IAS अफसरों को सैर कराता था भ्रष्ट रिशु श्री, कई विभागों के अफसरों से रिश्ता; ईडी के ऐक्शन से हड़कंप
जांच एजेंसी के निशाने पर जल संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, भवन निर्माण विभाग के अलावा नगर विकास विभाग की एजेंसी बुडको और स्वास्थ्य विभाग की एजेंसी बीएमएसआईसीएल के तत्कालीन अधिकारी और कर्मी हैं।

सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार मामले में ठेकेदार रिशु श्री की गिरफ्तारी और दो आईएएस अफसरों पर निलंबन की कार्रवाई के बाद कई अफसर-कर्मी कार्रवाई के डर से सहमे हैं। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार के पांच विभाग और उनकी कार्य एजेंसियों में तैनात रहे तत्कालीन करीब दर्जनभर अफसर और कर्मी जांच एजेंसियों के सीधे रडार पर हैं। ईडी की जांच के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्य और गवाही के आधार पर भविष्य में उनसे पूछताछ संभव है।
जांच एजेंसी के निशाने पर जल संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, भवन निर्माण विभाग के अलावा नगर विकास विभाग की एजेंसी बुडको और स्वास्थ्य विभाग की एजेंसी बीएमएसआईसीएल के तत्कालीन अधिकारी और कर्मी हैं। पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग) के तहत दर्ज मामले में ईडी ने छापेमारी के बाद पिछले साल ठेकेदार रिशु श्री और बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी का बयान दर्ज किया था। इस बयान में उन्होंने सरकारी ठेकों में फायदा पहुंचाने वाले कई अफसरों के नाम लिए थे।
तत्कालीन ठेकों में गड़बड़ियों की होगी जांच
आरोपित दो आईएएस अफसरों योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा पर हुई कार्रवाई को देखते हुए इस मामले में राज्य सरकार गंभीर है। ऐसे में ईडी की जांच में सरकारी ठेकों में निकले भ्रष्टाचार की बिहार सरकार की एजेंसी से भी पुन: जांच कराई जा सकती है। इससे तत्कालीन ठेकों की मंजूरी देने से लेकर उसके भुगतान में बरती गयी अनियमितताओं का पता चल सकता है। साथ ही संबंधित पदाधिकारी और कर्मियों की जिम्मेदारी तय हो सकती है।
सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ईडी ने 27 मार्च 2025 को तारिणी दास और मुमुक्षु चौधरी के अलावा बुडको के तत्कालीन उप प्रोजेक्ट निदेशक, डीजीएम (प्रोजेक्ट), बीएमएसआईसीएल के डीजीएम और भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता यहां भी छापेमारी की थी। हालांकि, बाद में उनके विरुद्ध कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।
रिशु श्री की मुमुक्षु से 2012 से थी पहचान
बिप्रसे अधिकारी मुमुक्षु चौधरी ने ईडी के समक्ष अपने दर्ज बयान में कहा है कि तैनाती के दौरान वर्ष 2012 से ही उनकी रिशु श्री से पहचान हुई थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सीतामढ़ी में चार करोड़, सहरसा में पांच करोड़ और मधुबनी में 34 लाख रुपये का ठेका रिशु श्री को दिया था।
सीतामढ़ी के नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार पाने के लिए भी रिशु श्री ने वरीय अधिकारियों को 25 लाख रुपये दिये थे, जिसे बाद में स्वच्छता संबंधित योजनाओं से एडजस्ट किया गया। विभाग के एक तत्कालीन अधिकारी को रिशु श्री ‘भैया’ कह कर पुकारता था। वहीं, रिशु श्री ने एक बयान में कहा कि बीएमएसआईसीएल से जुड़े ठेके को हासिल करने के लिए संबंधित अधिकारियों को कैश पैकेट पहुंचाए गए थे।
सैर-सपाटे के चक्कर में फंसे अफसर
समाजसेवा का संकल्प लेकर सिविल सेवा में आने वाले अधिकारी सैर सपाटे के चक्कर में फंस गए। ईडी की जांच रिपोर्ट से स्पष्ट है कि रिशुश्री ने कई युवा अफसर समेत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को देश-विदेश का भ्रमण करा उनसे ठेकों में फायदा उठाया। निलंबित किए गए आईएएस अफसर योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा के अलावा 2013 बैच के एक अन्य अफसर का भी नाम रिशुश्री से लाभ पाने वालों में शामिल हो गया है।
रिशुश्री के बयान के मुताबिक बुडको के तत्कालीन एमडी योगेश कुमार सागर और उनके परिवार की यूरोप टूर के लिए मेसर्स लंबूजी टूर्स प्राइवेट लिमिटेड को करीब 20 से 25 लाख का भुगतान हुआ था। रिशु श्री के कहने पर उसके सहयोगी जितेंद्र कुमार उर्फ अरुण ने योगेश कुमार सागर को उनके निजी खर्च के लिए 4.25 लाख रुपये दिये।




साइन इन