विशेषज्ञ और सहायक के अभाव में कमरे में बंद हैं छह वेंटिलेटर
कोरोना काल में कैमूर जिले में छह वेंटिलेटर सदर अस्पताल के एक कमरे में बंद हैं। विशेषज्ञों की अनुपस्थिति के कारण इनका उपयोग नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि वेंटिलेटर को संचालित करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञ नहीं हैं। इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए आइसोलेशन वार्ड भी तैयार किया गया है।

गहन चिकित्सा विशेषज्ञ, श्वसन चिकित्सक, गहन देखभाल नर्स और निश्चेतक के अभाव में नहीं हो रहा वेंटिलेटर का उपयोग बोले सीएस- सभी वेंटिलेटर ठीक और सुरक्षित हैं, विशेषज्ञ मिलने पर उपयोग होगा इबोला वायरस के खतरे को ले स्वास्थ्य महकमा अलर्ट, आइसुलेशन वार्ड तैयार (पटना का टास्क) भभुआ, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। कोरोना काल में कैमूर जिले को उपलब्ध कराए गए छह वेंटिलेटर सदर अस्पताल के एक कमरे में बंद हैं। इनका उपयोग कोरोना काल में अंतिम समय में तब शुरू किया गया, जब इसे संचालित करने के लिए पटना से विशेषज्ञ भेजे गए। कोविड का प्रभाव खत्म होने के बाद विशेषज्ञ लौट गए और वेंटिलेटर मशीन को एक कमरे में सुरक्षित रख दिया गया। मशीन ठीक रहने के बाद भी अनुपयोगी बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग के जानकार बताते हैं कि वेंटिलेटर को संचालित करने के लिए क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों (गहन चिकित्सा विशेषज्ञ), प्रशिक्षित रेस्पिरेटरी थेरेपिस्ट (श्वसन चिकित्सक), क्रिटिकल केयर नर्सें (गहन देखभाल नर्स), एनेस्थेसियोलॉजिस्ट (निश्चेतक) का होना जरूरी है। लेकिन, सदर अस्पताल में न विशेषज्ञ हैं और न सहायक। ऐसे में वेंटिलेटर मशीन बेकार पड़ी हुई है। हालांकि जिला स्वास्थ्य समिति के सचिव का कहना है कि इसके लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। बताया गया है कि अस्पताल में वेंटिलेटर का संचालन और प्रबंधन मुख्य रूप से क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों (इंटेंसिविस्ट) और विशेष रूप से प्रशिक्षित रेस्पिरेटरी थेरेपिस्ट द्वारा किया जाता है। इनके अलावा क्रिटिकल केयर नर्सें और एनेस्थेसियोलॉजिस्ट भी मरीजों की निगरानी और मशीन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वेंटिलेटर की कार्यप्रणाली
वेंटिलेटर एक बेहद संवेदनशील जीवन रक्षक मशीन है, जिसका संचालन टीम द्वारा किया जाता है। डॉ. सचिन कुमार बताते हैं कि यह मशीन मरीज के फेफड़ों को आराम देती है और शरीर के अन्य अंगों (जैसे मस्तिष्क और हृदय) को पर्याप्त ऑक्सीजन प्रदान करती है, जिससे मरीज बीमारी से लड़ने और ठीक होने में सक्षम होते हैं। जब शरीर के अंग ऑक्सीजन की कमी से खराब होने लगते हैं, तब यह मशीन स्वस्थ बनाने में मदद करती है।
वेंटिलेटर का उपयोग
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि वेंटिलेटर एक जीवन रक्षक मशीन है, जो फेफड़ों को ऑक्सीजन पहुंचाने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने में मदद करती है। इसका उपयोग गंभीर अस्थमा, निमोनिया, ब्रेन इंजरी, हार्ट फेल्योर, कोविड-19 या किसी बड़ी सर्जरी के बाद उन मरीजों के लिए किया जाता है जो खुद से सांस लेने में असमर्थ होते हैं। इन बीमारी के इलाज में करती है मदद वेंटिलेटर मशीन गंभीर श्वसन संक्रमण, निमोनिया या सीओपीडी से पीड़ित मरीजों, फेफड़ों की गंभीर चोट या बीमारी, दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक या गंभीर चोट, गंभीर रूप से प्रभावित अंग, विषैले गैस या ओवरडोज दवा अथवा जहर खाने वाले मरीज के इलाज में मदद करती है।
विशेषज्ञों की भूमिका
राकेश सिन्हा बताते हैं कि वेंटिलेटर के अभाव में गंभीर मरीजों को सदर अस्पताल से रेफर किया जाता है। अगर इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ व सहायक होते, तो ऐसी नौबत नहीं आती। सभी की अलग-अलग जिम्मेदारी क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ वेंटिलेटर की सेटिंग तय करते हैं और मरीज की चिकित्सा रणनीति का नेतृत्व करते हैं। रेस्पिरेटरी थेरेपिस्ट वेंटिलेटर मशीन के दैनिक संचालन, सेटिंग को एडजस्ट करने और मरीज के एयर-वे (सांस नली) के रखरखाव में विशेषज्ञ होते हैं। क्रिटिकल केयर नर्स मशीन के मापदंडों (जैसे ऑक्सीजन स्तर और ब्लड प्रेशर) की 24 घंटे निगरानी करती हैं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत डॉक्टर को सूचित करती हैं। एनेस्थेसियोलॉजिस्ट सर्जरी के दौरान या प्रक्रिया के लिए मरीजों को एनेस्थीसिया देने के बाद वेंटिलेटर की निगरानी इन्हीं के द्वारा की जाती है।
वेंटिलेटर की स्थिति
कोट कोरोना काल में सदर अस्पताल को छह वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। सभी ठीक हैं। विशेषज्ञ व सहायक के अभाव में इसका संचालन नहीं किया जा रहा है। इनकी नियुक्ति के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा गया है। इबोला के संभावित खतरे को देखते हुए 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। डॉ. चंदेश्वरी रजक, सिविल सर्जन (भभुआ से उदय प्रकाश) फोटो- 27 मई भभुआ- 3 कैप्शन- इबोला वायरस से पीड़ितों को इलाज करने के लिए भभुआ सदर अस्पताल के इमरजेंसी में स्थापित आइसोलेशन वार्ड। (सिंगल फोटो)
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