हरिवंश बाय-बाय, रामनाथ तीसरी बार! राज्यसभा के उपसभापति पर नीतीश को क्यों नहीं एतबार?
Rajya Sabha Elections JDU: जेडीयू के अपने कोटे की 2 सीटों से केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को राज्यसभा भेजने की चर्चा है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा उपसभापति हरिवंश को तीसरा टर्म नहीं मिलेगा।

बिहार से राज्यसभा के 5 सांसद, जिनका कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है, उसमें सिर्फ 2 ही वापस संसद लौट पाएंगे। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रेमचंद गुप्ता और एडी सिंह, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के हरिवंश नारायण सिंह में किसी के फिर से राज्यसभा पहुंचने के आसार ना के बराबर हैं। जो 2 सांसद फिर वापसी करेंगे, उनमें जेडीयू के केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा हैं। एक के नाम का ऐलान हो गया है, दूसरे का इंतजार चल रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर को जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार पार्टी की सामान्य परंपरा तोड़ते हुए तीसरी बार भेजने जा रहे हैं, ऐसा पार्टी के सूत्रों ने मीडिया से कहा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कुशवाहा को राज्यसभा का 5वां कैंडिडेट बना दिया है, जिनको जीतने के लिए चिराग पासवान और जीतनराम मांझी के विधायकों के समर्थन की भी जरूरत होगी। तेजस्वी यादव ने राजद से कैंडिडेट देने का ऐलान किया है, इसलिए मतदान तय है। तोड़-फोड़ और क्रॉस वोटिंग भी तय है। इस तरह के चुनाव में क्रॉस वोटिंग का फायदा विपक्ष को मिलने के उदाहरण बहुत कम हैं, सत्ता पक्ष को स्वाभाविक फायदा मिलता रहा है।
243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में जेडीयू के 85 विधायक हैं और 5 सीट के चुनाव के हिसाब से एक कैंडिडेट को जीतने के लिए 41 वोट चाहिए। जेडीयू आराम से अपने 2 कैंडिडेट राज्यसभा भेज सकती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नीतीश की तरफ से रामनाथ ठाकुर को रिपीट किया जाएगा। दूसरी सीट पर जेडीयू नेता नीतीश के बेटे निशांत कुमार को राज्यसभा भेजने की जबर्दस्त पैरवी कर रहे हैं। निशांत के पार्टी और राजनीति में उतरने की चर्चा का यह तीसरा मौका है और संभावनाओं के द्वार खुले हैं। लोकसभा और विधानसभा के दौरान भी निशांत के मैदान में आने की चर्चा हुई थी।
इस पूरे प्रकरण में खास यह है कि निशांत को राज्यसभा भेजने के लिए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का पत्ता कटेगा। वो लगातार दूसरी बार सांसद बने थे। किंग महेंद्र नाम से मशहूर उद्योगपति और दवा कारोबारी महेंद्र प्रसाद के अलावा किसी को नीतीश की जेडीयू में तीसरी बार राज्यसभा में जाने का मौका नहीं मिला है। आरसीपी सिंह और वशिष्ठ नारायण सिंह को भी नहीं। अपवाद में किंग महेंद्र के साथ रामनाथ गिने जाएंगे और हरिवंश परंपरा की नजीर बनेंगे। एक पत्रकार से प्रधानमंत्री का मीडिया सलाहकार, फिर पत्रकार और फिर राजनेता बनने के बाद यह तीसरा मौका होगा, जब हरिवंश के सामने आगे क्या जैसा सवाल पैदा होगा।
हरिवंश का पत्ता कटने के पीछे किसी को तीसरी बार उच्च सदन नहीं भेजने की जदयू की परंपरा ही नहीं है। संजय गांधी और रामवचन राय जैसे अपवाद विधान परिषद में भी हैं। लेकिन जिन्हें रांची से उठाकर नीतीश ने बिहार के रास्ते दिल्ली पहुंचा दिया, उनको ड्रॉप करने की वजह राजनीतिक है। 2022 में जब नीतीश ने एनडीए को छोड़कर महागठबंधन का साथ लिया, तब हरिवंश ने जेडीयू की तरफ से इस्तीफा देने के इशारों को दरकिनार कर दिया। राज्यसभा उपसभापति के संवैधानिक पद की मर्यादा का हवाला देकर हरिवंश पद पर बने रहे। पार्टी को यह बात नागवार गुजरी और मुखिया के मन में तकलीफ बनकर बैठ गई। हरिवंश तब से जेडीयू से दूर-दूर दिख रहे थे। महागठबंधन के दिनों में जेडीयू के नेता उन्हें भाजपा के प्रभाव में मानने लगे, जिस तरह के आरोप आरसीपी सिंह पर भी लगे थे।
नीतीश की तवा पलटते रहने वाली राजनीति का पहिया ऐसा घूमा कि 2024 में वो वापस एनडीए के साथ आ गए। लेकिन, महागठबंधन सरकार के दौरान हरिवंश से जो दूरी बनी, वह बनी रह गई। यही कारण है कि पार्टी थर्ड टर्म वाला नियम हरिवंश पर लागू करने के मूड में है और निशांत का संसदीय राज्याभिषेक करने के लिए व्याकुल है। अति पिछड़ी जाति (ईबीसी) से आने वाले रामनाथ ठाकुर को तीसरी बार भेजने के लिए पार्टी तैयार दिख रही है, क्योंकि ईबीसी जातियां नीतीश कुमार और जदयू की राजनीति में कोर वोटर माने जाते हैं। जननायक कर्पूरी ठाकुर ईबीसी से निकले सबसे बड़े नेता हैं और उन ‘गुदड़ी के लाल’ का बेटा होने का फायदा रामनाथ को मिलता रहा है।
बीजेपी की तरफ से 3 कैंडिडेट की लिस्ट घोषित हो चुकी है। एक-एक ओबीसी, सवर्ण और दलित। जेडीयू की लिस्ट का इंतजार है। नीतीश चौंकाते रहते हैं। जेपी के नाम से प्रसिद्ध संपूर्ण क्रांति के नेता जयप्रकाश नारायण की जन्मस्थली सिताब दियारा (बलिया, यूपी) के रहने वाले हरिवंश नारायण सिंह को लेकर नीतीश आखिरी समय पर चौंका भी सकते हैं। निशांत के राजनीति में आने की बात करने वाले जेडीयू के नेताओं को नीतीश लंबे समय से चुप कराते रहे हैं।




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