गर्मी में ‘पानी का इम्तिहान’,गर्म टंकी का पानी पीने को विवश छात्र
गर्मी के बीच सारण जिले के निजी और सरकारी स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था में अंतर दिखा है। निजी स्कूलों में बेहतर जल व्यवस्था है, जबकि सरकारी स्कूलों में कई जगह बच्चों को गर्म पानी पीना पड़ रहा है। छात्रों ने पानी की कमी की समस्या को उठाया है, जिससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।

निजी स्कूलों में राहत, सरकारी स्कूलों में सुधार के बावजूद कई जगह गर्म टंकी का पानी फोटो 5 : नवसृजित प्राथमिक विद्यालय विशुनपुरा अनुसूचित जाति टोला, अमनौर में पानी की टंकी से पाइप के जरिए लगाया गया नल, जिससे छात्रों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। पेज चार की लीड हिन्दुस्तान पड़ताल छपरा, हिन्दुस्तान संवाददाता। भीषण गर्मी के बीच सारण जिले के स्कूलों में बच्चों के लिए सबसे बड़ी जरूरत स्वच्छ व ठंडे पेयजल की बन गई है। तापमान 41 डिग्री के पार पहुंचते ही स्कूलों की जल व्यवस्था की असल तस्वीर सामने आने लगी है। जिले के विभिन्न सरकारी और निजी विद्यालयों की जमीनी पड़ताल में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखीं।
निजी स्कूलों में जहां पानी की व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर मिली, वहीं सरकारी स्कूलों में संसाधन बढ़ने के बावजूद कई जगह बच्चे अब भी परेशानी झेल रहे हैं। शहर और प्रखंड मुख्यालयों के अधिकतर निजी विद्यालयों में आरओ सिस्टम, वाटर कूलर, फिल्टर और अतिरिक्त पानी टंकी की व्यवस्था मिली। कई स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से ठंडा पानी दिया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन गर्मी को देखते हुए टंकी की सफाई और पानी भरने की निगरानी भी कर रहा है। हालांकि कुछ छोटे निजी विद्यालयों में सीमित संसाधनों के कारण सामान्य टंकी या चापाकल पर निर्भरता है, लेकिन पानी उपलब्ध है। वहीं सरकारी स्कूलों में स्थिति मिश्रित नजर आई। पिछले कुछ वर्षों में कई विद्यालयों में बोरिंग, मोटर और पानी टंकी की व्यवस्था की गई है। कई स्कूलों में आरओ सिस्टम भी लगाए गए हैं। परसा प्रखंड के रामावतार उच्च विद्यालय में छात्रों के लिए आरओ की सुविधा उपलब्ध है, जिससे बच्चों को स्वच्छ पानी मिल रहा है।लेकिन कई सरकारी स्कूलों में चापाकल नहीं है। वहां केवल सरकारी स्तर पर कराए गए बोरिंग और मोटर पर ही पूरा विद्यालय निर्भर है। बिजली कटते ही मोटर बंद हो जाता है और टंकी में बचा गर्म पानी ही छात्रों को पीना पड़ता है। तेज गर्मी में जब टंकी का पानी गर्म हो जाता है तो बच्चे बेचैन हो उठते हैं और बिजली आने का इंतजार करते हैं। मध्य विद्यालय मोलनापुर, के छात्र दीपक, प्राथमिक विद्यालय नगरा की छात्रा दीपिका, साहिल और मध्य विद्यालय बसौता में छात्रों ने बताया कि गर्मी के दिनों में पानी सबसे बड़ी परेशानी बन जाता है। मध्यांतर के समय पानी लेने के लिए लंबी कतार लग जाती है। प्राथमिक विद्यालय पहाड़पुर के छात्र राहुल, विनीत और रमेश ने कहा कि पानी भरने के दौरान काफी भीड़ हो जाती है। वहीं छात्राएं दिव्या व काजल ने बताया कि कई बार टंकी का पानी गर्म मिलता है, जिससे प्यास बुझाना मुश्किल हो जाता है। अमनौर प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय विशुनपुरा अनुसूचित जाति टोला के प्रधानाध्यापक निर्मल कुमार पाण्डेय ने बताया कि विद्यालय में सरकारी स्तर पर करीब चार सौ फीट नीचे बोरिंग कराया गया है, उसी का पानी बच्चों को दिया जाता है। अधिकांश छात्र-छात्राएं घर से पानी की बोतल लेकर आते हैं। कक्षा के दौरान बच्चों को बार-बार बाहर नहीं जाने दिया जाता, इसलिए वे बोतल में पानी लेकर ही बैठते हैं।पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई स्कूलों में टंकी के साथ चापाकल भी लगे हैं, जिससे बिजली नहीं रहने पर भी बच्चों को राहत मिल जाती है लेकिन जिन विद्यालयों में केवल मोटर आधारित व्यवस्था है, वहां गर्मी के दिनों में संकट ज्यादा गहरा जाता है। निजी विद्यालयों में पेयजल व्यवस्था सरकारी स्कूलों की तुलना में बेहतर दिखी। सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन रखरखाव, बिजली संकट और वैकल्पिक जल स्रोत की कमी अब भी बड़ी चुनौती है। स्थानीय लोगों का सुझाव है कि भीषण गर्मी के इस दौर में जरूरत है कि हर स्कूल में पानी की व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों को हर समय ठंडा और स्वच्छ पानी मिले। (छपरा से प्रवीण कुमार) साथ लगाएं छपरा सदर अस्पताल में मरीजों के अनुपात में पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था नहीं फोटो 3 छपरा सदर अस्पताल की ओपीडी बिल्डिंग में लगी आरओ मशीन के नीचे कचरा व बंद पड़ी मशीन छपरा, हमारे संवाददाता l जिले में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है वहीं छपरा सदर अस्पताल में मरीज के अनुपात में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को दोपहर 12:00 बजे सदर अस्पताल की ओपीडी व इमरजेंसी बिल्डिंग की पड़ताल की गयी। अस्पताल में प्रतिदिन 700 से 800 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें बड़ी संख्या सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी इलाकों से आने वाले लोगों की होती है। ओपीडी के बाहर रजिस्ट्रेशन काउंटर बनाए गए हैं जहां मरीजों की लंबी कतार लगती है। वही स्थिति दवा काउंटर की भी है लेकिन इन दोनों स्थानों पर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं की गई हैl जितनी संख्या में मरीज आते हैं, उस हिसाब से आरओ मशीनों की संख्या बेहद कम है। पुराने ओपीडी भवन हैं, जहां दो आरओ मशीनें लगाई गई हैं ताकि मरीजों को ठंडा पानी मिल सके लेकिन इनमें से एक मशीन बंद पड़ी है, जबकि दूसरी चालू होने के बावजूद उसके आसपास गंदगी फैली हुई है और फर्श पर पानी जमा रहता है, जिससे संक्रमण का खतरा भी बना रहता है। कोपा के रहने वाले मनोज कुमार बताते हैं कि इस पर अस्पताल को ध्यान देने की जरूरत हैl कटहरी बाग के शंकर कुमार का कहना है कि अभी रजिस्ट्रेशन काउंटर के बाहर पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। मातृ-शिशु अस्पताल के नए भवन में, जहां वर्तमान में इमरजेंसी सेवाएं संचालित हो रही हैं, वहां ग्राउंड फ्लोर से लेकर चौथी मंजिल तक आरओ मशीनें लगाई गई हैंl इधर अस्पताल के प्रबंधन से मरीजों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जब इतनी बड़ी संख्या में मरीज रोजाना अस्पताल पहुंचते हैं, तो बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखना अस्पताल प्रबंधक की जिम्मेदारी बनती है । भीषण गर्मी के इस दौर में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव न केवल मरीजों की परेशानी बढ़ा रहा है, बल्कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस समस्या को कितनी जल्दी गंभीरता से लेकर समाधान करता है। छपरा से शशि भूषण पांडे
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