बिहार में बिजली कंपनियों की हुई रिकॉर्ड कमाई, सरकारी विभागों से मिले 2200 करोड़
जनता और ऊर्जा विभाग के बीच परस्पर सामंजस्य, कम्पनियों की बेहतर सेवाओं तथा चौबीसो घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति की उपलब्धता का ही परिणाम है कि उपभोक्ताओं ने अपने बिजली बिल का नियमित भुगतान किया है। इन वजह से वितरण कम्पनियों ने रिकॉर्ड राजस्व संग्रहण किया।

बिहार की बिजली कंपनियों ने रिकॉर्ड कमाई की है। 31 मार्च को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 19 हजार करोड़ से अधिक की आमदनी की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 1916 करोड़ यानी 12 फीसदी अधिक है। इस आमदनी में एनबीपीडीसीएल ने 8,866 करोड़ तो एसबीपीडीसीएल ने 10,169 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है। ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिजली कंपनी का यह कीर्तिमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी नेतृत्व तथा राज्य सरकार की लोकोन्मुखी नीतियों के सकारात्मक प्रभाव से संभव हो पाया है।
साथ ही राज्य के लोगों के निरंतर सहयोग एवं तत्परता से बिजली बिल जमा करने की वजह से वितरण कम्पनियों ने यह उपलब्धि हासिल की। जनता और ऊर्जा विभाग के बीच परस्पर सामंजस्य, कम्पनियों की बेहतर सेवाओं तथा चौबीसो घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति की उपलब्धता का ही परिणाम है कि उपभोक्ताओं ने अपने बिजली बिल का नियमित भुगतान किया है। इन वजह से वितरण कम्पनियों ने रिकॉर्ड राजस्व संग्रहण किया।
सरकार के विभागों से मिले 22 सौ करोड़
ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि सरकारी विभागों से 2200 करोड़ का भुगतान हुआ है, जिनमें शिक्षा विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, पंचायती राज विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, गृह (पुलिस), खेल विभाग, उद्योग विभाग, पर्यटन विभाग का केन्द्रीकृत रूप से भुगतान प्राप्त हुआ है। वितरण कम्पनियों ने सरकार के राजकोष में 2263 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व जमा किया है, जो विद्युत कम्पनियों का अब तक का सबसे बड़ा योगदान है। वाणिज्यकर विभाग को विद्युत शुल्क के रूप में 2234 करोड़ रुपये दिये गए हैं।
जीएसटी मद में भी 29 करोड़ जमा किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में शहरी घरेलू उपभोक्ता, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पूर्व की 100 यूनिट से अधिक खपत पर लगने वाली अतिरिक्त दर को समाप्त करते पूर्व की न्यूनतम दर पर ही सभी खपत यूनिटों का विपत्रीकरण किया गया है। इससे 100 यूनिट से अधिक खपत करने पर शहरी घरेलू उपभोक्ता को 1.53 रुपये प्रति यूनिट , ग्रामीण गैर घरेलू उपभोक्ता को 0.42 रुपये प्रति यूनिट तो शहरी गैर घरेलू उपभोक्ता को 1.20 रुपये प्रति यूनिट की बचत होगी। मशरूम की खेती को कृषि का दर्जा दिया गया है। 10 किलोवाट से अधिक भार वाले सभी उपभोक्ता (कृषि उपभोक्ता को छोड़कर) एवं स्मार्ट मीटर के सभी उपभोक्ता के लिए टीओडी (टाइम ऑफ डे) टैरिफ अनिवार्य किया गया है।




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