बस स्टैंड परिसर में पानी, ठंडी हवा, साफ-सफाई की कमी, गर्मी में यात्री बेहाल
छपरा बस पड़ाव पर यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव है। गर्मी में पंखे बंद हैं, पानी की व्यवस्था न के बराबर है और साफ-सफाई की स्थिति भी खराब है। यात्रियों को खुले शेड के नीचे बैठकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन को तुरंत सुधार के लिए कदम उठाने की जरूरत है।

छपरा बस पड़ाव में यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव पंखे लगे तो हैं, लेकिन सभी बंद पड़े हैं। कई पंखों पर धूल और गंदगी की मोटी परत फोटो- 8 छपरा बस स्टैंड परिसर में जमा गंदे पानी के बीच खड़ी बसें, पास ही यात्री बैठने को मजबूर। 9 - छपरा बस स्टैंड के खुले यात्री शेड में बिना चल रहे पंखों की गर्मी झेलते यात्री व चारों ओर गंदगी के बीच बैठकर बस का इंतजार करते लोग पेज चार की लीड छपरा, हिन्दुस्तान संवाददाता। भीषण गर्मी के बीच छपरा बस पड़ाव में यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव देखने को मिला।
तापमान बढ़ने और लू जैसे हालात बनने के बावजूद बस स्टैंड परिसर में पीने के पानी, ठंडी हवा, साफ-सफाई और आरामदायक प्रतीक्षालय जैसी जरूरी व्यवस्थाएं नदारद हैं। यात्रियों को खुले शेड के नीचे बैठकर बस का इंतजार करना पड़ रहा है, जहां पंखे लगे तो हैं, लेकिन सभी बंद पड़े हैं। कई पंखों पर धूल और गंदगी की मोटी परत जमी मिली। बस पड़ाव में यात्रियों के बैठने के नाम पर सिर्फ एक शेड बना है, वह भी चारों तरफ से खुला है। दोपहर में तेज धूप और गर्म हवा के कारण वहां बैठना मुश्किल हो जाता है। गर्म हवाओं के साथ उड़ती धूल सीधे यात्रियों तक पहुंचती है, जिससे लोग वहां टिक नहीं पाते। कई यात्री सीट छोड़कर छांव की तलाश में इधर-उधर भटकते दिखे।बस स्टैंड परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब मिली। जहां बसें खड़ी होती हैं और यात्री बैठते हैं, वहां चारों तरफ कचरा फैला था। जगह-जगह प्लास्टिक, गुटखा पाउच, खाने-पीने की बची सामग्री और गंदा पानी जमा दिखा। यात्रियों ने बताया कि बैठने से पहले उन्हें खुद ही जगह साफ करनी पड़ती है। पीने के पानी की सरकारी व्यवस्था लगभग नहीं के बराबर है। परिसर में एक चापाकल लगा है, जो फिलहाल चालू है, लेकिन गर्मी के मौसम में इतने बड़े बस पड़ाव के लिए यह पर्याप्त नहीं माना जा सकता। ठंडे पानी, वाटर कूलर या आरओ जैसी कोई सुविधा नजर नहीं आई। अधिकांश यात्रियों को मजबूरी में बाहर की दुकानों से पानी खरीदना पड़ता है। कुछ दुकानों पर ब्रांडेड बोतलें मिलीं, जबकि कुछ जगह संदिग्ध गुणवत्ता वाली बोतलें भी बिकती दिखीं।शौचालय की व्यवस्था तो है, लेकिन वहां भी यात्रियों से शुल्क लिया जाता है। यात्रियों का कहना है कि जब बस पड़ाव सरकारी है तो कम से कम मूलभूत सुविधाएं नि:शुल्क और साफ-सुथरी होनी चाहिए। शौचालय के आसपास भी गंदगी और दुर्गंध महसूस की गई।यात्रियों ने कहा कि गर्मी के मौसम में प्रशासन को विशेष व्यवस्था करनी चाहिए। बस पड़ाव पर अस्थायी पानी केंद्र, चालू पंखे, नियमित सफाई, छायादार प्रतीक्षालय और साफ शौचालय जैसी सुविधाएं तत्काल बहाल की जानी चाहिए, ताकि रोजाना हजारों यात्रियों को राहत मिल सके। यात्रियों की जुबानी फोटो नाम से बस पड़ाव में सबसे बड़ी परेशानी पीने के पानी की है। एक चापाकल है, लेकिन भीड़ होने पर लाइन लग जाती है। पंखे लगे हैं, पर चलते नहीं हैं। इतनी गर्मी में यात्रियों को राहत देने की कोई व्यवस्था नहीं है। बाहर से पानी खरीदना पड़ता है। अगर समय पर बस नहीं मिले तो यहां बैठना भी मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को गर्मी में विशेष इंतजाम करना चाहिए। सुनील कुमार पांडे महिलाओं और बच्चों के साथ यात्रा करना यहां काफी कठिन है। बैठने की जगह गंदी रहती है, पहले साफ करना पड़ता है तब बैठते हैं। शौचालय के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं। गर्मी में पानी और छांव की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, लेकिन यहां कोई व्यवस्था नहीं दिखती। बस का इंतजार करते-करते हालत खराब हो जाती है। महिलाओं के लिए अलग सुविधा होनी चाहिए। शीला देवी यात्री दोपहर