Severe Heat Wave in Chhapra Impacts Agriculture and Daily Life खेती पर गर्मी की मार, मिट्टी सूखी, फसल बचाने में जुटे किसान, Chapra Hindi News - Hindustan
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खेती पर गर्मी की मार, मिट्टी सूखी, फसल बचाने में जुटे किसान

गर्मी पैकेज खेतों की ऊपरी सतह की नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिससे सब्जी और मक्का की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, तेज धूप व गर्म पछुआ हवा के कारण प्रतिदिन वाष्पीकरण...

Wed, 22 April 2026 09:29 PMNewswrap हिन्दुस्तान, छपरा
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खेती पर गर्मी की मार, मिट्टी सूखी, फसल बचाने में जुटे किसान

गर्मी पैकेज छपरा, हिन्दुस्तान संवाददाता। सारण जिले में लगातार 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने से खेती पर प्रतिकूल असर साफ दिखने लगा है। खेतों की ऊपरी सतह की नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिससे सब्जी और मक्का की फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, तेज धूप व गर्म पछुआ हवा के कारण प्रतिदिन वाष्पीकरण दर बढ़ गई है, जिससे सिंचाई का पानी जल्दी सूख जा रहा है। रिविलगंज प्रखंड के किसान रामबाबू सिंह ने बताया कि टमाटर व खीरा की फसल दोपहर में मुरझा जा रही है। एकमा के किसान जितेंद्र राय ने कहा कि मक्का में दाना भरने का समय है, लेकिन गर्मी से पौधे कमजोर पड़ रहे हैं।

