Water Supply Crisis in Schools Broken Handpumps and Submersibles Cause Hardship सरकारी स्कूलों में सबमर्सिबल पंप से पानी की व्यवस्था पर कई जगह परेशानी, Ara Hindi News - Hindustan
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सरकारी स्कूलों में सबमर्सिबल पंप से पानी की व्यवस्था पर कई जगह परेशानी

-शिकायतों के बाद भी खराब चापाकलों की मरम्मत नहीं हो रही, हाल है। चौक-चौराहों से लेकर सरकारी संस्थानों में पेयजल की आपूर्ति के लिए व्यवस्था की गयी है। जिले के सरकारी स्कूलों में

Fri, 24 April 2026 08:46 PMNewswrap हिन्दुस्तान, आरा
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सरकारी स्कूलों में सबमर्सिबल पंप से पानी की व्यवस्था पर कई जगह परेशानी

-शिकायतों के बाद भी खराब चापाकलों की मरम्मत नहीं हो रही -भुगतान नहीं होने के कारण संवेदक नहीं दे रहे हैं इस पर ध्यान आरा/शाहपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। भीषण गर्मी से हर कोई बेहाल है। चौक-चौराहों से लेकर सरकारी संस्थानों में पेयजल की आपूर्ति के लिए व्यवस्था की गयी है। जिले के सरकारी स्कूलों में पेयजल के लिए हर घर नल का जल योजना के तहत नल और सबमर्सिबल पंप की व्यवस्था की गयी है। प्राइमरी स्कूलों में पांच और मिडिल स्कूलों में सात नलों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है। पुराने हैंडपंपों की मरम्मत पर जोर दिया जा रहा है।

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जिले के सरकारी स्कूलों में पीएचईडी के माध्यम से हर स्कूल में शुद्ध पेयजल के लिए नल और पानी के भंडारण के लिए पांच सौ लीटर का ओवरहेड टैंक लगाया गया है। सरकारी स्कूलों में लगाये गये सबमर्सिबल पंप और नल संबंधित एजेंसी के माध्यम से संवेदकों की ओर से लगायी गयी है। इuमें से कुछ संवेदकों का भुगतान जिला स्तर से किया गया है। वहीं कुछ संवेदकों का भुगतान के लिए राज्य मुख्यालय भेज दिया गया। ऐसे संवेदकों को परेशानी झेलनी पड़ी। स्कूलों में सबमर्सिबल पंप में खराबी होने की शिकायत मिलने के बाद भी इसको ठीक नहीं कराया जा रहा है। संवेदकों की ओर से इसमें रुचि नहीं ली जा रही है। वहीं कुछ स्कूलों में हैंडपंप खराब पड़ा है। इसे भी ठीक नहीं कराया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। उन्हें आसपास के चापाकलों से पानी लाना पड़ता है। शाहपुर में स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं कराया गया है। नल जल बहुत स्कूल में नहीं है। जहां है वहां कारगर नहीं है। पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। नल जल के तहत पानी सीमित जगहों तक सिमट कर रह गया है। ऐसे जगहों पर चापाकल ही विद्यार्थियों के लिए सहारा हैं। ---------- पीरो : तीन चापाकल लंबे समय से बंद तो एक से निकल रहा गंदा पानी पीरो, संवाद सूत्र। मध्य विद्यालय और उच्च विद्यालय नोनार के चार चापाकल में से तीन पहले से ही खराब पड़े हैं और चौथे चापाकल से गंदा पानी आ रहा है। सबमर्सिबलभी काफी समय से खराब पड़ा है। छात्र-छात्राओं की संख्या 500 से अधिक है और दर्जनों की संख्या में शिक्षक - शिक्षिका अध्यापन कार्य करने आते हैं। हलक सूखने पर छात्रों और शिक्षकों को गांव के शिव मंदिर परिसर में लगे चापाकल पर हलक सूखने की हालत में प्यास बुझाने जाना पड़ता है। भीषण गर्मी शुरू के साथ नोनार की पंचायत समिति सदस्य और प्रखंड प्रमुख रुन्नी खातून ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से की थी। स्कूल में पानी की व्यवस्था नहीं रहने से शौचालय का उपयोग कर पाना असंभव हो गया है। शौच जाने की जरूरत होने पर छात्र छात्रा अपने घर चले जाते हैं और दिक्कतें शिक्षक और शिक्षिकाओं को होती हैं। विवश होकर ग्रामीणों से मिन्नत करनी पड़ती है। लगभग यही हाल छवरही जंगल महाल पंचायत के चौबेपुर मध्य विद्यालय और गोबिंद टोला प्राइमरी स्कूल का है। पंचायत की मुखिया फूलकुमारी देवी और जदयू नेता सुरेंद्र कुश्वाहा ने पेयजल के संसाधनों को दुरुस्त करने का अनुरोध लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से किया था। शिकायत मिलने के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और गर्मी के चलते मारे प्यास के छात्र और शिक्षक तड़प रहे हैं। नोनार निवासी रामजी पटेल का कहना है कि बीईओ और बीडीओ के संज्ञान में यह मामला है। बीईओ मनोज सिंह ने बताया कि प्रखंड के सभी स्कूलों में पीने का पानी उपलब्ध है और चापाकल भी सही हालत में है। ---------- कोईलवर : खनन के कारण जलस्तर चला गया नीचे कोईलवर, एक संवाददाता। सोन नदी में बालू के अंधाधुंध खनन के कारण पूरे इलाके में पानी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। इसका खामियाजा आम अवाम से लेकर स्कूली बच्चों को ज्यादा भुगतना पड़ रहा है, जहां चापाकल की उपलब्धता के बावजूद बच्चों को ठंडा व ताजा पानी मयस्सर नहीं है। हाल के वर्षों में एकाध को छोड़ लगभग सभी विद्यालयों में बोरिंग के माध्यम से टंकी में पानी सप्लाई की जाती है। भीषण गर्मी में टैंक का पानी पीने के लायक भी नहीं रह जाता। कुछ विद्यालयों के शिक्षकों ने बताया कि बिजली नहीं रहने पर बोरिंग नहीं चलती। ऐसे वक्त पर बच्चों को वैकल्पिक तौर पर गांव और मोहल्ले में आसपास पानी की तलाश करनी पड़ती है। बिहिया : स्कूलों की प्यास बुझाने को सबमर्सिबल से जलापूर्ति बिहिया। निज संवाददाता प्रखंड के 120 सरकारी विद्यालयों में से लगभग 100 स्कूलों में सबमर्सिबल पंप स्थापित कर पाइप लाइन से जलापूर्ति सुनिश्चित की गई है। यह कदम न केवल बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करा रहा है, बल्कि भीषण गर्मी में स्कूलों के संचालन को भी सुगम बना रहा है। आमतौर पर अप्रैल-मई के महीनों में चापाकल सूखने की शिकायतें आम होती हैं, जिससे मिड डे मील से लेकर बच्चों के पीने के पानी तक का संकट खड़ा हो जाता है। लेकिन, बिहिया प्रखंड के 80% से अधिक विद्यालयों में समरसेबल होने से स्थिति नियंत्रण में है। स्थानीय प्रधानाध्यापक सर्वेश राम का कहना है कि फिलहाल पानी को लेकर हमारे यहाँ कोई परेशानी नहीं है। जहां सबमर्सिबल हैं, वहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। अभी चापाकल का जलस्तर फिलहाल साथ दे रहा है।

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