कोरोना काल में मिले 4 वेंटिलेटर, अब तक नहीं हुए चालू
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आधी अधूरी तैयारी के साथ ईबोला जैसी गंभीर बीमारियों से निपटने की चल रही तैयारी सदर अस्पताल में 1 जून से चालू करने की हो रही व्यवस्था फोटो : सदर अस्पताल : सदर अस्पताल में रखा वेंटिलेटर। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। कोरोना महामारी के दौरान गंभीर मरीजों के उपचार को बेहतर बनाने के लिए नालंदा जिले को उपलब्ध कराए गए चार वेंटिलेटर वर्षों बाद भी चली नहीं हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि मशीनें अस्पतालों में मौजूद हैं, लेकिन अब तक उनका इंस्टॉलेशन तक नहीं हुआ है। मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई देशों में ईबोला जैसी घातक संक्रामक बीमारियों को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा रही है, जिले में जीवनरक्षक उपकरणों का निष्क्रिय पड़े रहना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्वास्थ्य कर्मियों की जानकारी
स्वास्थ्य कर्मियों की मानें तो कोरोना काल में केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से नालंदा जिले को चार अत्याधुनिक वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इनमें से एक वेंटिलेटर सदर अस्पताल, एक राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल तथा एक कल्याणबीघा अस्पताल को दिया गया था। शेष एक वेंटिलेटर भी जिले के स्वास्थ्य संस्थान में रखा गया है। हालांकि वर्षों बीत जाने के बावजूद किसी भी मशीन का इंस्टॉलेशन नहीं कराया जा सका है, जिसके कारण ये उपकरण अब तक उपयोग से बाहर हैं। वेंटिलेटर गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण माना जाता है। सांस लेने में परेशानी, फेफड़ों के संक्रमण, गंभीर निमोनिया, कोविड-19, ईबोला जैसे वायरल संक्रमण तथा अन्य आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को कृत्रिम श्वसन सहायता देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उपकरणों का समय पर संचालन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है।
राजगीर और कल्याणबीघा अस्पताल की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में प्रतिवर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वहां के अनुमंडलीय अस्पताल को भी एक वेंटिलेटर उपलब्ध कराया गया था, ताकि किसी भी आपात स्थिति में गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके। वहीं कल्याणबीघा अस्पताल को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से मशीन उपलब्ध कराई गई थी। लेकिन इंस्टॉलेशन नहीं होने से दोनों अस्पतालों में यह सुविधा केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
सदर अस्पताल का बयान
इस संबंध में सदर अस्पताल के उपाधीक्षक (डीएस) डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि वेंटिलेटर के इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि 1 जून से सदर अस्पताल में मरीजों को वेंटिलेटर सुविधा मिलने लगेगी। इसके लिए आवश्यक तकनीकी और अन्य व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मशीन चालू होने के बाद गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा। महामारी या किसी भी बड़े संक्रमण के दौरान वेंटिलेटर जैसी जीवनरक्षक सुविधाएं अस्पतालों की सबसे महत्वपूर्ण जरूरत होती हैं। ऐसे में वर्षों तक मशीनों का निष्क्रिय रहना स्वास्थ्य संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 1 जून से वेंटिलेटर सेवा वास्तव में शुरू हो पाती है या नहीं और जिले के अन्य अस्पतालों में रखी मशीनों को कब तक चालू किया जाता है।
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