माले, मुकेश और कांग्रेस, राजद की कितनी सीट तेजस्वी और लालू महागठबंधन में दूसरों को देंगे?
महागठबंधन में सीट बंटवारा अपने आखिरी दौर में है। 2020 के मुकाबले इस बार महागठबंधन में दलों की संख्या ज्यादा है। जिसके चलते आरजेडी को अपने कोटे से सीटें सहयोगी दलों को देनी होंगी। जिसमें माले, वीआईपी, जेएमएम और रालोजपा शामिल हैं।

बिहार चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से महागठबंधन में सीट बंटवारे की कवायद तेज हो गई है। हाल में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के एक पोलो रोड स्थित आवास पर हुई बैठक करीब 5 घंटे चली। जिसमें अलायंm के सभी घटक दलों के नेता शामिल हुए। बैठक के बाद बताया गया कि सीट बंटवारा फाइनल हो गया है। और बहुत जल्द सीट बंटवारे का ऐलान होगा। लेकिन महागठबंधन में लेफ्ट दलों ने तेजस्वी की टेंशन बढ़ा दी है।
इसके अलावा इस बार महागठबंधन में मुकेश सहनी की वीआईपी के अलावा दो और दल पशुपति पारस की रालोजपा और हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) भी शामिल माने जा रहे हैं। महागठबंधन में कुल अब 8 दल हैं। ऐसे में इस बार आरजेडी को अपने कोटे से सहयोगी दलों को सीटें देनी होंगी। सवाल उठाल उठ रहा है कि आखिर कितनी सीटें लालू-तेजस्वी अलायंस के सहयोगियों को देंगे।
बात अगर महागठबंधन के घटक दलों की सीटों की मांग की करें तो भाकपा माले ने 40 सीटों, कांग्रेस ने 60 से 66 सीट, वीआईपी ने 60, भाकपा ने 24, माकपा ने 11 सीटों की मांग की है। वहीं मंगलवार को जेएमएम के नेताओं ने भी तेजस्वी से मुलाकात की और 12 सीटों पर दावा ठोंका है। राजद सूत्रों के मुताबिक जेएमएम को 3 से 6 सीटें मिलने के आसार है। वहीं सबसे ज्यादा टेंशन माले ने दे रखी है। इस बार माले ने 40 सीटों पर दावा ठोंका है। बीते चुनाव 2020 में माले 19 सीटों पर लड़ी थी, और 12 सीटें जीती थी। सबसे अच्छा स्ट्राइक माले का था। उसी को आधार बनाकर इस बार 40 सीटों की मांग की है।
बताया जा रहा है कि माले को 20-25 सीटें मिल सकती है। माले के साथ-साथ सीपीआई और सीपीएम ने भी 24 और 11 सीटों की मांग रखी है। मंगलवार को सीपीआई के महासचिव डी राजा ने तेजस्वी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होने 24 सीटों की लिस्ट सौंपी, और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सम्मानजनक सीटें मिलेंगी। पिछली बार 70 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस इस बार सीटों के मामले में थोड़ा बैकफुट पर है। कांग्रेस 60 से 66 की मांग की है। साथ ही इस बार जिताऊ सीटों पर नजर है। जिसमें पिछली बार जीती हुईं 19 सीटें भी शामिल हैं।
वहीं विकासशील इंसान पार्टी के चीफ मुकेश सहनी भी 60 सीटों पर दावा ठोंक चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सहनी की वीआईपी को 20 सीटें तक मिल सकती है। हालांकि सहनी ने डिप्टी सीएम पद की भी डिमांड कर रखी है। उनका कहना है कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी तो डिप्टी सीएम वीआईपी का होगा। ऐसे में देखने वाली बात ये है कि लालू-तेजस्वी आरजेडी के कोटे से सहयोगी दलों को कितनी सीटें देंगे।
आपको बता दें 2020 में आरजेडी 144 सीटों पर लड़ी थी। और 75 सीटें जीतने में सफल रही थी। 50 फीसदी से ज्यादा का स्ट्राइक रेट था। लेकिन इस बार लग रहा है कि राजद पिछली की तरह 140 से ज्यादा सीटों पर नहीं लड़ पाएगी। और अपने कोटे की सीटें जेएमएम, रालोजपा, माले को सहनी को देनी पड़ सकती है। चर्चा है कि आरजेडी इस बार अपने कोटे की 10-15 सीटें सहयोगियो को दे सकती है। 2020 में 144 पर लड़ने वाली राजद इस बार 130-135 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।
खैर सीट बंटवारे के सही आंकड़े तो महागठबंधन के ऐलान के बाद ही पता चल सकेंगे। लेकिन इस बार महागठबंधन में सीट बंटवारा पिछली बार की तरह आसान नहीं होने वाला है। क्योंकि 2020 के 2025 में महागठबंधन के सहयोगी दलों की संख्या 8 है। जिसमें खुद आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई-माले, सीपीआई, सीपीएम, मुकेश सहनी की वीआईपी, पशुपति पारस की रालोजपा और हेमंत सोरेन की जेएमएम भी है। जबकि 2020 में महागठबंधन में राजद, कांग्रेस और लेफ्ट की तीन पार्टियां शामिल थी।




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