दिन में टिन-टप्पर के नीचे, तो रात में आसमान के नीचे बीत रही जिंदगानी
बिहारशरीफ की मलिन बस्तियों में लोग भीषण गर्मी में टिन-टप्पर के नीचे और खुली आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। गर्मी के कारण बच्चों और बुजुर्गों की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक है। हालांकि, नल-जल योजना से पानी की समस्या में कुछ राहत मिली है, लेकिन आवास की कमी उनकी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।

हिन्दुस्तान पड़ताल : दिन में टिन-टप्पर के नीचे, तो रात में आसमान के नीचे बीत रही जिंदगानी दोपहर में मर्द और औरत कामों में रहते हैं व्यस्त बच्चों घरों के बाहर जहां तहां बिताते हैं पूरा दिन पंखा भी नहीं दे रहा भीषण गर्मी से राहत झुग्गी-झोपड़ियों में नल का जल पहुंचने से मिल रही राहत मलिन बस्तियों में लोगों का जीना हो रहा मुहाल फोटो : बिहार बस्ती : बिहारशरीफ अस्पताल चौक के पास भीषण गर्मी के कारण सड़क पर बैठे मलीन बस्ती के लोग। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। शहर के रेलवे क्रॉसिंग, सोहसराय थाना क्षेत्र, संग्रहालय, पक्की तालाब परिसर समेत दर्जनों इलाकों में रहने वाले सैकड़ों परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझते हुए इस भीषण गर्मी में जीवन जीने को मजबूर हैं।
इन इलाकों की मलिन बस्तियों में रहने वाले लोगों की जिंदगी एक ऐसी हकीकत बयां करती है, जहां दिन तपती छतों के नीचे और रात खुली आसमान के नीचे गुजरती है। भीषण गर्मी ने इनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है, जिससे उनका जीना मुहाल हो गया है। हालांकि, झुग्गी झोपड़ियों में नल का जल पहुंचने से अब पानी को लेकर राहत मिल रही है। दोपहर का समय होते ही टिन-टप्पर और प्लास्टिक की छतें अंगारों की तरह तपने लगती हैं। झुग्गियों के अंदर बैठना तो दूर, खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पुरुष और महिलाएं दिनभर मजदूरी या छोटे-मोटे काम की तलाश में बाहर निकल जाते हैं, ताकि कुछ राहत मिल सके और घर के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम हो सके। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को होती है, जो दिनभर घर के बाहर इधर-उधर भटकते रहते हैं। कोई पेड़ की छांव तलाशता है, तो कोई रेलवे प्लेटफॉर्म या किसी सार्वजनिक स्थल पर समय बिताता है। इन बस्तियों में रहने वाले कारू डोम, पिंटू डोम व अन्य ने बताया कि उनकी जिंदगी संघर्षों से भरी है। हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है। एक तरफ काम की चिंता, दूसरी तरफ खाने-पीने का इंतजाम और तीसरी तरफ बच्चों के भविष्य की फिक्र इन्हीं सब के बीच हमारी पूरी जिंदगी गुजर जाती है। पीढ़ी दर पीढ़ी यही हाल बना हुआ है, लेकिन अब तक उनके लिए पक्के घर की व्यवस्था नहीं हो सकी है। गर्मी के इस भीषण मौसम में टिन और त्रिपाल के नीचे रहना किसी सजा से कम नहीं है। दिन के समय झुग्गियों का तापमान इतना बढ़ जाता है कि वहां रहना असंभव हो जाता है। यहां तक कि जिनके पास पंखे हैं, उन्हें भी कोई खास राहत नहीं मिलती, क्योंकि गर्म हवा ही चलती रहती है। रात होते-होते हालात कुछ अलग जरूर होते हैं, लेकिन राहत पूरी नहीं मिलती। झुग्गियों के अंदर उमस और गर्मी के कारण लोग बाहर खुले आसमान के नीचे या फुटपाथ पर सोने को मजबूर हैं। कई परिवार रेलवे प्लेटफॉर्म, सड़कों के किनारे या बड़े पेड़ों के नीचे रात बिताते हैं। यह स्थिति न केवल असुरक्षित है, बल्कि बच्चों और महिलाओं के लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है। अब पानी की नहीं होती है परेशानी : हालांकि, इन बस्तियों में नल-जल योजना के तहत पानी की कुछ व्यवस्था होने से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है। पहले जहां पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। कुआं या चापाकल पर जाना पड़ता था। अब उनकी झोपड़ी के पास ही नल लग चुका है। उसमें गर्मी के दिनों में सुबह, दोपहर व शाम को पानी आता है। नल से पानी मिलने से दैनिक जीवन थोड़ा आसान हुआ है। आवास की समस्या सबसे विकराल : इन मलिन बस्तियों की सबसे बड़ी समस्या आवास की है। वर्षों से यहां रहने वाले लोग आज भी अस्थायी झोपड़ियों में जीवन बिताने को बाध्य हैं। सरकारी योजनाओं की जानकारी या लाभ इन तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। कई बार कागजी प्रक्रियाओं और पहचान पत्रों की कमी के कारण ये लोग योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। आवास की समस्या इनके लिए दिनों दिन विकराल होती जा रही है। मालती देवी ने बताया कि ये कच्चे दीवार और कर्कट ही हमारी जिंदगी है। गर्मी के दिनों में कर्कट पर त्रिपाल या अन्य सामानों को रखते हैं, ताकि गर्मी से थोड़ी राहत मिल सके। एक तो छोटा सा कच्चा कमरा उसपर एक चौकी पर तीन से चार लोग किसी तरह सोते हैं। गर्मी के दिनों में तो मर्द लोग बाहर बरामदा या फुटपाथ पर सो जाते हैं। यहां स्वास्थ्य की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन, चक्कर, बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियां आम हो गई हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर ज्यादा पड़ता है। चिकित्सा सुविधाओं की कमी और जागरूकता के अभाव में छोटी बीमारियां भी गंभीर रूप ले लेती हैं। गर्मी के बाद बरसात आएगा। उस समय उमसभरी गर्मी और परेशान करेगी। यह डर अभी से सता रहा है। भीषण गर्मी में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले इन लोगों की जिंदगी बहुत कुछ बयां करती है। असली विकास तब होगा, जब समाज का हर वर्ग सम्मान और सुविधा के साथ जीवन जी सकेगा। अभी के हालात में इनकी जिंदगी संघर्ष, मजबूरी और उम्मीद के बीच झूलती नजर आती है। कहते हैं अधिकारी : सभी घरों तक नल का जल पहुंचाया जा चुका है। बिजली समेत अन्य सुविधाएं उन्हें मुहैया करायी जा रही है। उन बस्तियों की साफ सफाई की भी व्यवस्था की गयी है। ऐसी बस्तियों को चिह्नित कर अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। भीषण गर्मी को देखते हुए नगर निगम प्रशासन काफी अलर्ट है, ताकि शहरवासियों को पानी को लेकर किसी तरह की परेशानी न हो। साकेश कुमार, नगर प्रबंधक (बिहारशरीफ से कुमार कौशलेंद्र)
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