बिहार में 30 हजार करोड़ का शराब कारोबार, विधानसभा में RJD विधायक ने गिनाए आंकड़े
रणविजय साहू ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून पूरी तरह से विफल हो चुका है। हाल ही में 18 फरवरी 2026 को रोहतास जिले में जहरीली शराब पीने से 5 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा सीवान, सारण और गोपालंगज में जहीरीली शराब पीने से 35 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हुई।

बिहार में पिछले कई सालों से शराबबंदी कानून लागू है। लेकिन हाल में बिहार के राजनीतिक हलको में बिहार में शराबबंदी को लेकर खूब चर्चा है। बिहार विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों ही जगहों पर शराबबंदी को लेकर बहस का दौर है। सोमवार को राष्ट्रीय जनता दल के विधायक रणविजय साहू ने सदन के अंदर आंकड़े गिनाकर यह दावा किया कि राज्य में शराब का 30 हजार करोड़ का कारोबार है। रणविजय साहू ने विधानसभा में बिहार के अलग-अलग राज्यों में जहरीली शराब से हुई मौतों के आंकड़े गिनाए और कहा कि पुलिस-प्रशासन पूर्ण शराबबंदी लागू कराने में विफल है।
रणविजय साहू ने कहा कि बिहार में शराबबंदी कानून पूरी तरह से विफल हो चुका है। हाल ही में 18 फरवरी 2026 को रोहतास जिले में जहरीली शराब पीने से 5 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा सीवान, सारण और गोपालंगज में जहीरीली शराब पीने से 35 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हुई। कई लोगों की आंख की रोशनी भी चली गई। सरकारी और एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2016 में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से अब तक राज्य में जहीरीली शराब से 300 से अधिक जानें जा चुकी हैं।
राज्य में प्रशासन और शराब माफियाओं की मिलीभगत से 30 हजार करोड़ का समानांतर ब्लैक मार्केटिंग का कारोबार चल रहा है। विदेशी शराब की होम डिलीवरी से लेकर गली-मोहल्लों में महुआ शराब की खुलेआम ब्रिकी हो रही है। उत्पाद विभाग के द्वारा केवल छोटे तस्करों को पकड़कर आंकड़ों की खानापूर्ति की जा रही है जबकि कई सिंडिकेट बेखौफ काम कर रहे हैं। इस प्रशासनिक विफलता की सबसे बड़ी कीमत राज्य के गरीब परिवार के लोग अपनी जान देकर चुका रहे हैं। अपनी बातें रखते हुए राजद विधायक ने विधानसभा के अंदर इसपर अविलंब चर्चा की मांग भी उठाई।
एनडीए के लोग शराब कारोबार में- भाई वीरेंद्र
RJD के ही एक अन्य विधायक भाई वीरेंद्र ने विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान बिहार में शराबबंदी पर अपनी बात रखी। भाई वीरेंद्र ने कहा कि पूरे बिहार में कोई ऐसा गांव, कस्बा या शहर नहीं है जहां शराब का होम डिलीवरी नहीं होता हो। बाजार में नहीं बिक रहा हो। शराबबंदी के नाम पर केवल नाटक हो रहा है। शराब उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल से आ रहा है। सरकार खुद अपनी पीठ थपथपा रही है। बिहार के नौजवान सूख नशे की गिरफ्त में हैं। एनडीए के लोग ही इसमें कारोबार किए हुए हैं। इसलिए शराबबंदी पर सरकार कोई विचार नहीं कर रही है।
शराबबंदी खत्म हो- माधव आनंद
इधर एनडीए के सहयोगी दल रालोमो के एक विधायक माधव आनंद ने एक बार फिर शराबबन्दी ख़त्म करने की मांग की है। माधव आनंद ने कहा कि बिहार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसकी समीक्षा होनी चाहिए। पक्ष-विपक्ष सब यही चाहते हैँ।




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