बड़े काम का निकला अंडा का छिलका; वैज्ञानिकों ने नैनो फिल्टर बनाया, कैंसर कंट्रोल करने में मददगार
शोध टीम का कहना है कि यह जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए सस्ता और प्रभावी समाधान साबित हो सकता है। इसे आम लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है।

Science and Technology: आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (एकेयू) के वैज्ञानिकों ने अंडे के छिलकों से एक नैनो-टेक्नोलॉजी आधारित फिल्टर विकसित किया है। यह पानी में मौजूद आर्सेनिक, फ्लोराइड और लेड जैसे जहरीले तत्वों को हटाने में कारगर होगा। शोध को पेटेंट भी मिल गया है। स्कूल ऑफ नैनोसाइंस एंड नैनोटेक्नोलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार बताते हैं कि अंडे के छिलकों से तैयार यह तकनीक जल शोधन के क्षेत्र में नई दिशा दे सकती है। भविष्य में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अंडे के छिलके को नैनोकण बनाने के क्रम में लेमन और एलोबेरा जैसे हर्बल का उपयोग कर उच्च तकनीकी पदार्थ बनाया गया है, जो वातावरण को कार्बन उत्सर्जन से भी बचाएगा। इस तरीके से दुषित जल से होने वाले कैंसर से भी बचाव हो सकेगा।
कचरे से नैनो मटेरियल तैयार किया
फैकल्टी मेंबर डॉ. अभय कुमार अमन, विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार सिंह और पीएचडी शोधार्थी आशीष कुमार की टीम ने इस तकनीक को विकसित किया है। अंडे के छिलकों को प्रोसेस कर कैल्शियम ऑक्साइड के नैनोकण तैयार किए हैं, जो पानी में मौजूद विषैले तत्वों को तेजी से सोख लेता हैं। यह नैनोकण न सिर्फ आर्सेनिक, फ्लोराइड और लेड जैसे तत्वों को हटाते हैं, बल्कि बैक्टीरिया और अन्य रोगाणुओं को भी निष्क्रिय कर पानी को सुरक्षित बनाता है।
शोध टीम का कहना है कि यह जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए सस्ता और प्रभावी समाधान साबित हो सकता है। इसे आम लोगों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस तकनीक के व्यावसायिक उपयोग और बड़े पैमाने पर उत्पादन की दिशा में काम कर रहा है। इसे ‘जल जीवन मिशन’ जैसी योजनाओं से जोड़ने की भी योजना है। वहीं इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शरद कुमार यादव ने कहा कहा कि यह बिहार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। संस्थान के शिक्षक काफी उत्साहित हैं। शिक्षकों ने विवि का मान बढ़ाया है।
कम लागत और बिना बिजली के चलेगा
शिक्षक डॉ. अभय कुमार अमन बताते हैं कि इस नैनो-फिल्टर की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत और आसान उपयोग है। महंगे आरओ सिस्टम की तुलना में यह सस्ता है। बिजली की आवश्यकता नहीं है। रखरखाव सरल है। यह आम लोगों की जरूरत की चीज है। वह बताते हैं कि यह‘वेस्ट टू वेल्थ’ के मॉडल पर देखना चाहिए। इस तकनीक में घरेलू कचरे यानी अंडे के छिलकों का उपयोग किया गया है। साथ ही प्राकृतिक हर्बल घोल के इस्तेमाल से इसे पर्यावरण-अनुकूल बनाया गया है।




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