Corrupt Mumukshu choudhary tarini das and umesh kumar were indebted by favors of Rishu shree where is ias Sanjeev hans रिशुश्री के अहसान तले दबे थे मुमुक्षु-तारिणी और उमेश, टेंडर के पैसे डकारे; संजीव हंस की अब भी तलाश, Bihar Hindi News - Hindustan
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रिशुश्री के अहसान तले दबे थे मुमुक्षु-तारिणी और उमेश, टेंडर के पैसे डकारे; संजीव हंस की अब भी तलाश

जांच-पड़ताल में पता चल है कि टेंडर घोटाले में गिरफ्तार मुमुक्षु, ताारिणी और उमेश कुमार सिंह का ठेकेदार रिशुश्री से गहरा गठजोड़ था और टेंडर देने के एवज में ये रिशुश्री के अहसानों के बोझ तले दबे थे। इन्होंने बड़े पैमाने पर अनियमितता कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया।

Thu, 11 June 2026 07:23 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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रिशुश्री के अहसान तले दबे थे मुमुक्षु-तारिणी और उमेश, टेंडर के पैसे डकारे; संजीव हंस की अब भी तलाश

बिहार के सबसे बड़े टेंडर घोटाले में SVU के शिकंजे में अब बड़े अधिकारी हैं। भ्रष्ट मुमुक्षु चौधरी, तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह के रिशुश्री से गहरे रिश्ते उजागर हो रहे हैं। इस पूरे मामले में एक चर्चित IAS अधिकारी संजीव हंस को जांच टीम अब भी तलाश रही है। बुधवार को संजीव हंस अपने शास्त्रीनगर स्थित आवास और पुराना सचिवालय स्थित राजस्व पर्षद कार्यालय में छापेमारी के दौरान फरार मिले। जांच-पड़ताल में पता चल है कि टेंडर घोटाले में बुधवार को गिरफ्तार तीनों अधिकारियों का ठेकेदार रिशुश्री से गहरा गठजोड़ था और टेंडर देने के एवज में ये रिशुश्री के अहसानों के बोझ तले दबे थे। इन्होंने बड़े पैमाने पर अनियमितता कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया। एसवीयू की जांच में पता चला है कि इन पदाधिकारियों ने रिशुश्री के साथ आपराधिक षड्यंत्र कर सरकारी टेंडर और उसकी गोपनीयता को अपने पक्ष में करते हुए सरकारी राशि का गबन किया।

कांड के अनुसंधान में पाया गया कि रिशुश्री ने जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग और बीएमएसआईसीएल आदि में अपनी कंपनियों के पक्ष में ठेके लेने को सरकारी अधिकारियों को रिश्वत दी। एसवीयू ने बताया कि सीतामढ़ी डीआरडीए के तत्कालीन निदेशक मुमुक्षु कुमार चौधरी को रिशु श्री ने सीतामढ़ी नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाया। इसके बाद मुमुक्षु चौधरी के सहयोग से शहरी विकास के परियोजना ठेके को मनमुताबिक कंपनी को मंजूरी दिलाई।

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मुमुक्षु चौधरी के सहरसा नगर आयुक्त रहने के दौरान भी उनको रिश्वत देकर रिशु श्री ने शहर विकास की परियोजनाएं अपने पक्ष में ली। एसवीयू के मुताबिक कांड के अनुसंधान में रिशुश्री ने अपने बयान में कहा कि वे भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता तारिणी दास को विपत्र पास कराने के लिए 3.5 फीसदी कमीशन दिया करते थे। कार्यपालक अभियंता उमेश सिंह पर नगर विकास एवं आवास विभाग और बुडको में पदस्थापन के दौरान ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन वर्क एवं अन्य ठेकों में एक फीसदी कमीशन लेने का आरोप है।

रिशु श्री को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी

एसवीयू ने ठेकेदार रिशु श्री को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी शुरू कर दी है। गुरुवार को कांड में अभियुक्तों की पेशी के दौरान रिमांड को लेकर अर्जी दी जा सकती है। रिशु श्री के बाद एक-एक कर अन्य अभियुक्तों से भी रिमांड पर लेकर पूछताछ होगी।

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प्राथमिकी के चार नामजद अभियुक्त में दो गिरफ्तार

एसवीयू के मुताबिक कांड संख्या 05/25 में चार नामजद अभियुक्त हैं। इनमें ठेकेदार रिशु श्री और उसके करीबी सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। शेष दो नामजद अभियुक्तों में आईएएस संजीव हंस और रिशु श्री की कंपनी मातृस्वा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पवन कुमार शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी को लेकर प्रयास हो रहे हैं। कांड में बिहार सरकार के कई अज्ञात सरकारी अधिकारियों व अन्य पर भी मामला दर्ज हुआ है।

कई अहम पदों पर मुमुक्षु चौधरी

मुमुक्षु कुमार चौधरी वर्ष 1999 में बिहार सरकार की सेवा में आए। इन्होंने ग्रामीण विकास, नगर विकास एवं आवास, सामान्य प्रशासन और वित्त विभाग में काम किया। साथ ही कई जिलों में वरीय उप समाहर्ता, प्रखंड विकास पदाधिकारी, डीआरडीए निदेशक, नगर आयुक्त और उप नगर आयुक्त के पदों पर भी रहे।

रिशुश्री से सुविधाएं लेकर मनमाना ठेका दिया

एसवीयू ने बताया कि संजीव हंस रिशुश्री मामले से जुड़े कांड संख्या 05/25 के प्राथमिकी अभियुक्त हैं। वहीं, गिरफ्तार अन्य तीन अधिकारियों पर रिशुश्री से सुविधाएं लेकर मन मुताबिक ठेके देने और उसके भ्रष्ट कार्यों को आगे बढ़ाने का आरोप है। ईडी में दर्ज मनी लांड्रिंग केस में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई प्रमाण मिले हैं। एसवीयू ने भी इन पर आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज कर रखा है, जिसकी जांच चल रही है।

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