Political Empowerment of Women Babita Kashyap Criticizes Delay in Nari Shakti Vandan Bill कटिहार: नारी शक्ति वंदन विधेयक पर राजनीति तेज:पारित न होना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण, Bhagalpur Hindi News - Hindustan
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कटिहार: नारी शक्ति वंदन विधेयक पर राजनीति तेज:पारित न होना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण

बरारी की भाजपा नेत्री बबीता कुमारी कश्यप ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित न होने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया और विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उनके नकारात्मक रवैये के कारण यह विधेयक नहीं पास हो रहा है। उन्होंने महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

Tue, 21 April 2026 06:07 PMNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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कटिहार: नारी शक्ति वंदन विधेयक पर राजनीति तेज:पारित न होना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण

बरारी से दिलीप मिश्रा बरारी की मुख्य पार्षद सह भाजपा नेत्री एवं लोकसभा प्रभारी बबीता कुमारी कश्यप ने महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण से जुड़े प्रस्तावित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित नहीं होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।उन्होंने इसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।पटना में भाजपा द्वारा इस विधेयक के समर्थन में आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के बाद बरारी पहुंची बबीता कश्यप ने कहा कि यह केवल एक विधेयक का रुकना नहीं है।बल्कि देश की आधी आबादी की उम्मीदों पर पानी फिरने जैसा है।उन्होंने आरोप लगाया कि इस महत्वपूर्ण विधेयक के पारित नहीं होने के पीछे विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस और अन्य दलों का नकारात्मक रवैया प्रमुख कारण रहा है।बबीता

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कश्यप ने कहा कि जहां एक ओर देश महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक दल अपने संकीर्ण स्वार्थों के कारण इस ऐतिहासिक पहल में बाधा बन रहे हैं।उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा बार बार अनावश्यक शर्तें रखना बहाने बनाना और राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप करना इस विधेयक के रास्ते में लगातार बाधक बना रहा।अगर इन दलों ने सकारात्मक सोच और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी होती तो आज यह विधेयक कानून बन चुका होता।और देश की महिलाओं को उनका अधिकार मिल गया होता।बबीता कुमारी कश्यप ने सवाल उठाते हुए कहा है कि जब पंचायत और स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सफलता पूर्वक लागू हो चुका है।तो फिर संसद और विधानसभाओं में इसे लागू करने में इतनी अड़चनें क्यों आ रही है।उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है।कि कुछ राजनीतिक दल महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर गंभीर नहीं है।और केवल दिखावटी राजनीति कर रहे हैं।उन्होंने अंत में कहा कि महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना समय की मांग है।और इसके लिए इस तरह के विधेयकों का पारित होना बेहद जरूरी है।देश की आधी आबादी को उनका हक देने में किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।नारी शक्ति वंदन विधेयक को लेकर सियासत तेज हो गई है।जहां एक ओर सत्ता पक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है।वहीं विपक्ष की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है।

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