Surge in Passengers at Ganga Ghats Post Vikramshila Bridge Collapse ओवरलोड नाव से सफर में आपाधापी, धूप में घाटों पर नौका का इंतजार, Bhagalpur Hindi News - Hindustan
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ओवरलोड नाव से सफर में आपाधापी, धूप में घाटों पर नौका का इंतजार

फोटो :: पांच जगह पांच रिपोर्टर भागलपुर, हिन्दुस्तान टीम। विक्रमशिला सेतु

Thu, 7 May 2026 11:56 PMNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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ओवरलोड नाव से सफर में आपाधापी, धूप में घाटों पर नौका का इंतजार

भागलपुर, हिन्दुस्तान टीम। विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद जिले में गंगा के पांच घाटों पर अचानक यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। नौकाओं में पैर रखने की जगह नहीं है, फिर भी नाव पर चढ़ने की दिनभर मारामारी होती रहती है। नवगछिया आने-जाने के लिए बाबूपुर, बरारी, जाह्नवी, तीनटंगा एवं कहलगांव से नाव सेवा पिछले चार दिनों से जारी है। प्रतिदिन करीब 50-60 हजार लोग विभिन्न नावों और स्टीमर से आर-पार हो रहे हैं। कटिहार-पूर्णिया जाने वाले कहलगांव से तीनटंगा के बीच चल रहे नावों के सहारे आर-पार हो रहे हैं तो खगड़िया व कोसी प्रमंडल के सहरसा, मधेपुरा, सुपौल आदि जिलों की ओर जाने वाले लोग सुल्तानगंज में नाव से आरपार हो रहे हैं। ओवरलोडिंग पर रोक के लिए डीएम स्वयं गुरुवार को कई नाविकों को चेताया तो हालात कुछ सुधरे। पढ़िए हिन्दुस्तान के पांच रिपोर्टरों की पड़ताल

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कहलगांव घाट

समय : 01.15 बजे

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विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद कहलगांव-तीनटंगा फेरी घाट गंगा पार करने का सबसे नजदीकी और प्रमुख विकल्प बन गया है। इसके कारण घाट पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सीमित संख्या में नावों के संचालन और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में लोगों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। नावों और स्टीमर पर चढ़ने-उतरने के दौरान यात्रियों के बीच आपाधापी का माहौल है। किला दुर्गा स्थान मोहल्ले की वृद्ध महिला पार्वती देवी ने बताया कि नवगछिया से लौटने के दौरान नाव पर चढ़ने और उतरने में काफी परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि परिजनों और अन्य यात्रियों की मदद से किसी तरह स्टीमर पर चढ़ और उतर पाई। वहीं गुरुथान कदवा निवासी सुरेश मंडल ने बताया कि वे अपनी बेटी के यहां पक्कीसराय आए थे और अब वापस घर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद इस पार और उस पार की दूरी काफी बढ़ गई है। अब सच मायने में गंगा पार करना पड़ रहा है। घाट पर सुरक्षा व्यवस्था भी नाकाफी दिखी। यहां केवल दो-तीन पुलिसकर्मी प्रतिनियुक्त नजर आए, जबकि कहीं भी दंडाधिकारी मौजूद नहीं थे। भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं रहने से लोगों में असुरक्षा की भावना बनी हुई है। लोगों का कहना है कि गंगा पार करना अब केवल सफर नहीं, बल्कि रोज का संघर्ष बन गया है। इन कठिन परिस्थितियों के बीच भी जीवन अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। कोई रोजगार की तलाश में सफर कर रहा है तो कोई पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए गंगा पार करने को मजबूर है।

