले हैं। कंकड़बाग पटना के पृथ्वीपुर स्थित शिवम अपार्टमेंट में इनके दो फ्लैट संख्या 305 एवं 405 का पता चला है। इसके अलावा कदमकुआं स्थित कोनिका मैहर अपार्टमेंट में फ्लैट संख्या 105 भी है।
छापेमारी के दौरान डीजीएम के सेवाकाल में खरीदे गए सोने के आभूषणों की 150 से अधिक रसीद पाई गई, जिनका अलग से अनुसंधान किया जा रहा है। इसके अलावा वित्तीय संस्थाओं में निवेश संबंधित विभिन्न दस्तावेज और बैंक खातों की भी पड़ताल हो रही है। डीजीएम ने स्वीकार किया है कि आवास से बरामद 32 लाख रुपये नकद और 1.31 करोड़ रुपये के हीरे, सोने व चांदी के आभूषण उनकी ही परिसंपत्ति है।
13 साल की सेवा में जमा की अकूत संपत्ति
एसवीयू के मुताबिक प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि उप महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट) पंकज कुमार ने अपने 13 साल के सेवाकाल में अकूत संपत्तियां अर्जित की हैं। इन्होंने 2013 में सहायक अभियंता के तौर पर बिहार सरकार में योगदान दिया था। एसवीयू के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) पंकज कुमार दाराद ने बताया कि इंजीनियर पंकज कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में एसवीयू कांड संख्या 10/2026 दर्ज किया गया है। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (यथा संशोधित 2018) की धाराएं लगाई गई हैं।
प्रारंभिक जांच के बाद उन पर गैरकानूनी और नाजायज ढंग से 96.46 लाख रुपये की संपत्ति अर्जित किए जाने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लेकिन, छापेमारी के दौरान इनके द्वारा अर्जित अकूत संपत्ति के साक्ष्य मिले हैं, जो कि एफआईआर में वर्णित आरोप की तुलना में कई गुना अधिक है। एसवीयू के वरीय पुलिस उपाधीक्षक संजय कुमार वर्मा इस केस के जांचकर्ता बनाए गए हैं।
(रिपोर्ट- हिन्दुस्तान ब्यूरो)




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