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जिले के कई गांवों में किसान सुबह और शाम सिंचाई कर रहे हैं, ताकि पौधों पर तापीय तनाव कम पड़े। डीजल पंप से सिंचाई करने वाले किसानों की लागत भी बढ़ गई है। कृषि विभाग के जानकारों का कहना है कि मल्चिंग, हल्की सिंचाई और जैविक नमी संरक्षण उपाय अपनाने से कुछ राहत मिल सकती है। अगर अगले एक सप्ताह तक तापमान इसी स्तर पर रहा तो सब्जी उत्पादन घट सकता है। इससे बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी भी संभव है। खरीफ सीजन की तैयारी कर रहे किसानों के लिए भी यह मौसम चिंता का विषय बन गया है। गरीबों का हाल बेहाल, मजदूरी घटी, पानी और बिजली बनी परेशानी छपरा, हिन्दुस्तान संवाददाता।भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर गरीब और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है। सारण जिले में दिहाड़ी मजदूरों के लिए दोपहर में काम करना कठिन हो गया है। तापमान 43 डिग्री तक पहुंचने से खुले में काम करने वालों को लू और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ गया है। छपरा शहर के मजदूर राजेश मांझी ने बताया कि दोपहर के समय निर्माण कार्य बंद जैसा हो जाता है, जिससे कमाई घट रही है। गड़खा की महिला मजदूर फूलमती देवी ने कहा कि खेतों में काम करने जाना मुश्किल हो गया है। झोपड़ी, टीनशेड व कच्चे घरों में रहने वाले परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। दिन में घर तंदूर जैसा गर्म हो जाता है और रात में भी राहत नहीं मिलती। बिजली कटौती होने पर पंखे बंद हो जाते हैं, जिससे छोटे बच्चों और बुजुर्गों की हालत खराब हो जाती है। पानी की मांग बढ़ने से हैंडपंप और सरकारी नलों पर भीड़ लग रही है। फुटपाथ दुकानदारों की बिक्री भी कम हो गई है, क्योंकि दोपहर में लोग बाजार निकलने से बच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गरीब परिवारों में पोषण और स्वास्थ्य संसाधनों की कमी के कारण गर्मी का असर ज्यादा पड़ता है। प्रशासन से सार्वजनिक पेयजल और छांव की व्यवस्था की मांग उठने लगी है। गर्मी बनी चुनौती, स्वास्थ्य, यातायात व दिनचर्या पर गहरा असर छपरा, हिन्दुस्तान संवाददाता। सारण जिले में भीषण गर्मी अब केवल मौसम की समस्या नहीं, बल्कि जनजीवन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। लगातार 40 से 43 डिग्री तापमान और तेज गर्म हवाओं ने लोगों की दिनचर्या बदल दी है। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक सड़कों पर आवाजाही कम हो रही है। बाइक सवार, रिक्शा चालक और पैदल चलने वालों को गर्म हवा सीधे झुलसा रही है। छपरा सदर अस्पताल के आसपास भी गर्मी से बीमार पड़ने वालों की संख्या बढ़ने लगी है।डॉक्टर वीरेंद्र कुमार सिंह के अनुसार इस तापमान में शरीर से पसीने के रूप में तेजी से पानी और नमक निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन, चक्कर, सिरदर्द और हीट एक्सॉशन का खतरा बढ़ जाता है। मढ़ौरा निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि दोपहर में बाहर निकलते ही सिर भारी लगने लगता है। अमनौर की सुनीता देवी ने कहा कि बच्चे स्कूल से लौटते समय परेशान हो जाते हैं। बाजारों में ग्राहक कम हो रहे हैं, जिससे कारोबार प्रभावित है। स्कूलों में छुट्टी समय बदलने की मांग उठ रही है। प्रशासन के सामने पेयजल, स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक स्थलों पर राहत व्यवस्था की चुनौती बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मई-जून में तापमान और बढ़ा तो हालात अधिक कठिन हो सकते हैं। बदलते मौसम की मार से सारण में आम-लीची की फसल पर संकट तेज गर्मी, पछुआ हवा और बढ़ते कीट प्रकोप से बागवानों की बढ़ी चिंता छपरा, हिन्दुस्तान संवाददाता। सारण जिले में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने आम और लीची उत्पादक किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। अप्रैल माह में तापमान में लगातार वृद्धि, तेज धूप और शुष्क पछुआ हवा का असर अब जिले के बागों में साफ दिखाई देने लगा है। आम के पेड़ों पर लगे टिकोले सूखने लगे हैं, जबकि कई जगहों पर छोटे फल समय से पहले गिर रहे हैं। लीची के बागों में भी फल के आकार और गुणवत्ता पर असर पड़ने की शिकायत सामने आ रही है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम ऐसा ही रहा तो इस बार उत्पादन में भारी गिरावट हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय रहते बचाव और प्रबंधन के उपाय अपनाने की सलाह दी है। तापमान बढ़ने से फसलों पर सीधा असर पिछले एक सप्ताह से जिले में गर्मी लगातार तेज हुई है। अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने से दोपहर के समय लू जैसी स्थिति बन रही है। तेज पछुआ हवा के कारण बागों में नमी तेजी से खत्म हो रही है। इससे पेड़ों पर लगे टिकोले सूखने लगे हैं और कई जगहों पर फल गिरने लगे हैं। किसानों का कहना है कि सुबह और शाम के समय भी गर्म हवा चलने से पौधों को राहत नहीं मिल पा रही है। मौसम की यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है। आम-लीची उत्पादकों की बढ़ी चिंता आम के बागों में टिकोलों के झड़ने की समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है। जिन पेड़ों में फल लग चुके हैं, वहां भी टिकोले टिक नहीं पा रहे हैं। लीची उत्पादकों का कहना है कि फल का आकार सामान्य नहीं बढ़ रहा है और कई जगहों पर दाने सूखने लगे हैं। इससे बाजार में गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। किसान बताते हैं कि इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों ने दिए बचाव के उपाय कृषि विभाग और विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि बागों में नियमित सिंचाई कर मिट्टी में नमी बनाए रखें। 