Demand to lift Bihar liquor ban from NDA side Upendra Kushwaha MLA says we are suffering losses बिहार NDA में शराबबंदी का विरोध तेज, उपेंद्र कुशवाहा के विधायक बोले- हमें नुकसान हो रहा, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार NDA में शराबबंदी का विरोध तेज, उपेंद्र कुशवाहा के विधायक बोले- हमें नुकसान हो रहा

नीतीश सरकार की शराबबंदी का अब एनडीए में ही विरोध होने लगा है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो के विधायक माधव आनंद ने एक बार फिर शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की मांग की है। हाल ही में भाजपा विधायक विनय बिहारी भी यह मांग कर चुके हैं।

Mon, 23 Feb 2026 03:44 PMJayesh Jetawat लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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बिहार NDA में शराबबंदी का विरोध तेज, उपेंद्र कुशवाहा के विधायक बोले- हमें नुकसान हो रहा

बिहार में शराबबंदी कानून को हटाने की मांग तेज हो गई है। विपक्ष के साथ ही अब सत्ताधारी दलों के नेता भी शराबबंदी पर सवाल उठाते हुए इसकी समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं। राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायक माधव आनंद ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि शराबबंदी की वजह से हमें (राज्य को) नुकसान हो रहा है। वे सदन में भी यह मांग रख चुके हैं। वहीं, पिछले सप्ताह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक विनय बिहारी ने भी सदन में शराबबंदी को खत्म करने की मांग अपनी ही सरकार से की थी।

मधुबनी सीट से रालोमो के विधायक माधव आनंद ने सोमवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत में कहा कि शराबबंदी कानून की समीक्षा होनी चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक यह मांग कर रहे हैं। यह जनहित से जुड़ा हुआ मामला है।

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उन्होंने कहा, "सरकार ने जिन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए शराबबंदी लागू की थी, 10 साल लंबा समय होता है, इस दौरान हमने क्या खोया और क्या पाया। इसकी समीक्षा होनी चाहिए। लक्ष्यों की प्राप्ति हुई या नहीं? लोगों के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ा? बिहार सरकार को राजस्व को कितना नुकसान हुआ?"

माधव ने आगे कहा कि आज हमारा राजस्व उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और नेपाल में जा रहा है। जो कमाई बिहार को होनी चाहिए थी, वो तीन राज्यों और एक दूसरे देश को मिल रही है। इससे हमारा नुकसान हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जनहित का मामला है। अगर कोई विधायक जनहित के मुद्दे को उठाता है तो इसका मतलब यह नहीं कि हम एनडीए से बाहर चले जाएं।

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समीक्षा से इनकार कर चुकी है नीतीश सरकार

बीते मंगलवार को भी विधानसभा के अंदर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाकर रालोमो विधायक ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग अपनी सरकार से की थी। उस समय नीतीश सरकार के मंत्री विजय चौधरी ने उनकी मांग को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि बिहार में शराबबंदी लागू रहेगी, किसी स्तर पर इसकी समीक्षा करने का विचार सरकार का नहीं है।

भाजपा विधायक ने शराबबंदी को बताया विफल

दूसरी ओर, पश्चिम चंपारण जिले के लौरिया से भाजपा विधायक विनय बिहारी ने भी विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने शराबबंदी को विफल करार देते हुए कहा कि बिहार में जगह-जगह दारू मिल रही है। उन्होंने अपनी सरकार से मांग की है कि या तो शराबबंदी को पूरी तरह से लागू किया जाए, या फिर पहले की स्थिति वापस लाई जाए यानी शराब को फिर से चालू कर दिया जाए।

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सत्ता पक्ष के विधायकों द्वारा शराबबंदी का विरोध किए जाने के बाद अब नीतीश सरकार पर इसकी समीक्षा का दबाव बढ़ रहा है। विपक्ष की ओर से भी लगातार इस पर सवाल उठा रहे हैं। आरजेडी, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि बिहार में शराबबंदी सिर्फ नाम की है, हकीकत में सब जगह इसकी होम डिलीवरी हो रही है। कांग्रेस के एक विधायक ने तो पिछले सप्ताह सदन में कह दिया था कि अगर चाहें तो विधानसभा के अंदर भी शराब की डिलीवरी हो जाएगी।

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