बस स्टैंड में पेयजल व्यवस्था नदारद, राहगीर बोतल खरीद बुझा रहे प्यास
बिहारशरीफ के रामचंद्रपुर और सरकारी बस स्टैंड में गर्मी के कारण पेयजल की व्यवस्था नहीं है। यात्रियों को बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है। दोनों जगहों पर लगे वाटर फिल्टर पिछले दो महीनों से खराब हैं, जिससे यात्रियों को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने जल्द सुधार का आश्वासन दिया है।

हिन्दुस्तान पड़ताल : बस स्टैंड में पेयजल व्यवस्था नदारद, राहगीर बोतल खरीद बुझा रहे प्यास रामचंद्रपुर व सरकारी बस स्टैंड में लगा वाटर फिल्टर भी 2 माह से खराब रोजाना 40 से अधिक जगहों के लिए खुलती हैं 400 से अधिक बसें सुबह 3 बजे से रात 10 बजे तक यात्रियों का रहता है आना-जाना यात्री शेड रहने से थोड़ी राहत, लगे हैं 17 पंखे फोटो : बस स्टैंड : रामचंद्रपुर बस स्टैंड में गुरुवार को भीषण गर्मी से बचाव के लिए नल के पानी से हाथ धोते यात्री व खराब पड़ा वाटर फिल्टर। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। जिले में इन दिनों प्रचंड गर्मी का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।
भीषण गर्मी में शहर के राचमंद्रपुर व सरकारी बस स्टैंड में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह से नदारद है। लोग बोतल खरीद प्यास बुझा रहे हैं। हद तो यह कि इन दोनों जगहों पर लगे दोनों वाटर फिल्टर भी दो माह से अधिक समय से खराब पड़े हैं। जबकि, यहां से रोजाना 40 से अधिक जगहों के लिए 400 से अधिक बसें खुलती हैं। सुबह तीन बजे से रात 10 बजे तक यहां हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है। हालांकि, यात्री शेड रहने से थोड़ी राहत है। वहां नगर निगम प्रशासन ने यात्रियों के लिए 17 पंखे लगाए हैं। इससे यात्रियों को वहां ठहरकर बसों का इंतजार करने में सहूलियत हो रही है। लेकिन, उनके बैठने के लिए बेंच या कुर्सियों का इंतजाम ही नहीं है। इन दोनों व्यस्त बस स्टैंडों पर यात्रियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए मजबूरन बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च परेशानी का कारण बन रहा है। गर्मी के इस मौसम में जहां हर सार्वजनिक स्थल पर पेयजल की व्यवस्था होना अनिवार्य है, वहीं इन बस स्टैंडों पर इस बुनियादी सुविधा का अभाव कई सवाल खड़े करता है। नहीं है कोई देखनहार : इन दोनों बस स्टैंडों पर पहले यात्रियों की सुविधा के लिए बैंक और इनरव्हील क्लब के सहयोग से वाटर फिल्टर लगाए गए थे। ताकि, यात्रियों को स्वच्छ और ठंडा पानी मुफ्त में मिल सके। लेकिन, विडंबना यह कि इसका कोई देखनहार नहीं है। मशीन की मरम्मत के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गयी है। इस कारण यह सफेद हाथी बना हुआ है। नतीजतन, यात्रियों को इस सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है। खुलती हैं सैकड़ों बसें : रामचंद्रपुर बस स्टैंड जिला का सबसे व्यस्त बस पड़ाव है। यहां से रोजाना पटना, रांची, कोलकाता, गया, बेगूसराय, शेखपुरा, बरबीघा, नवादा, कोडरमा, हजारीबाग, धनबाद, चक्रधरपुर, जुमई, बोकारो, हिलसा, राजगीर जैसे प्रमुख शहरों के लिए 400 से अधिक बसें खुलती हैं। बस संचालक सनोज कुमार ने बताया कि रोजाना लगभग 30 से 32 हजार यात्रियों का यहां से आना-जाना होता है। गत दो साल में निश्चित तौर पर यहां की व्यवस्था में सुधार हुआ है। लेकिन, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं बहाल नहीं होना सबसे चिंता की बात है। मंदिर परिसर में लगा चापाकल भी खराब : बस स्टैंड में बने मंदिर परिसर में एक चापाकल लगा हुआ है। लेकिन, वह भी एक सप्ताह से खराब है। स्थानीय लोगों व भक्तों ने बताया कि यह चापाकल भी अक्सर खराब रहता है। कम से कम चापाकल रहने से लोग पानी भरकर अपनी प्यास बुझा लेते। इसके लिए ठोस पहल होनी चाहिए। वाटर स्टैंड पोस्ट बनाकर या गर्मी के दिनों में प्याऊ लगाकर इसकी व्यवस्था की जानी