बरारी पुल घाट

समय : 12.25 बजे

गुरुवार को बरारी पुल घाट से नवगछिया के जाह्नवी चौक घाट व महादेवपुर घाट के बीच 40 से अधिक नाव की सहायता से हजारों लोगों ने यात्रा की। बरारी घाट से खुलने वाले हर नाव पर यात्रियों की काफी भीड़ दिखी। अधिक पैसे कमाने के चक्कर में नाव चालकों ने कई बार नाव पर क्षमता से अधिक यात्रियों व वाहनों को चढ़ाने की कोशिश की। ओवर लोडिंग से बचने के लिए पुलिस ने नाव चालकों का लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी भी दी। जिससे नाविकों ने कई यात्रियों को उतार दिया। घाट से शहर आने वाले यात्रियों से ई-रिक्शा और ऑटो चालकों का मनमाना किराया वसूल करना जारी रहा।

तीनटंगा जहाज घाट

समय : 01.35 बजे

तीनटंगा जहाज घाट पर यात्रियों की भीड़ है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। नाव पर भीड़ को रोकने के उचित प्रबंध नहीं है। स्थानीय ग्रामीण निर्मल कुमार यादव, मनोज रविदास सहित अन्य लोगों ने बताया कि यहां यात्री शेड, चापाकल, महिला शौचालय और बैठने की व्यवस्था नहीं है। तेज धूप और गर्मी में यात्रियों को खुले आसमान के नीचे घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। यात्री शिल्पा देवी ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों के साथ नाव यात्रा करना काफी कठिन हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। शादी के बाद पहली बार ससुराल जानेवाली दुल्हन रूबी देवी ने नाव से उतरने के बाद तपती धूप में बालू से होकर चचरी के रास्ते जाने पर कहा, भगवान को यही पसंद था तभी तो शादी के कुछ दिन पहले ही पुल टूट गया।

बाबूपुर घाट

समय : 11.35 बजे

सबौर स्थित बाबूपुर घाट पर यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए चिकित्सा शिविर एवं एंबुलेंस सहित सुरक्षाकर्मियों और आपदा मित्रों की तैनाती की गई है। घाट से वर्तमान में पांच नावों के परिचालन की अनुमति दी गई है, जिनमें दो नि:शुल्क और तीन निजी नावें शामिल हैं। यह घाट महादेवपुर के साथ-साथ रजंदीपुर, बिनोबा और बसघड़ा जैसे क्षेत्रों को जोड़ता है। दंडाधिकारी संजीव कुमार पाल ने बताया कि सुबह के समय यहां शिक्षकों और किसानों की काफी भीड़ रहती है। कई शिक्षक ट्रेन से सबौर पहुंचकर इसी घाट से दियारा क्षेत्र के स्कूलों में जाते हैं। शाम को किसानों की आवाजाही अधिक रहती है। नाव पर ओवरलोडिंग रोकने की व्यवस्था की जा रही है।

सुल्तानगंज घाट

समय : 2 बजे

नाव पर क्षमता के अनुरूप यात्रियों और बाइक को चढ़ाया-उतारा गया। राजस्व अधिकारी शालिनी कुमारी जहाज घाट पर तैनात होकर खुद नाव खुलवा रही थीं। खगड़िया की ओर से अगुवानी घाट पर भी दंडाधिकारी निर्धारित यात्री को बिठाकर नाव खुलवा रहे थे। सुल्तानगंज की ओर से जाने वाले यात्री की भी गिनती की गई। यहां सुबह-शाम यात्रियों की भीड़ अधिक होती है। दो नाव अभी संचालित है। यात्री सुरक्षित जेट्टी के माध्यम से चढ़-उतर रहे हैं। नाव पर क्षमता से कम सवारी चढ़ाए जाने को लेकर कुछ लोग क्षुब्ध भी दिखे। लेकिन दंडाधिकारी ने सुरक्षा का हवाला देकर कम संख्या में यात्रियों को सफर करने की हिदायत दी।

कोट

नाव पर ओवरलोडिंग रोकने के लिए दंडाधिकारी और पुलिस की तैनाती की गई है। जांच में नाविकों पर सख्ती की गई है। यात्री भी लोडेड नाव पर सफर करने से बचें।

- कुंदन कुमार, एडीएम (आपदा प्रबंधन)।

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