Bihar Flood: कटाव ने छिना घर अब बाढ़ से तबाही, तंबू-टेंट में गुजारा; बिहार के भोजपुर में 289 स्कूल बंद
Bihar Flood: सबसे ज्यादा तबाही झेल रहे जवईनिया गांव के लोगों के लिए प्रशासन ने लगभग पांच किलोमीटर में तटबंध पर टेंट, पंडाल और तिरपाल लगाया है। एक-एक कर गांव के वार्ड चार और पांच के लगभग सभी घर, मंदिर, पेड़, पानी टंकी गंगा के गर्भ में समा गए हैं।
Bihar Flood: बिहार के अलग-अलग जिलों में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड का दामोदरपुर तटबंध। यहां शरण लिए गणेश पांडेय और राम अवतार यादव के घर गंगा में विलीन हो गये हैं। इनके जैसे सैकड़ों विस्थापित हैं, जो कटाव के बाद बाढ़ से घिर जाने पर परिवार के साथ टेंट या तिरपाल के नीचे गुजारा कर रहे हैं। पहले कटाव में घर-बार उजड़ा। अब बाढ़ से तबाही। चारों तरफ पानी ही पानी। यह हाल है जिले के शाहपुर के दियारांचल के जवईनिया गांव का। पिछले साल यहां के 59 घर गंगा में समा गये। इस साल यह गांव इतिहास बनने की कगार पर है।
वैसे तो जिले के बड़हरा और शाहपुर के दियारा इलाके के अधिकतर गांव बाढ़ से तबाह हैं पर बड़हरा की ख्वासपुर पंचायत के 16 गांव के करीब एक लाख लोगों को साल में छह माह तक प्रखंड मुख्यालय बड़हरा और जिला मुख्यालय आरा आने के लिए नाव ही एकमात्र साधन है। गंगा पार इस पंचायत की करीब डेढ़ लाख की आबादी हर साल यह पीड़ा झेलती है। इनके अलावा आरा सदर, कोईलवर, बिहिया की कुछ तटवर्ती पंचायतें भी दियारा में होने के चलते बाढ़ की त्रासदी झेल रही हैं। बाढ़ से घिरे लोगों के बीच जिला प्रशासन की ओर से आवागमन के लिए नि:शुल्क नाव की व्यवस्था है।
एसडीआरएफ के साथ राहत व बचाव दल लगाये गये हैं। सबसे ज्यादा तबाही झेल रहे जवईनिया गांव के लोगों के लिए प्रशासन ने लगभग पांच किलोमीटर में तटबंध पर टेंट, पंडाल और तिरपाल लगाया है। एक-एक कर गांव के वार्ड चार और पांच के लगभग सभी घर, मंदिर, पेड़, पानी टंकी गंगा के गर्भ में समा गये हैं। इस इलाके के बच्चों के लिए बनाये गये प्लस टू स्कूल के उपस्कर अन्य जगह शिफ्ट कर दिये गये हैं। महिलाएं, बच्चे और शरीर से लाचार वृद्ध मवेशियों के साथ जैसे-तैसे शिविर में गुजारा कर रहे हैं। मेडिकल टीम लगी हुई है।
कोई बिहिया चौरास्ता गया तो किसी ने बक्सर-ब्रह्मपुर में ली शरण
लगभग 25 सौ की आबादी वाले जवईनियां गांव के प्रभावित और विस्थापित होने वाले परिवारों में सबसे अधिक बिंद, मल्लाह और यादव जाति के लोग हैं। कुछ ब्राह्मण परिवार भी विस्थापित हैं। इनमें कुछ बिहिया चौरास्ता तो कोई बक्सर-ब्रह्मपुर में अपने रिश्तेदारों और संबंधियों के यहां परिवार के साथ शरण लेकर किसी तरह अपनी जिंदगी काट रहे हैं। बीते साल कटाव में 59 परिवारों का घर विलीन हुआ था। इस साल वार्ड चार और पांच के गंगा में समाये घरों की संख्या 150 तक पहुंच गई है। अब एक-दो घर ही इस वार्ड में बचे हैं।
भोजपुर जिले के 289 स्कूल 13 तक बंद
भोजपुर जिले के दियारा समेत बाढ़ प्रभावित प्रखंडों के कुल 289 स्कूल आगामी 13 अगस्त तक पूर्णत: बंद कर दिये गये हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई भी पूरी तरह बाधित हो गई है।
पति परदेस में और पत्नी दुधमुंहे बच्चे संग टेंट में
महज दो साल पहले जवईनिया गांव में धर्मेन्द्र बिंद के साथ काजल की शादी धूमधाम से हुई थी। तब गांव में धर्मेन्द्र का अपना घर था। लेकिन, कौन जानता था कि दो साल बाद ही काजल और उसके पति धर्मेन्द्र बेघर हो जायेंगे। काजल आंखों में आंसू लिये चार माह के बेटे को अपने कंधे पर सुला रही थी। रो-रोकर बोली- घर नहीं रहा तो अब टेंट में ही चार माह के बेटे को लेकर रह गुजारा कर रही है। पति धर्मेन्द्र परदेस में रहकर मजदूरी कर रहे हैं।




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