चाहिए। ताकि, यात्रियों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़े। हर किसी के लिए बोतल खरीदकर पानी पीना संभव नहीं है। शौचालय के पास परिसर में फैली है गंदगी : यात्रियों के लिए परिसर में सार्वजनिक शौचाल बना हुआ है। महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग अलग 10-10 शौचालय तो 4-4 स्नानागार बने हुए हैं। इससे यात्रियों के साथ ही बस पड़ाव में काम करने वाले लोगों को काफी सुविधा मिल रही है। लेकिन, शौचालय से सटे बस पड़ाव परिसर में नाले का गंदा पानी महीनों से जमा है। वहां काई लग चुका है। इस कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बनी हुई है। गंदे पानी की निकासी के साथ ही नालों की सफाई की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। इतनी भीड़भाड़ के बावजूद पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव और परिसर में फैली गंदगी प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है। यात्रियों का कहना है कि जब सरकार स्मार्ट सिटी का दावा करती है, तो इस तरह की बुनियादी सुविधाओं का अभाव बेहद चिंताजनक है। खासकर गर्मी के मौसम में पानी की व्यवस्था नहीं होना यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है। कई यात्रियों ने बताया कि छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। इस संबंध में नगर प्रबंधक ने कहा कि परिसर की साफ सफाई के लिए सफाईकर्मियों को आदेश दिया गया है। जल्द ही शहर में प्याऊ की व्यवस्था की जाएगी। इसकी व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए दोनों बस स्टैंड समेत 11 जगहों को चिह्नित किया गया है। हम लोगों के साथ ही यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने का प्रयास कर रहे हैं। यात्रियों की परेशानी उनकी जुबानी : बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थान पर पानी की व्यवस्था नहीं होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। खासकर गर्मी के इस मौसम में बिना पानी के कुछ देर भी रुकना मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में उन्हें हर बार पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है, जिससे अनावश्यक खर्च बढ़ जाता है। सुबोध कुमार पहले यहां वाटर फिल्टर लगा हुआ था, जिससे काफी सुविधा होती थी। लेकिन पिछले दो महीनों से वह खराब पड़ा है और किसी ने उसकी सुध नहीं ली। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इसे जल्द से जल्द ठीक कराया जाए। राहुल रंजन वे रोजाना सरकारी बस स्टैंड से बिहारशरीफ से पटना यात्रा करते हैं और हर दिन पानी की समस्या का सामना करना पड़ता है। यह समस्या नई नहीं है, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं किया गया है। स्मार्ट सिटी शहर में बस स्टैंड जैसे व्यस्त परिसर में पानी की व्यवस्था नहीं यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। मुकेश कुमार सरकार स्मार्ट सिटी की बात करती है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए पानी की व्यवस्था प्राथमिकता होनी चाहिए। शौचालयों के साथ ही परिसर की पूरी साफ सफाई होनी चाहिए। नीतीश यादव गरीब यात्रियों के लिए हर बार बोतल खरीदना आसान नहीं होता। कई लोग प्यासे ही सफर करने को मजबूर हो जाते हैं। रामचंद्रपुर बस पड़ाव में व्यवस्था बहुत सुधारी है। लेकिन, परिसर में गंदा पानी जमाव बीमारियों को आमंत्रण दे रहा है। इसकी नियमित सफाई के साथ जलनिकासी की व्यवस्था होनी चाहिए। टुन्ना गोप अब तो गांवों में पानी की बहुत अच्छी व्यस्था है। बिहारशरीफ जैसे शहर में पेयजल संकट समझ में नहीं आता है। बस पड़ाव में लगे वाटर फिल्टर को जल्द से जल्द ठीक कराया जाना चाहिए। तब तक अस्थायी रूप से टैंकर या प्याऊ की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके। संजीव कुमार (बिहारशरीफ से कुमार कौशलेंद्र)
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