में जब गर्म हवा चलती है तो बस पड़ाव में रुकना मुश्किल हो जाता है। शेड खुला है, धूल सीधे अंदर आती है। कई लोग बाहर जाकर खड़े हो जाते हैं। सफाई नहीं होने से बदबू भी रहती है। बस स्टैंड शहर का प्रमुख स्थान है, लेकिन हालत गांव के पुराने पड़ाव जैसी है। नियमित सफाई और पंखा चलाना जरूरी है। योगेंद्र महतो यात्री बस पड़ाव में दुकानों पर पानी की बोतल मिलती है, लेकिन हर जगह भरोसेमंद सामान नहीं दिखता। कुछ दुकानों पर अलग नाम से बोतल रखी गई थी। सरकारी स्तर पर ठंडे पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। यात्रियों से हर सुविधा के नाम पर पैसा लिया जाता है, लेकिन बदले में सुविधा नहीं मिलती। यहां व्यवस्था सुधारने की जरूरत है। असलम अंसारी यात्री रोजाना हजारों लोग यहां से यात्रा करते हैं, लेकिन यात्रियों की परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है। बैठने की जगह कम है, गंदगी ज्यादा है और पंखे बंद पड़े हैं। गर्मी में छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। बस पड़ाव में अगर साफ-सफाई और पानी की सुविधा हो जाए तो यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। मुकेश कुमार यात्री मढ़ौरा में यात्रियों की परेशानी, स्टैंड में न शौचालय न पानी मढ़ौरा, एक संवाददाता। मढ़ौरा में यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। यहां न तो बैठने की समुचित व्यवस्था है, न ही पीने के पानी और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके कारण विभिन्न स्थानों के लिए आने-जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मढ़ौरा से कोलकाता, रांची, टाटा, सिलीगुड़ी, दिल्ली और पटना जैसे दूरदराज के शहरों के लिए बसों का संचालन होता है। इसके अलावा छपरा, मुजफ्फरपुर, अमनौर, तरैया, पानापुर और मशरक जैसे आसपास के इलाकों के लिए भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री वाहन चलते हैं। बावजूद इसके, नगर में आधिकारिक बस या टैक्सी स्टैंड का अभाव है। धेनुकी चौक और मढ़ौरा बाजार में अनौपचारिक रूप से बस व टैक्सी स्टैंड संचालित होते हैं, लेकिन यहां यात्रियों के लिए किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। भीषण गर्मी में यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है या फिर दुकानों में बैठने के लिए दुकानदारों की अनुमति पर निर्भर रहना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी तब होती है जब महिला यात्रियों को शौचालय की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में उन्हें आसपास के घरों में जाकर शौचालय उपयोग की अनुमति मांगनी पड़ती है। कई बार अनुमति नहीं मिलने पर उन्हें भटकना पड़ता है या मजबूरी में खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, जिससे उन्हें शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। धेनुकी चौक से सिलीगुड़ी जाने वाले असगर अली और संतोष कुमार और रांची जाने वाले मंजय भारती और शंकर पांडे ने बताया कि यहां यात्रियों के लिए बैठने, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था अत्यंत जरूरी है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से जल्द से जल्द इन मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए मढ़ौरा में एक सुव्यवस्थित बस स्टैंड का निर्माण करना अब समय की मांग बन चुका है। बस पड़ाव पर पेयजल व शौचालय का अभाव, यात्रियों को भारी परेशानी फोटो- 14 - लहलादपुर के जनता बाजार स्थित बस पड़ाव और यात्री शेड बदहाल लहलादपुर, एक संवाददाता। प्रखंड के जनता बाजार स्थित बस पड़ाव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। यहां न तो पेयजल की समुचित व्यवस्था है और न ही शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। दूर-दराज से आने-जाने वाले यात्रियों को मजबूरी में इधर-उधर भटकना पड़ता है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। बस पड़ाव परिसर और उसके आसपास साफ-सफाई की स्थिति भी काफी खराब है। जगह-जगह कचरे का अंबार लगा रहता है, जिससे हमेशा दुर्गंध फैलती रहती है। इससे न केवल यात्रियों को असुविधा होती है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जनता