एक से डेढ़ किमी. दूर से पानी लाकर एमडीएम पका रहीं रसोइयां
अधौरा प्रखंड के कस्तूरबा गांधी आवासीय और अन्य विद्यालयों में पेयजल संकट गहरा गया है। गर्मी में बच्चे पानी के लिए अपने घर जाते हैं, जबकि रसोइयों को भी दूर से पानी लाना पड़ता है। चापाकल और नल-जल योजना खराब होने से स्थिति और बिगड़ गई है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

अधौरा प्रखंड के कस्तूरबा गांधी आवासीय, प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में पेयजल की समस्या उत्पन्न, पानी पीने घर जाते हैं बच्चे कई विद्यालयों में चापाकल और नल-जल योजना बंद होने से परेशानी बढ़ी सूचना देने के बाद पीएचईडी की टीम चापाकलों की कर रही है मरम्मत (पटना का टास्क) भभुआ/अधौरा, हि.टी.। इस भीषण गर्मी में पहाड़ी प्रखंड अधौरा के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के समक्ष भोजन-पानी का संकट उत्पन्न होने लगा है। रसोइया जहां एक से डेढ़ किमी. की दूरी तय कर मध्याह्न भोजन पकाने के लिए पानी ला रही हैं, वहीं प्यास लगने पर बच्चों को अपने घर जाना पड़ रहा है।
लेकिन, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की बच्चियां खुद दूसरे जगह से पानी लाकर प्यास बुझा रही हैं। अधौरा पहाड़ी पर स्थित प्राथमिक विद्यालय गम्हरिया, सलेया, खुखुमा, चटहास, जोरदाग, बहेरा, मड़पा, डुमुरूका, चुमुरूका, बड़गांव खुर्द, मध्य विद्यालय दीघार, आथन, दहार, बड़वान कला, बड़वान खुर्द ऐसे विद्यालय हैं, जहां के बच्चे पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। इन विद्यालय की रसोइयों को उबड़-खाबड़ रास्तों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। वह नदी और कुआं से पानी ला रही हैं। क्योंकि विद्यालयों के चापाकल के साथ नल-जल योजना से भी पानी नहीं मिल रहा है। हार विद्यालय के प्राधानाध्यापक संजय यादव ने बताया कि उनके विद्यालय का चापाकल व नल-जल योजना खराब है। डेढ़ किमी. की दूरी तय कर रसोइया पहाड़ी नदी से पानी लाकर खाना पका रही हैं। बड़गांव खुर्द व बड़गांव कला की रसोइया एक किमी. दूर जाकर कुआं से पानी लाती हैं। सलेया प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कृष्ण मुरारी जायसवाल ने बताया कि गांव से डेढ़ किमी. दूर स्कूल है। रसोइया गांव से पानी लाकर खाना पका रही हैं। स्कूल का चापाकल खराब है। पानी प्रबंध करने में बच्चियों की पढ़ाई प्रभावित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय से लेकर उत्क्रमित मध्य विद्यालयों तक में पानी का संकट गहरा गया है। छात्राओं को खुद बाहर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। दिन में बिजली नहीं रहने से मोटर नहीं चल पाता, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है। ऐसे में छात्राओं को पानी प्रबंध करने में समय लग जा रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विद्यालय की वार्डन के अनुसार, परिसर में जनरेटर उपलब्ध है, लेकिन डीजल के अभाव में नहीं चल पाता। दिन में बिजली नहीं रहती, जिससे पानी की आपूर्ति बाधित रहती है। रात में किसी तरह पानी भर लिया जाता है, जो सुबह तक खत्म हो जाता है। कोट सूचना मिलते ही हमारी टीम चापाकल मरम्मत में जुट जाती है, लेकिन कई गांव दूर-दराज में स्थित होने के कारण वहां पहुंचने में समय लग जाता है। सीमित संसाधनों के कारण एक दिन में एक-दो जगह ही मरम्मत कार्य संभव हो पाता है। विभाष कुमार, कनीय अभियंता, अधौरा कोट अधौरा क्षेत्र में 243 सोलर स्कीम के जरिए नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। अधिकांश योजनाएं सुचारु रूप से संचालित हो रही हैं और विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। सूचना मिलने पर चापाकलों की मरम्मत कराई जा रही है। रवि प्रकाश, कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी फोटो- 24 अप्रैल भभुआ- 5 कैप्शन- पेयजल की किल्लत को ले बाहर से पानी लाने जाती अधौरा प्रखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की छात्राएं।
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