गरीब बस्ती: नल-जल योजना की टंकी नहीं, चापाकल खराब
भभुआ में भीषण गर्मी ने मलिन बस्तियों के निवासियों की जिंदगी को बेहाल कर दिया है। पानी की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। लोग दिन में पेड़ों की छांव में समय बिताते हैं, लेकिन रात में गर्मी से परेशानी होती है। चापाकल खराब हैं और नल-जल योजना की टंकी भी नहीं है।

झोपड़ी की जमीन और टीन की छत पर फूंस डाल पानी से भिगोकर राहत की कोशिश बागीचा, पशु अस्पताल, बस्ती के पेड़ की छांव में काट रहे दोपहर, सता रही गर्मी (पटना का टास्क) भभुआ, नगर संवाददाता। भीषण गर्मी ने शहर की मलिन बस्तियों में निवासी करने वालों की जिंदगी बेहाल कर दी है। इस संवाददाता ने शहर और इसके आसपास के गरीबों की तीन बस्तियों की शनिवार को पड़ताल की। इस दौरान इन बस्तियों में निवास करनेवाले लोगों से गर्मी में उत्पन्न हो रही समस्याओं और मिल रही सुविधाओं पर चर्चा की गई। पड़ताल में सामने आया कि कहीं पीने के लिए पानी का समुचित प्रबंध नहीं है, तो कहीं आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव है।
वह दिन तो पेड़ की छाया में काट ले रहे हैं, पर रात में शकून की नींद नहीं ले रहे हैं। अलग-अलग बस्तियों में हालात लगभग एक जैसे हैं। कहीं चापाकल खराब हैं तो कहीं नल-जल योजना की टंकी तक नहीं है। सेहत के हिसाब से देखें तो इन बस्तियों के लिए सदर अस्पताल ही इलाज का एक मुख्य विकल्प है। यदि इनके परिवार का कोई सदस्य बीमार होता है, तो उसे इलाज कराने के लिए सदर अस्पताल ले जाना पड़ता है। सेमरियां नई बस्ती: बागीचे में कटता दिन, रात में गर्मी से जंग सेमरियां नई बस्ती में दो चापाकल गाड़े गए हैं। फिलहाल दोनों खराब पड़े हैं। यहां के लोग नल-जल योजना के पानी पर निर्भर हैं। इस योजना से पानी आपूर्ति करने के लिए घरों तक पाइपलाइन बिछाई गई है। घरों में टोंटी लगी है। लेकिन, इस योजना से पानी की टंकी स्थापित नहीं की गई है। इस बस्ती के लोगों ने बताया कि जब मोटर चालू होता है, तब बर्तन में पानी भरते हैं। टंकी रहती तो पानी स्टोर होता और जरूरत के हिसाब से पानी लेकर काम चला लेते। उनके पास इतने बर्तन भी नहीं है, जिसमें वह पानी का भंडारण कर सकें। टीन की छत की घास-फूंस पर पानी डाल करते हैं ठंड इस बस्ती में निवास करनेवाले राहुल कुमार, हृदय गोंड, अनिल बैठा, रामचंद्र पासवान, गोपाल खरवार, विनोद खरवार, राजाराम खरवार आदि ने बताया कि दोपहर में वह बच्चों को लेकर पास के बागीचे में चले जाते हैं। पेड़ की छांव में बैठकर दोपहर बिताते हैं। लेकिन रात में हालात बदतर हो जाते हैं। जिनके पास आवास योजना की पक्की छत है, वह उस पर पानी डालकर ठंडा करते हैं, जबकि झोपड़ी में रहने वाले जमीन पर पानी डालकर उसी पर सोकर रात गुजारते हैं। टीन की बनी छत पर कद्दू, नेनुआ, कोहड़ा के पौधे सूखे हैं। उसपर पानी छिड़ककर ठंडक लाने की कोशिश की जाती है। वार्ड 9: पेड़ की छांव और जुगाड़ जीवन जीते हैं वार्ड नंबर 9 स्थित पशु अस्पताल के पीछे मलिन बस्ती में हालात और भी चुनौतीपूर्ण हैं। यहां के लोग दिनभर पेड़ों के नीचे बैठकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते हैं। झोपड़ियों में केवल खाना पकाते हैं, क्योंकि अंदर रहना मुश्किल हो जाता है। यहां का भी चापाकल खराब पड़ा है। यहां के लोग नल-जल योजना और पशु अस्पताल परिसर से मिलनेवाले पानी पर निर्भर हैं। राघव मुसहर, सोहन मुसहर, देइया कुंवर, रश्मि देवी आदि ने बताया कि रात में लोग छत या खुले स्थान पर पानी डालकर किसी तरह सोने की कोशिश करते हैं। इन लोगों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में वह जैसे-तैसे जिंदगी गुजार रहे हैं। सेवरी नगर: झोपड़ी में कम बाहर ज्यादा बिताते हैं समय सेवरी नगर वार्ड नंबर 7 में नल-जल योजना तो है, लेकिन टंकी नहीं है। पानी सीधे पाइप से आता है, जिसे लोग समय रहते बर्तनों में भरकर रखते हैं। यहां दिन के समय पेड़ों की छांव कुछ राहत देती है, लेकिन रात की गर्मी से निजात नहीं मिलती। झोपड़ियों में रहना मुश्किल हो जाता है, इसलिए लोग बाहर ही किसी तरह रात काटते हैं। सेवरी नगर बस्ती के छोटू मुसहर, संजय मुसहर, पंजाबी मुसहर, विद्या कुमारी, सुधा देवी, मुन्ना राम आदि लोगों का कहना है कि सरकार अगर पक्की कॉलोनी की व्यवस्था कर दे तो उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आ सकता है। गर्मी के आगे बेबस जिंदगी तीनों बस्तियों में हालात यह बताते हैं कि भीषण गर्मी गरीबों के लिए किसी आपदा से कम नहीं है। लोग जुगाड़ के सहारे जी रहे हैं, लेकिन राहत कहीं नजर नहीं आ रही। कोट जिले में चापाकल मरम्मत कर्मियों का 12 दल काम कर रहा है। जहां से सूचना मिलती है, वहां मरम्मत दल जाकर चापाकल की मरम्मत करता है। शहरी क्षेत्र में बिगड़े चापाकलों की मरम्मत का कार्य नगर परिषद का है। रवि प्रकाश, कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी फोटो- 25 अप्रैल भभुआ- 3 कैप्शन- पशु अस्पताल परिसर में पेड़ की छांव में दोपहर काटते वार्ड 9 की मलिन बस्ती के लोग। फोटो- 25 अप्रैल भभुआ- 7 कैप्शन- भभुआ के पशु अस्पताल के पीछे इसी झोपड़ी में निवास करते हैं गरीब बस्ती के लोग।
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