Passengers Face Hardships Due to Poor Facilities at Bus Station जय प्रकाश नारायण बस अड्डा में यात्रियों के लिए मात्र एक चापाकल, Buxar Hindi News - Hindustan
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जय प्रकाश नारायण बस अड्डा में यात्रियों के लिए मात्र एक चापाकल

बक्सर के जय प्रकाश नारायण अंतरराज्यीय बस अड्डे पर यात्री गर्मी में परेशान हैं। साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और शौचालय की कमी है। यात्रियों को गर्मी में पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है और पर्याप्त शेड न होने से उन्हें धूप में बैठना पड़ता है। महिलाओं के लिए शौचालय की स्थिति और भी खराब है।

Thu, 23 April 2026 08:41 PMNewswrap हिन्दुस्तान, बक्सर
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जय प्रकाश नारायण बस अड्डा में यात्रियों के लिए मात्र एक चापाकल

एक सार्वजिक शौचालय परंतु नियमित रूप से नहीं होती सफाई आसपास गंदगी होने से यात्रियों को उठानी पड़ती है परेशानी यात्री शेड में पंखा नहीं होने से गर्मी में नहीं मिल पाता राहत बक्सर, हमारे संवाददाता। शहर के बाइपास रोड़ स्थित जय प्रकाश नारायण अंतरराज्यीय बस अड्डा में गर्मी की मार यात्री झेल रहे है। यहां शुद्ध पेयजल, शौचालय व साफ-सफाई पर्याप्त नहीं है। इस गर्मी भीषण गर्मी में यात्रियों को पानी बोतल खरीदकर पीना पड़ रहा है। पर्याप्त यात्री शेड का भी अभाव है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बस अड्डा में मात्र एक चापाकल चल रहा है। जबकि अन्य चापाकल व वाटर एटीएम खराब पड़ा हुआ है।

जो एक चापाकल चल रहा है। उसके आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। यहां से बसें टाटा, धनबाद, बोकारो, सासाराम, कैमूर सहित जिला के अन्य हिस्सों के लिए खुलती है। यहां हर दिन हजारों की संख्या में यात्री आते है। इन यात्रियों के लिए इस भीषण गर्मी में पेयजल की व्यवस्था भी ठीक से नहीं है। जो भी यात्री आर्थिक रूप से कमजोर है वह मजबूरीवश इस चापाकल का उपयोग कर रहे है। बस चालक, कंडक्टर व खलासी भी यहां मजबूरीवश पानी पीते है। वहीं दूसरी ओर एक सावर्जनिक शौचालय है। जिसकी नियमित साफ-सफाई नहीं होती है। पुरुषों का काम तो जैसे तैसे चल जाता है। सबसे अधिक परेशानी महिला व युवतियों को होती है। अंतरराज्यीय बसें जहां लगती है। वहां पर शेड बना हुआ है। यात्री उसमें बैठ लेते है। परंतु इन शेड में कोई भी पंखा नहीं है। कई बार तेज धूप होती है और हवा नहीं चलती है उसमें पसीने तर-बतर यात्री बैठ कर इंतजार करते है। वहीं जिला के अंदर चलने वाली बसें जहां लगती है वहां कोई यात्री शेड नहीं है। ऐसे में किसी दुकान के अंदर या धूप में यात्री बैठने के लिए मजबूर हो जाते है। बस अड्डा के पीछे गंदगी का अंबार है। यहां कभी साफ-सफाई नहीं होती है। जिस कारण दुर्गंध आते रहती है। कई बार बस अड्डा के आसपास नगर परिषद की ओर से कचरा जला दिया जाता है। उससे निकलने वाले धुआं से यात्रियों को परेशानी होती है। अपने एक रिश्तेदार के मुंडन संस्कार में ब्रह्मपुर से आयी रंभा देवी का कहना है कि रामरेखा घाट पर सभी कार्यक्रम संपन्न होने के बाद वह अपने घर लौट रही है। यहां पर बस का इंतजार कर रही है। लेकिन, पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। वहीं नावानगर के यात्री सत्येंद्र यादव का कहना है कि शेड की कोई व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी से बचने का यहां कोई उपाय नहीं है। पुराना भोजपुर निवासी पुष्पा देवी कहना है कि बस स्टैंड में कीचड़ भरा रहता था। अब सीमेंट का ढलाई तो कर दिया गया है। लेकिन, महिलाओं की सुविधा के शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है। इनसेट में गर्मी में पारा चढ़ते ही सब्जियों पर संकट, घट रहा उत्पादन बक्सर। जिला में गेंहूं की फसल कटाई का कार्य पूरा हो चुका है। गेहूं के बाद यह इलाका सब्जियों के लिए जाना जाता है। यहां से सब्जियां दूसरे राज्यों में भी भेजी जाती है। लेकिन, इस भीषण गर्मी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। अप्रैल माह में लगातार बढ़ते तापमान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों से पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जा रहा है। इससे सब्जियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। भीषण गर्मी और लू के कारण फसलों की मिट्टी तेजी से सूख रही है, जिससे पौधे झुलस रहे हैं और उत्पादन में भारी कमी आ रही है। फूल झड़ने, फल छोटे रहने या कड़क होकर फटने (जैसे भिंडी, लौकी, नेनुआ, टमाटर) से किसानों को नुकसान हो रहा है। तेज धूप से सब्जियां जल्दी खराब हो रही हैं। वहीं इस संबंध में कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवकरण कहना है कि गर्म हवाओं (लू) के कारण पत्ते पीले होकर सिकुड़ रहे हैं और पौधे समय से पहले मुरझा रहे हैं। तापमान बढ़ने से फूल झड़ने की समस्या काफी बढ़ गई है, जिससे फल बनने की प्रक्रिया रुक जाती है। सब्जियों (खीरा, लौकी, तोरी) में मादा फूलों की संख्या कम हो जाती है, जिससे उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है। इससे गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। फल छोटे रह जाते हैं, कड़क हो जाते हैं और स्वाद भी बदल जाता है। उन्होंने किसानों को सलाह दिया कि खेत में उचित नमी बनाए रखने के लिए सुबह या शाम को ही सिंचाई करें। दोपहर में पानी नहीं डालें। इससे फसल पर असर पड़ेगा। मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए पुआल या प्लास्टिक मल्च का उपयोग करें। जिससे उसमें नमी बनी रहे। इन पौधों में अत्यधिक तापमान में यूरिया जैसे उर्वरक नहीं डालें। इससे पौधे झुलस सकते हैं। सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव फायदेमंद हो सकता है।

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