15 दिन के अंतराल पर 2 से 3 बार अनुशंसित दवा का छिड़काव करें, ताकि फल एवं शाखा बेधक कीट व फल मक्खी पर नियंत्रण पाया जा सके। सूखी टहनियों की छंटाई, बागों की नियमित निगरानी और समय पर उपचार से नुकसान कम किया जा सकता है। किसानों को मौसम पर नजर रखते हुए सतर्क रहने को कहा गया है। कोट बढ़ते तापमान और शुष्क हवा का असर आम व लीची की फसल पर पड़ रहा है। किसानों को नियमित सिंचाई, दवा छिड़काव और बागों की निगरानी करने की सलाह दी गई है। समय पर प्रबंधन करने से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सुधीर तिवारी जिला उद्यान पदाधिकारी, सारण (छपरा से प्रवीण कुमार) भीषण गर्मी के बीच छपरा सदर अस्पताल में एसी हीटवेव वार्ड तैयार, अब तक एक भी मरीज भर्ती नहीं जिले का टेंपरेचर 40 डिग्री सेल्सियस के बाद,हीटवेव का स्वास्थ्य पर असर फोटो 1 - छपरा सदर अस्पताल के जच्चा बच्चा अस्पताल के प्रथम तल पर बनाया गया हीटवेब एसी वार्ड छपरा, हमारे संवाददाता l जिले में लगातार बढ़ते तापमान और संभावित हीटवेव के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। सदर अस्पताल में 6 बेड का विशेष एसी युक्त हीटवेव वार्ड तैयार कर लिया गया है। छपरा सदर अस्पताल के जच्चा बच्चा वार्ड के बगल में प्रथम तल पर बनाए गए एसी वार्ड पूरी तरह से तैयार है और सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं। फिलहाल इस वार्ड में कोई मरीज भर्ती नहीं है। यह विशेष वार्ड मातृ-शिशु अस्पताल के प्रथम तल पर बनाया गया है, जहां हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के इलाज की समुचित व्यवस्था की गई है। जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम अरविंद कुमार ने बताया कि विभागीय निर्देशों के अनुसार वार्ड में ऑक्सीजन, ठंडा पानी रखने के लिए फ्रिज, जीवन रक्षक दवाएं और जरूरी चिकित्सा उपकरण पहले से ही उपलब्ध करा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी हीटवेव से प्रभावित मरीजों का इलाज इमरजेंसी वार्ड में ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने पर इस विशेष वार्ड को पूर्ण रूप से सक्रिय कर अलग से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की जाएगी। सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने जानकारी दी कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में हीटवेव से निपटने के लिए आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। उन्होंने बताया कि हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के इलाज में उपयोग होने वाली दवाएं पहले से ही स्टॉक में रखी गई हैं, ताकि आपात स्थिति में किसी प्रकार की कमी न हो। अस्पतालों में विशेष रूप से ओआरएस घोल, पैरासिटामोल, आईवी फ्लूइड सलाइन , ग्लूकोज व इलेक्ट्रोलाइट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। हीटवेव का स्वास्थ्य पर असर अत्यधिक गर्मी में शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिससे डिहाइड्रेशन, हीट क्रैम्प्स, हीट एक्सहॉशन और गंभीर स्थिति में हीट स्ट्रोक हो सकता है। हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान अधिक हो जाता है और बेहोशी, तेज बुखार, सूखी त्वचा जैसे लक्षण दिखते हैं। गर्मी का असर दिल, दिमाग और किडनी पर भी पड़ता है, जबकि त्वचा संबंधी समस्याएं जैसे घमौरियां और सनबर्न भी आम हैं। बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और धूप में काम करने वाले लोग अधिक जोखिम में रहते हैं। हीटवेव के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार , सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी या मतली, तेज धड़कन, त्वचा का सूखा और लाल होना तथा बेहोशी या भ्रम की स्थिति शामिल हैं। बचाव के उपायों में दोपहर 11 से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना, अधिक मात्रा में पानी या तरल पदार्थ लेना, हल्के और सूती कपड़े पहनना, धूप में निकलते समय छाता या टोपी का उपयोग करना और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना शामिल है। यदि किसी को हीट स्ट्रोक हो जाए, तो उसे तुरंत छांव या ठंडी जगह पर ले जाना चाहिए, शरीर को ठंडा करना चाहिए और यदि मरीज होश में हो तो उसे पानी या ओआरएस पिलाना चाहिए। साथ ही बिना देरी किए उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी है। कोट फोटो भी है अस्पताल प्रशासन 24 घंटे निगरानी कर रहा है और इमरजेंसी सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में वृद्धि होती है, तो इस वार्ड को तुरंत पूरी क्षमता के साथ चालू कर अतिरिक्त डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती की जाएगी। वार्ड में ऑक्सीजन, ठंडा पानी, जीवन रक्षक दवाएं और सभी जरूरी उपकरण व्यवस्थित रूप से उपलब्ध हैं। डॉ कृष्ण मोहन दुबे उपाधीक्षक सदर अस्पताल छपरा से शशि भूषण पांडे बिजली कटौती व तेज गर्म पछुआ हवा ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें मढ़ौरा। एक संवाददाता अप्रैल माह में ही भीषण गर्मी और तेज पछुआ हवाओं ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। दिन के समय तापमान करीब 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, वहीं लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गर्म पछुआ हवाओं ने हालात को और भी कठिन बना दिया है। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या बार-बार और घंटों तक होने वाली बिजली कटौती बनकर उभरी है, जिसने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। दोपहर के समय जहां सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है, वहीं घरों के अंदर भी बिना बिजली के लोग गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। गर्मी के इस बढ़ते प्रकोप के बीच बिजली की अनियमित आपूर्ति ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। पंखे और कूलर बंद होने से लोग राहत नहीं महसूस नही कर पा रहे हैं। रात के समय भी लंबे समय तक बिजली गुल रहने से लोगों की नींद हराम हो रही है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टदायक बन गई है। बाजारों में भीड़ कम हो गई है, वहीं मजदूरी करने वाले और रिक्शा चालकों जैसे कामगारों की परेशानी दोगुनी हो गई है। गांवों और कस्बों में हालात और भी खराब हैं। कई इलाकों में लगातार घंटों तक बिजली नहीं रहने से पानी की आपूर्ति भी बाधित हो रही है, जिससे लोगों को पीने के पानी तक के लिए जूझना पड़ रहा है। किसान भी इस असमय गर्मी और बिजली संकट को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि सिंचाई प्रभावित हो रही है और फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अभी अप्रैल की शुरुआत में ही गर्मी और बिजली संकट का यह हाल है, तो मई और जून में हालात और भयावह होने की आशंका जताई जा रही है। लोग प्रशासन से नियमित बिजली आपूर्ति और राहत के ठोस इंतजाम की मांग कर रहे हैं, ताकि इस भीषण गर्मी में कुछ राहत मिल सके।

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