बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन रोकने की मांग; तेजस्वी के नेतृत्व में CEO से मिले महागठबंधन के नेता
बिहार में जारी वोटर लिस्ट रिवीजन के मामले पर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन के नेताओं ने बिहार के सीईओ से मुलाकात की। इस दौरान मतदाता पुनरीक्षण कार्य को तत्काल रोकने और प्रामाणिक दस्तावेजों को भी स्वीकार्य बनाने पर पुनर्विचार करने की मांग की,अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी।

मतदाता गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने शुक्रवार को बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल से मुलाकात की। नेता प्रतिपतक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में गए शिष्टमंडल ने तत्काल मतदाता पुनरीक्षण कार्य को रोकने की मांग की। इस बाबत एक ज्ञापन भी सौंपा गया। शिष्टमंडल ने चुनाव आयोग से ग्रामीण और वंचित तबकों के हित में अन्य प्रामाणिक दस्तावेजों को भी स्वीकार्य बनाने पर पुनर्विचार करने की मांग की गई। ऐसा न होने पर सड़कों पर आंदोलन करने की चेतावनी दी गई।
आयोग से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी ने कहा कि क्या आयोग को केवल 11 दस्तावेज मांगने का ही अधिकार है? संविधान का अनुच्छेद 326, व्यस्क मताधिकार का आधार तय करता है। आधार कार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड आदि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में अस्वीकार्य क्यों है। चार करोड़ से अधिक निवासी अन्य राज्यों में स्थायी और अस्थायी कार्य करते हैं। क्या 18 दिन में वो अपना सत्यापन करा पाएंगे? क्या सरकारी स्तर पर उन्हें बिहार लाने की कोई योजना है अथवा उनके वोट काटना उद्देश्य है?
तेजस्वी ने कहा कि सत्यापन कार्य में मतदाता को सफेद पृष्ठभूमि के साथ अपनी रंगीन फ़ोटो लगानी है। क्या सभी घरों/परिवारों में फ़ोटो उपलब्ध है? क्या अन्य दस्तावेज़ों की फ़ोटोकॉपी उपलब्ध है? यह प्रक्रिया गरीब मतदाताओं के उत्पीड़न के अलावा वित्तीय बोझ है। प्रतिनिधिमंडल में राजद से प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल, सांसद मनोज कुमार झा और संजय यादव, पूर्व मंत्री आलोक कुमार मेहता, प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन, कार्यालय प्रभारी मुकुंद सिंह, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल के नेता शकील अहमद, संजय पाण्डेय, वीआईपी के मुकेश सहनी, सीपीआई एमएल के कुमार परवेज, सीपीआई के रामनरेश पाण्डेय, सीपीएम के ललन चौधरी शामिल थे।
चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने कहा कि मतदाता पुनरीक्षण वोटरों के साथ भद्दा मजाक है। लोकतंत्र में सबसे अधिक शक्तिशाली मतदाता हैं लेकिन इन्हें ही अधिकारों से वंचित करने की साजिश रची जा रही है। हमारी पार्टी शुरू से ही भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग के मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान का विरोध कर रही है। हम लोग लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को समाप्त नहीं होने देंगे।
भाजपा एवं एनडीए गठबंधन में शामिल पार्टियां विधानसभा चुनाव में अपनी हार के अंदेशे से निर्वाचन आयोग का सहारा लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों एवं मलिन बस्तियों में बसने वाले दलित, गरीब, वंचित एवं शोषित तबके के मतदाताओं के मतदान के अधिकार को छिनने का षड्यंत्र रच रही है। मतदाता पुनरीक्षण वोटबंदी है।




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