गैस सिलेंडर के बाद अब पेयजल संकट से जूझ रहे सरकारी विद्यालय
बिहारशरीफ के सरकारी विद्यालयों में अब पेयजल संकट बढ़ गया है। लगभग 200 विद्यालयों में शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं है। कई विद्यालयों में चापाकल खराब हैं, जबकि कुछ में एक भी चापाकल नहीं है। रसोईये गांव से पानी लाकर मध्याह्न भोजन बना रहे हैं, जिससे बच्चों को पानी के लिए घरों में दौड़ना पड़ रहा है।

गैस सिलेंडर के बाद अब पेयजल संकट से जूझ रहे सरकारी विद्यालय जिले में करीब 200 विद्यालयों में शुद्ध्र पानी की नहीं है व्यवस्था कई विद्यालयों में गांव से पानी ढोकर रसोईये बना रहे मध्याह्न भोजन कई विद्यालयों में नल का जल नहीं, तो कई में एक भी चापाकल नहीं फोटो : जगतनंदनपुर स्कूल : रहुई प्रखंड के जगतनंदनपुर प्राथमिक स्कूल में भोजन बनाने के लिए गांव से पानी ढोकर लातीं रसोईया। बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले के सरकारी विद्यालय गैस सिलेंडर के बाद अब पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। जिले में करीब दो सौ विद्यालयों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है।
कई विद्यालयों में चापाकल पानी नहीं उगल रहा है तो कई में चापाकल ही नहीं हैं। जबकि, कई विद्यालयों में सात निश्चय का नल-जल शोभा की वस्तु बनी हुई है। स्कूलों में मध्याह्न भोजन रसोईया की कर्मठता की वजह से किसी तरह बनायी जा रही है। भीषण गर्मी व देह जलाने वाले आसमानी कहर के बीच रसोईया गांव से पानी ढोकर मध्याह्न भोजन बना रहे हैं। भोजन करने के बाद बच्चों को भीषण गर्मी में पानी पीने के लिए घरों दौड़ लगानी पड़ रही है। साथ ही, शिक्षकों को अपने घर से पानी ले जाने की विवशता बनी हुई है। हर साल गर्मी में जलस्तर नीचे जाने की वजह से पेयजल संकट होता है। बिहारशरीफ एमडीएम बीआरपी दयानंद कुमार लालूनगर प्राथमिक विद्यालय में गांव से पानी ढोकर मध्याह्न भोजन बनाया जा रहा है। इस प्रखंड में 10 विद्यालयों में पेयजल का संकट है। रहुई प्रखंड के बीआरपी मुकेश कुमार ने बताया कि जगतनंदनपुर में चापाकल खराब है। गांव से पानी लाकर भोजन का प्रबंध कराया जा रहा है। बेन प्रखंड के बीआरपी उमाशंकर ने बताया कि उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिकरीपर समेत प्रखंड में 15 विद्यालयों में पेयजल की काफी किल्लत है। हद तो यह कि नथाचक प्राथमिक विद्यालय में महज एक चापाकल है, इसमें भी खराब है। एकंगरसराय के बीआरपी ने बताया कि गड़ेड़िया बिगहा तीन चापाकल हैं। तीनों खराब हैं। अस्थावां के बीआरपी अजय कुमार सिन्हा ने बताया कि 15 विद्यालयों में पेयजल संकट है। रसोईया गांव से पानी लाकर किसी तरह मध्याह्न भोजन बना रहे हैं। बड़ी संख्या में लगा था चापाकल : दो साल पहले जिले के सैकड़ों सरकारी विद्यालयों में अभियान चलाकर पेयजल संकट से निपटने के लिए बोरिंग व चापकल लगाया गया था। विधानसभा चुनाव के वक्त सितंबर-अक्टूबर में शिक्षा विभाग द्वारा जिले के सरकारी स्कूलों में 50-50 हजार रुपये भेजे गए थे। विद्यालयों में छोटी-मोटी मरम्मत कराने समेत सबमिर्सबल, चापाकल की मरम्मत कराने का भी आदेश दिया गया था। जानकारों ने बताया कि कई विद्यालयों में चापाकल में छोटी-मोटी खराबी रहने पर भी सरकारी संपत्ति समझकर इसे मरम्मत कराना उचित नहीं समझते। हद तो यह कि कई विद्यालयों में छोटी-मोटी मरम्मत कराने के लिए भी सरकारी राशि मिलने का इंतजार किया जाता है। हालांकि, कई विद्यालयों के प्राचार्य अपनी राशि खर्च कर विद्यालय को मेंटेनेंस भी रखते हैं। बोले अधिकारी : विद्यालयों में पेयजल संकट रहने की बात सामने आयी है। बीआरपी से रिपोर्ट भी मांगी गयी है। कई बीआरपी द्वारा रिपोर्ट भी भेजी गयी है। खराब चापाकल की मरम्मत कराने व नये चापाकल लगाने संबंधित पत्र वरीय अधिकारी को भेजा जा रहा है। पेयजल संकट के बावजूद किसी स्कूल में मध्याह्न भोजन बंद नहीं है। जीतेन्द्र कुमार, डीपीएम, मध्याह्न भोजन योजना
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