मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के लिए चुनौती बन रही गर्मी
बिहार में हीटवेव और डिहाइड्रेशन के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ रहा है। तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी से हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियों में वृद्धि हो रही है।

हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन की शिकायत पर मरीज का इलाज कराने पर बढ़ जा रहा खर्च जल संकट, बिजली आपूर्ति में फाल्ट आने, सांस, सुगर के मरीज की परेशानी बढ़ने लगी है (पटना का टास्क) भभुआ, कार्यालय संवाददाता। कैमूर में बुधवार को अधिकतम 42 और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री दर्ज किया गया। हवा की रफ्तार भी 25 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से बह रही है। तीखी धूप से कमरों की दीवार और फर्श गर्म हो जा रहे हैं। भीषण गर्मी और हीटवेव वर्तमान में मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। यह केवल तापमान में वृद्धि ही नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रही है।
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विनोद कुमार सिंह कहते हैं कि तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने पर हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। बच्चों, बुजुर्गों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं पर इसका सबसे बुरा असर पड़ रहा है। अत्यधिक गर्मी से हृदय रोग, श्वसन संबंधी रोग और गुर्दे की बीमारियां बढ़ रही हैं। गर्मी से बेचैनी, नींद न आना, चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं। बुधवार को दिन के 11 बजे ही तापमान 40 डिग्री पहुंच गया था। दोपहर में 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलना खतरनाक हो गया है, जिससे कामकाज और शारीरिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। बाहर का खाना खाने से पेट खराब होने का खतरा बढ़ जाता है और पेट की बीमारियां हो रही हैं। सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेष डॉ. त्रिभुवन नारायण बताते हैं कि उच्च तापमान के कारण समय से पहले जन्म और भ्रूण के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की चिंताएं बढ़ गई हैं। एसएनसीयू में रोजाना 10-15 शिशु को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। बुनियादी ढांचे और संसाधनों पर दबाव गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ गई है, जिससे बिजली की आपूर्ति और वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि उपभोक्ताओं को पर्याप्त बिजली आपूर्ति की जा रही है, पर गर्मी से फाल्ट मारने, डीपी बॉक्स के जलने और ट्रांसफार्मर के गर्म होने की समस्याएं बढ़ रही हैं। तापमान बढ़ने के साथ पानी की खपत बढ़ती है, जिससे फसल की सिंचाई और पेयजल संकट पैदा हो रहा है। मार्च-अप्रैल में ही भीषण गर्मी के कारण सब्जी की उत्पादकता प्रभावित हुई है। गर्मी से बचाव के उपाय पर्याप्त पानी, नींबू पानी, छाछ और लस्सी पीते रहें। दोपहर 11 से 4 बजे के बीच बाहर न निकलें। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और सिर ढंककर रखें। हल्का और घर का पका खाना खाएं, मसालेदार भोजन से बचें। गर्म कार में न बैठें। यदि गर्मी से तबीयत खराब होने के लक्षण महसूस हो तो तुरंत अस्पताल जाएं। विशेषज्ञों की प्रमुख सलाह प्यास न लगने पर भी पर्याप्त पानी पीते रहें। नींबू पानी, छाछ, और नारियल पानी का सेवन करें। हल्का और सुपाच्य भोजन करें। मौसमी फल तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा, हरी सब्जियां खाएं। धूप से आने के बाद तुरंत पानी न पीएं। कुछ देर रुककर पसीना सूखने दें, फिर सामान्य तापमान पर बैठकर पानी पीएं। लू लगने पर बहुत अधिक पसीना आना, सिरदर्द, चक्कर आना, जी मिचलाना और मांसपेशियों में ऐंठन हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित लोगों पर गर्मी का असर जल्दी होता है। (भभुआ से संजय क्रांति) फोटो- 22 अप्रैल भभुआ- 2 कैप्शन- सदर अस्पताल के ओपीडी में बुधवार को स्वास्थ्य जांच कराने के लिए लगी मरीजों की भीड़।
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