विक्रमशिला सेतु के टूटे स्लैब पर बेली ब्रिज का फ्रेम इंस्टाल, कब से चालू होगा पुल; जानिए
जल्द ही दोनों ओर ट्रस ब्रिज बनाकर पैदल यात्रियों के लिए अलग रास्ता बनाया जाएगा। इसे सेना की इकाई बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने तैयार किया है। बता दें कि भागलपुर के डीएम ने पांच जून से पहले बेली ब्रिज को चालू कराने का वादा किया है।

बिहार के भागलपुर जिले में विक्रमशिला सेतु के टूटे स्लैब पर बेली ब्रिज का फ्रेम इंस्टाल किया गया है। इससे दो हिस्से में बंटे पुल का हिस्सा दोबारा जुट गया है। सिंगल लेन के लिए बनाए गए इस ब्रिज पर अब लोहे की शीट लगाई जाएगी। ताकि आवागमन में सुविधा हो। जल्द ही दोनों ओर ट्रस ब्रिज बनाकर पैदल यात्रियों के लिए अलग रास्ता बनाया जाएगा। इसे सेना की इकाई बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने तैयार किया है। बता दें कि भागलपुर के डीएम ने पांच जून से पहले बेली ब्रिज को चालू कराने का वादा किया है।
बीआरओ के विशेषज्ञों ने बताया कि तैयार किया जा रहा बेली ब्रिज करीब 49 मीटर लंबा और पांच मीटर चौड़ा है। इस ब्रिज का कुल वजन लगभग 100 टन से अधिक होगा। कोलकाता से 12 ट्रकों से ब्रिज का पूरा सामान भागलपुर पहुंचा है। ब्रिज का ढांचा तैयार होने के बाद उस पर अलकतरा और गिट्टी का मिश्रण (कालीकरण) बिछाया जाएगा। इसके बाद पुल पर वाहनों को चलाकर उसकी लोड क्षमता की जांच की जाएगी।
सोमवार को पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल और भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त प्रेम सिंह मीणा ने भी सेतु निर्माण का निरीक्षण किया था और जल्द से जल्द सुविधा बहाल करने का अनुरोध सैन्य अधिकारियों से किया था। भागलपुर के जिला पदाधिकारी ने दावा किया है कि पांच जून से पहले विक्रमशिला सेतु पर मुस्तैदी के साथ छोटी गाड़ियों का परिचालन शुरू हो जाएगा। सात दिन के अंदर पहले बेली ब्रिज की लांचिंग हो जाएगी। यह ब्रिज उन दो पिलरों के बीच का हिस्सा बनेगा, जिसका स्लैब टूटकर नदी में गिर गया था। शेष दोनों बेली ब्रिज का निर्माण भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल नवगछिया एसपी और पुल निगम के पदाधिकारियों के साथ स्टीमर से गंगा पार होकर बरारी घाट पहुंचे और कड़ी सुरक्षा में सेतु पर गए। उन्होंने सेतु पर उस टूटे हिस्से को देखा, जहां बेली ब्रिज का निर्माण हो रहा है। करीब पांच मिनट वे वहां रहे और सेना की इकाई बीआरओ के तकनीशियनों से बातचीत की। बीआरओ के लोगों ने बताया कि सप्ताह से 10 दिन में बेली ब्रिज इंस्टॉल कर दिया जाएगा।
ट्रस ब्रिज यह ऐसा पुल होता है जिसका मुख्य ढांचा (सुपर स्ट्रक्चर) धातु या लकड़ी के आपस में जुड़े हुए त्रिकोणों की एक शृंखला से बना होता है। इन त्रिकोणीय आकृतियों को ‘ट्रस’ कहा जाता है। त्रिकोण आकार की मजबूती के कारण यह पुल भारों को आसानी से सहने और दूर तक फैलाने में सक्षम होता है। पुल पर पड़ने वाला वजन तिरछे और सीधे हिस्सों में खिंचाव और दबाव के रूप में बंट जाता है। इसके बनने से पैदल यात्रियों को काफी राहत मिल सकती है।
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