बाजार निवासी पप्पु कुशवाहा ने बताया कि नियमित सफाई नहीं होने से यात्रियों को काफी परेशानी होती है। वहीं दयालपुर के भोला यादव ने कहा कि शौचालय की सुविधा नहीं होने से खासकर महिला यात्रियों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शिवटोला के मनीष कुमार ने बताया कि बस पड़ाव पर पेयजल की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके। बस पड़ाव के निकट ब्रांडेड कम्पनियो के नाम पर नकली बोतल बंद पानी धड़ल्ले से बिकती है। परसा में यात्री बस पड़ाव के समीप एक वाटर एटीएम पांच दिनों से खराब परसा, एक संवाददाता। नगर पंचायत परसा बाजार क्षेत्र स्थित बस पड़ाव पर यात्रियों के सुविधा के लिए लगायी गयी दो वाटर एटीएम में एक चार-पांच दिनों से खराब हैं जबकि दूसरा चालू है। मालूम हो कि परसा बाजार के दारोगा राय चौक के समीप बस स्टैंड व हाई स्कूल चौक के पास नगर पंचायत के सौजन्य से यात्री बस पड़ाव बनाए गए हैं। दोनों बस पड़ाव के समीप बनाए गए यात्री शेड के समीप में वाटर एटीएम पॉइंट भी लगाए गए हैं जिसमें दारोगा राय चौक स्थित वाटर एटीएम करीब चार-पांच दिनों से खराब पड़ा है। वाटर एटीएम खराब हो जाने से वहां यात्री बस पड़ाव के पास लोगों को शीतल जल नहीं मिल पा रहा है। वहीं हाई स्कूल चौक वाला वाटर एटीएम से पानी की आपूर्ति है। सबसे अधिक यात्री दारोगा राय चौक स्थित बस पड़ाव पर यात्रियों की भीड़ ज्यादा रहती है। इन दिनों बढ़ती तपिश में पानी नहीं मिलने से यात्रियों को कठिनाई हो रही है। ऐसी स्थिति में वे या तो दुकानों से पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं या प्यास को सहन कर रहे हैं। यात्रियों में परसा के अरुण कुमार, अंजनी के नितेश सिंह, सगुनी के मनीष कुमार सहित कई ने बताया कि पटना, हाजीपुर सहित कई जगहों पर जाने के लिए यात्री बस पड़ाव पहुंचते हैं लेकिन पानी नहीं मिलने की समस्या से यात्रियों को ही नहीं बल्कि स्थानीय दुकानदारों को भी जूझना पड़ रहा है। पीने के पानी के लिए स्थानीय दुकानदार सहित अन्य लोग आरओ का पानी या पानी की बोतल खरीद अपनी प्यास बुझाते हैं। नगर ईओ रजनीश कुमार ने बताया कि सात वाटर एटीएम में सिर्फ एक वाटर एटीएम खराब है। खराब हुए वाटर एटीएम से मोटर को निकलवा कर मैकेनिक के यहां भेजा गया है तुरंत एक-दो दिनों में बनाकर लगा दिया जाएगा और पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। ,, सारण में दुधारू पशुओं का दूध 30 फीसदी तक घटा तेज धूप व लू के थपेड़ों ने दुधारू पशुओं की सेहत को प्रभावित अत्यधिक तापमान पशुओं में हीट स्ट्रेस अर्थात तापीय तनाव पैदा करता छपरा, नगर प्रतिनिधि। सारण में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पशुधन पर भी साफ नजर आने लगा है। तेज धूप और लू के थपेड़ों ने दुधारू पशुओं की सेहत को प्रभावित किया है, जिससे दूध उत्पादन में गिरावट दर्ज की जा रही है। जिले के कई इलाकों में पशुपालक इन दिनों घटते दूध को लेकर चिंतित हैं।सदर प्रखंड के पशुपालक रामबाबू यादव बताते हैं कि पहले हमारी गाय रोजाना 10 से 12 लीटर तक दूध देती थी, लेकिन अब यह घटकर 6 से 7 लीटर रह गया है। गर्मी में पशु ठीक से चारा भी नहीं खा पा रहे हैं। वहीं, बनियापुर क्षेत्र के एक अन्य पशुपालक सुनील यादव का कहना है कि तेज गर्मी के कारण पशु सुस्त हो जाते हैं, ज्यादा समय खड़े रहने की बजाय बैठ जाते हैं और पानी अधिक पीते हैं, जिससे दूध उत्पादन पर असर पड़ता है। पशु चिकित्सक डॉ सुनील रंजन के अनुसार, अत्यधिक तापमान पशुओं में हीट स्ट्रेस अर्थात तापीय तनाव पैदा करता है। इस स्थिति में पशु का शरीर अपनी ऊर्जा का उपयोग शरीर का तापमान नियंत्रित करने में करने लगता है, जिससे दूध बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। साथ ही, गर्मी में भूख कम लगने के कारण पशु पर्याप्त पोषण नहीं ले पाते, जिसका सीधा असर दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर पड़ता है।पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने पर दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन 10 से 30 प्रतिशत तक घट सकता है।
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