भीषण गर्मी से कच्चे मकानों में रहना मुश्किल, पेड़ों के नीचे गुजर रहा समय- प्लान की खबर-पेज-4
मदनपुर प्रखंड के मिश्र बिगहा में मलिन बस्तियों में लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं। कच्चे मकानों और एस्बेस्टस की छत के कारण घरों में रहना मुश्किल हो रहा है। पेड़ के नीचे समय बिताने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं है। यहां पानी की व्यवस्था तो है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है।

मलिन बस्तियों में परेशानी बढ़ी, गर्मी में रहते हैं परेशान, तेज धूप से गर्म हो जाती है एस्बेस्टस की छत फोटो- 25 अप्रैल एयूआर 16 कैप्शन- शनिवार को पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मिश्र बिगहा में कच्चे मकान के बाहर बैठी बच्चियां और महिला फोटो- 25 अप्रैल एयूआर 17 कैप्शन- मदनपुर प्रखंड के मिश्र बिगहा में इस तरह के मकान में गुजर बसर कर रहे हैं लोग फोटो- 25 अप्रैल एयूआर 18 कैप्शन- मदनपुर प्रखंड के मिश्र बिगहा में पेड़ के नीचे दिन गुजारते ग्रामीण औरंगाबाद, मदनपुर, हिन्दुस्तान टीम। मदनपुर प्रखंड मुख्यालय से थोड़ी ही दूरी पर मिश्र बीघा में स्थित मलिन बस्ती में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है।
भीषण गर्मी पड़ने से यहां लोगों का अपने घरों में रहना मुश्किल हो रहा है। ज्यादातर मकान कच्चे मिट्टी के बने हैं और उस पर एस्बेस्टस की छत डाली हुई है। गर्मी पड़ने पर यह छत गर्म हो जा रही है और घर के अंदर एक मिनट का समय काटना मुश्किल हो जाता है। घर के लोग इतने सक्षम नहीं हैं कि पंखा और कूलर की व्यवस्था कर सकें। ऐसे में सारे लोग घर से बाहर पेड़ों के नीचे दिन गुजार रहे हैं। महिलाएं घर के बाहर धूप कम होने का इंतजार करती हैं ताकि किसी तरह जान बच सके। मिश्र बीघा में अरुणा देवी, सोनी देवी, उर्मिला देवी, जयंती देवी, जगदीश भुइयां सहित कई लोगों के मिट्टी के मकान हैं। यहां लगभग डेढ़ सौ से अधिक घर हैं जहां 12 सौ की जनसंख्या निवास करती है। इसके साथ ही कुछ पक्के मकान हैं लेकिन ज्यादातर कच्चे मकानों में ही लोग गुजर बसर कर रहे हैं। सालों से यहां रहने वाले लोगों के पेयजल के लिए नल जल की योजना है जिससे पानी मिल पा रहा है अन्यथा बुनियादी सुविधाओं का यहां घोर अभाव है। सामुदायिक शौचालय की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। ज्यादातर लोग खेतों की ओर जाते हैं। इतनी क्षमता नहीं है कि लोग नए मकान का निर्माण करा सकें। घरों में पंखे नहीं हैं तो तीखी धूप में एस्बेस्टस की छत के गर्म होने पर पेड़ की छाया में जाना ही एकमात्र विकल्प रहता है। विशंभर रिकियासन का घर प्लास्टिक और लकड़ी से घेर कर बना हुआ है। यह घर मूल रूप से झोपड़ी है जिसकी सीमेंट के एस्बेस्टस की छत गर्म हो जाती है। विशंभर रिकियासन की पत्नी दुलारी देवी ने बताया कि उनके पास तो मकान ही नहीं है। किसी तरह गुजारा कर रही हैं। अरूणा देवी ने बताया कि एस्बेस्टस की छत गर्म हो जाती है तो घर के बाहर पेड़ के नीचे समय काटते हैं। दिन गुजारना मुश्किल हो जाता है। फिलहाल रात में हल्की ठंडी हवा चल रही है तो समय कट रहा है अन्यथा बहुत ज्यादा परेशानी होती है। हीट स्ट्रोक के दिनों में तो समझ में नहीं आता है कि क्या करें। बीमार पड़ने पर ज्यादातर लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए जाते हैं। जगदीश भुइयां की पत्नी सोनी देवी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं जिनका इलाज मगध मेडिकल कॉलेज, गयाजी में चल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास इस गर्मी से बचाव का कोई विकल्प नहीं है। वे लोग सालों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। फिलहाल तापमान ज्यादा हो जा रहा है तो परेशानी बढ़ जा रही है।
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