भाजपा और जदयू की 2-2 सीट पक्की, उपेंद्र कुशवाहा के लिए तीन वोट कहां से लाएगा एनडीए?
राज्यसभा चुनाव 2026 में बिहार की 5 में से 4 सीटों पर एनडीए की जीत तय मानी जा रही है। इनमें दो भाजपा और दो जदयू की सीटें शामिल हैं। हालांकि, पांचवीं सीट जिस पर रालोमो चीफ उपेंद्र कुशवाहा उतर रहे हैं, उस पर 3 अतिरिक्त वोट एनडीए कहां से लाएगा, इस पर सस्पेंस बना हुआ है।

बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्ताधारी गठबंधन में स्थिति लगभग साफ हो गई है। एनडीए के अंदर 5 में से 2-2 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रत्याशी उतरेंगे। जबकि एक सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) चीफ उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा कैंडिडेट बनाया गया है। भाजपा ने अपने कोटे के दोनों उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं, जिनमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रदेश महामंत्री शिवेश कुमार राम शामिल हैं। वहीं, जेडीयू से दो उम्मीदवारों की घोषणा अभी बाकी है।
जेडीयू से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जा सकता है। निशांत अभी सक्रिय राजनीति से दूर रहते आए हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि होली पर राज्यसभा के रास्ते से उनके पॉलिटिकल डेब्यू की पार्टी के अंदर पूरी पटकथा लिख दी गई है। हालांकि, औपचारिक ऐलान अभी बाकी है। उन्हें उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की जगह राज्यसभा भेजा जाएगा। जबकि जेडीयू कोटे की दूसरी सीट पर केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को कैंडिडेट बनाया जाना तय माना जा रहा है। वे संसद के उच्च सदन में तीसरी बार पहुंचेंगे।
एनडीए की 4 सीट पर जीत पक्की, लेकिन पांचवीं पर फंसा पेंच
बिहार की 5 राज्यसभा सीटों पर इस महीने चुनाव हो रहा है। इनमें से 4 पर एनडीए की जीत पक्की मानी जा रही है। क्योंकि एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए और एनडीए के पास बिहार में 202 विधायक हैं। इनमें भाजपा के 89, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम के पांच और रालोमो के 4 एमएलए शामिल हैं।
हालांकि, पांचवीं सीट जीतने के लिए एनडीए को 3 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए होगा। एनडीए के नेता अपने सभी पांच उम्मीदवारों की जीत के दावे कर रहे हैं। अगर विपक्ष की ओर से कोई कैंडिडेट नहीं उतारा जाता है तो एनडीए के सभी पांच उम्मीदवार निर्विरोध जीत जाएंगे। लेकिन, विपक्ष कैंडिडेट देता है तो 3 अतिरिक्त वोट कहां से आएंगे, इस पर संशय बना हुआ है।
बिहार विधानसभा में नंबर गेम पर नजर डालें तो भाजपा और जदयू के विधायक अपने-अपने कोटे की दो-दो सीटें तो आसानी से जीता देंगे। मगर पांचवीं सीट जो उपेंद्र कुशवाहा की है, उस पर विपक्ष के खेमे में सेंध लगानी होगी।
दरअसल, विपक्ष की ओर से भी लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने कैंडिडेट उतारने का ऐलान कर दिया है। आरजेडी उम्मीदवार का नाम 5 मार्च को सामने आ जाएगा। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
विपक्षी दलों के महागठबंधन के पास भी एक सीट जीतने के पर्याप्त नंबर नहीं हैं। आरजेडी, कांग्रेस, आईआईपी और वाम दलों को मिलाकर कुल 35 विधायक ही हैं। ऐसे में आरजेडी उम्मीदवार उतारती है तो उसको जीतने के लिए असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के 5 और मायावती की बसपा के एक विधायक का समर्थन हासिल करना होगा। साथ ही महागठबंधन में क्रॉस वोटिंग को रोकना भी लालू-तेजस्वी के सामने बड़ी चुनौती होगी।




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