भ्रष्ट लोकसेवकों की अब खैर नहीं, विजिलेंस ऐक्शन में स्पीडी ट्रायल चला सजा के लिए खास प्लान
निगरानी ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि इस साल भ्रष्टाचार के 122 मामलों में कार्रवाई की है। इनमें 101 मामले रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने का, 15 मामले आय से अधिक संपत्ति और सात मामले पद के भ्रष्ट दुरुपयोग से संबंधित है।

बिहार सरकार भ्रष्ट लोकसेवकों पर शिकंजा और अधिक टाइट करने की तैयारी कर रही है। इस मकसद से खास प्लान तैयार किया गया है। अब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों की स्पीडी ट्रायल को लेकर नया कोषांग बनेगा। इसके साथ ही भ्रष्टाचारी पदाधिकारी और कर्मी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही के शीघ्र संचालन को लेकर भी अलग कोषांग गठित होगा। दोतरफा कार्रवाई करते हुए जल्द से जल्द सजा दिलाई जाएगी जिससे अन्य कर्मियों और अधिकारियों को कड़ा संदेश जाए। नीतीश कुमार की सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती है। इसे लागू करने की दिशा में प्रयास तेज हो गया है।
निगरानी ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी। उन्होंने इस मौके पर ब्यूरो के साल भर की उपलब्धियों का ब्यौरा भी पेश किया। निगरानी ने इस साल भ्रष्टाचार के 122 मामलों में कार्रवाई की है। इनमें 101 मामले रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने का, 15 मामले आय से अधिक संपत्ति और सात मामले पद के भ्रष्ट दुरुपयोग से संबंधित है। निगरानी ने पिछले 25 सालों में इस साल सबसे अधिक व कई गुणा अधिक कार्रवाइयां की है।
बिहार में सरकारी सेवकों के भ्रष्ट आचरण पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी विभाग काफी एक्टिव रहता है। शिकायत दर्ज कराने पर ट्रैपिंग और ऐक्शन में निगरानी विभाग तत्परता के साथ काम करती है। हर साल सैंकड़ों की संख्या में आरोपियों को दबोचा जाता है। विभाग की ओर से रेड कर काली कामाई का भी खुलासा किया जाता है।
पुलिस और राजस्व विभाग में सबसे अधिक कार्रवाई होती है। लेकिन कार्रवाई के बाद आरोपियों को सजा मिलने में काफी वक्त गुजर जाता है। कई बार सजा से पहले ही आरोपी या शिकायतकर्ता की मौत भी हो जाती है। इसे देखते हुए स्पीडी ट्रायल चलाकर मामलों को निपटाने के लिए अलग से कोषांग का गठन किया जा रहा है।




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