गर्मी का सितम : साग-सब्जी समेत व अन्य फसलों को बचाने में किसान हो रहे हलकान
बिहार में तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया है, जिससे किसान फसलों को बचाने के लिए परेशान हैं। साग-सब्जियों के पौधे सूखने लगे हैं और फसल की सिंचाई के लिए नमी बनाए रखने की चिंता है। कृषि विभाग ने किसानों के बीच बीज बांटना शुरू किया है, लेकिन समय पर वितरण ना होने से किसान चिंतित हैं।

गर्मी का सितम : साग-सब्जी समेत व अन्य फसलों को बचाने में किसान हो रहे हलकान भीषण गर्मी से परेशान किसानों को फसल पटवन की सता रही चिंता देह जलाने वाली 42 डिग्री तापमान से जनजीवन के साथ खेती-बारी पर पड़ रहा प्रतिकूल असर फोटो : रहुई फसल : रहुई किसान भवन में किसानों के बीच बीज वितरण करते बीएओ अमरकांत कुमार व अन्य। बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में दिनों-दिन तापमान बढ़ता जा रहा है। चिलचिलाती धूप और बढ़ता तापमान धरतीपुत्रों के लिए कहर साबित हो रहा है। आसमान से उगलती आग लोगों को दोपहर में घर में बंद रहने को विवश कर रहा है।
देह जलाने वाली 42 डिग्री तापमान से जनजीवन के साथ खेती-बारी पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। अन्नदाता को फसल बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। खेतों में लगे साग-सब्जियों के पौधे भीषण गर्मी की वजह से सूखने लगे हैं। साथ ही, सब्जियों के पौधों का विकास अवरुद्ध होने लगा है। खेत में नमी बरकरार रखने के लिए की चिंता सता रही है। किसान किसी तरह फसल का पटवन कर फसल बचा पा रहे हैं। इधर, दूसरी तरफ कृषि विभाग द्वारा किसानों के बीच फसल लगाने का सीजन पार करने के बाद बीज बांट रहा है। ऐसे में धरतीपुत्रों को प्रकृति के साथ अधिकारियों के मनमानी की मार सहनी पड़ रही है। दोपहर में न करें पटवन : नूरसराय नालंदा उद्यान महाविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामबाबू रमण ने बताया कि फसलों में नमी कमी बरकरार रखने के लिए किसानों को सुबह या शाम में ही नियमित अंतराल पर फसलों की सिंचाई करनी चाहिए। दोपहर में भूल से भी फसलों का पटवन न करें। ऐसा करने से किसानों को काफी नूकसान ही होगा। बोले किसान : मौसम खत्म होने पर दे रहा बीज : रहुई समेत कई प्रखंडों में कृषि विभाग द्वारा मक्का, मूंग, उरद का बीज बांटा जा रहा है। रहुई ई-किसान भवन में बीच लेने पहुंचे किसान जीतेंद्र प्रसाद, नीतीश कुमार, शैलेंद्र प्रसाद, विनय कुमार, प्रवीण कुमार, वीरेंद्र प्रसाद, मृत्युंजय कुमार, प्रमोद यादव व अन्य ने बताया मौसम खत्म होने के बाद बीज का वितरण कराने से किसानों को क्या लाभ होगा। पूंजी भी लगेगी और खेत में फसल भी नहीं होगी। किसान वीरेंद्र प्रसाद ने कहा कि मूंग, मक्का और उड़द की बुआई करने का सीजन 15 फरवरी से 31 मार्च तक है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में खेत में नमी खत्म हो जाती है। वहीं, दूसरी तरफ वैज्ञानिक डॉ. रामबाबू ने बताया कि गरमा मूंग लगाने का सीजन 15 मार्च से अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक है। उड़द लगाने का बेहतर सीजन फरवरी है। लेकिन, मौसम चक्र के परिवर्तन के कारण अप्रैल तक बुआई की जा सकती है। अधिकारी ने भी माना मौसम हुआ पार : किसानों ने कहा कि गरमा फसल में सिंचाई का संकट रहता है। जो किसान जोखिम लेकर फरवरी में बुआई किए हैं, उनकी फसल घुटने तक आ गयी है। विभाग को जनवरी में ही बीच वितरण करना चाहिए था। रहुई प्रखंड के बीएओ अमरकांत कुमार ने बताया कि जनवरी में ही जिला कृषि पदाधिकारी को बीज का मांग पत्र भेजा गया था। लेकिन, मुख्यालय से अप्रैल में जिले को बीज का आवंटन कराया गया। इसके बाद प्रखंडों में भी कुछ देर से मिला।
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