गर्मी का सितम : अस्पतालों में बढ़े निर्जलीकरण के 40 फीसदी मरीज, बनाये गये लू वार्ड
बिहारशरीफ में भीषण गर्मी के कारण अस्पतालों में निर्जलीकरण के मरीजों में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है। तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच गया है। सुबह 8 बजे से ही धूप में बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। दिहाड़ी मजदूरों को गर्मी में काम करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने हीट वेव के लिए विशेष वार्ड तैयार किया है।

गर्मी का सितम : अस्पतालों में बढ़े निर्जलीकरण के 40 फीसदी मरीज, बनाये गये लू वार्ड जिले में 42 डिग्री के पार पहुंचा तापमान, भीषण गर्मी से अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन 8 बजते ही देह जलाने वाली धूप की वजह से घर से बाहर निकलना हुआ मुश्किल स्कूल हुए मॉर्निंग पर दिहाड़ी मजदूरों को कड़ी धूप में करना पड़ रहा रोटी का जुगाड़ फोटो : सदर अस्पताल : सदर अस्पताल में शुक्रवार को मरीज का इलाज करते डॉ. संजीव कुमार व डॉ. सावन सुमन। बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में 40 डिग्री के पार तापमान पहुंच चुका है। लेकिन, 41 डिग्री सेल्सियस की गर्मी व जलन महसूस हो रही है।
भीषण गर्मी के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त होने लगा है। इस कारण अस्पतालों में डिहाइड्रेशन यानि निर्जलीकरण के मरीज 40 फीसदी बढ़ गए हैं। गर्मी का सितम यह कि सुबह आठ बजे से ही देह जलाने वाली धूप परेशान करने लगी है। लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। स्कूल मॉर्निंग होने से छात्रों व शिक्षकों को थोड़ी राहत है, पर दिहाड़ी मजदूरों को अब भी कड़ी धूप में रोटी के जुगाड़ के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है। जिले में भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। दोपहर होते-होते हालात और भी भयावह हो जाते हैं। गर्म हवा के थपेड़ों और झुलसा देने वाली धूप के कारण बाजारों में सन्नाटा पसरने लगा है, जबकि जरूरी काम से निकलने वाले लोग भी सिर ढककर और पानी की बोतल साथ लेकर चलने को मजबूर हैं। लू, उल्टी, दस्त के बढ़ रहे मरीज : भीषण गर्मी का सीधा असर आम जनजीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। सदर अस्पताल और निजी क्लीनिकों में डिहाइड्रेशन, लू, उल्टी, दस्त और चक्कर आने जैसे मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ती जा रही है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और दिहाड़ी मजदूर इस गर्मी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। शुक्रवार को सदर अस्पताल में मरीजों की लंबी कतार रही। डॉ. संजीव कुमार और डॉ. सावन सुमन लगातार मरीजों का इलाज करते रहे। डॉक्टरों ने बताया कि शरीर में पानी की कमी और तेज धूप में लंबे समय तक रहने के कारण लोग तेजी से बीमार हो रहे हैं। दैनिक मजदूरों के छूट रहा पसीना : गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव कर दिया है। अब सभी स्कूलों को मॉर्निंग शिफ्ट में चलाया जा रहा है। इससे बच्चों को दोपहर की तेज धूप से काफी हद तक बचाव हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, दैनिक मजदूरों, रिक्शा ठेला चालकों के लिए यह गर्मी किसी परीक्षा से कम नहीं है। तेज धूप में काम करना उनकी मजबूरी बन गई है, क्योंकि रोज कमाने-खाने वालों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो गया है। दैनिक मजदूर मधुसूदन दास ने बताया कि सुबह से ही ऐसा लगता है जैसे लू चल रहा हो। घर में रहना ही बेहतर है, लेकिन जरूरी काम के लिए बाहर निकलना पड़ता है। काम नहीं करेंगे, तो परिवार कैसे चलेगा। रिक्शा चालक मुन्ना कुमार ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि दोपहर में सवारी मिलना बंद हो जाता है, फिर भी पेट के लिए धूप में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार चक्कर आने लगता है और शरीर कमजोर महसूस होता है। गृहिणी सुनीता देवी ने कहा बच्चों को बार-बार पानी पिलाना पड़ रहा है। गर्मी इतनी है कि कूलर भी राहत नहीं दे पा रहा है। पंखों से भी शरीर को झुलसा देने वाला हवा निकल रहा है। हीट वेव का विशेष वार्ड : स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। सदर अस्पताल में हीट वेव को लेकर अलग से 10 बेड का विशेष वार्ड बनाया गया है। वहां लू और डिहाइड्रेशन के मरीजों का प्राथमिकता से इलाज किया जा रहा है। अस्पताल परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने और मरीजों को तुरंत सुविधा देने के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की गई है। वार्ड में लगाए गए हैं पर्याप्त बेड व कूलर : सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि भीषण गर्मी को देखते हुए अस्पताल में हीट वेव वार्ड बनाया गया है। इस वार्ड में पर्याप्त संख्या में बेड, कूलर और पंखे लगाए गए हैं। मरीजों के लिए ओआरएस घोल, ठंडा और स्वच्छ पेयजल, आवश्यक दवाएं तथा आपातकालीन उपचार की पूरी व्यवस्था की गई है। डॉक्टरों और नर्सों की टीम 24 घंटे वहां तैनात हैं। साथ ही लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि दोपहर 11 बजे से तीन बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। अगर जरूरी हो, तो सिर ढककर रखें और अधिक से अधिक पानी तथा तरल पदार्थ का सेवन करें। छोटे बच्चों को भूलकर भी बाहर खुले धूप में न निकलने दें। (बिहारशरीफ से अभिषेक कुमार)
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