अच्छे व्यवहार से खुश होकर सुल्तानगंज के मतदाताओं ने गुड्डू को बनाया सभापति
सुल्तानगंज जाने माने मिठाई कारोबारी स्वर्गीय बच्चू साह के बेटे ने राजनीति में बनाई अपनी

भागलपुर, वरीय संवाददाता। सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में घुसकर सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू व कार्यपालक अभियंता कृष्ण भूषण कुमार पर हुए जानलेवा हमले से पूरे सुल्तानगंज में खौफ का माहौल है। वहीं जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हरदिल अजीज गुड्डू के बुरी तरह घायल होने की सूचना पाकर काफी दुखी हैं। साथ ही इनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। राजकुमार गुड्डू के अच्छे व्यवहार व स्वच्छ छवि के कारण शहर के लोगों ने उन्हें दिसंबर 2022 में आयोजित नगर निकाय चुनाव में वोट देकर सभापति के पद पर आसीन किया। जनवरी 2023 में शपथ ग्रहण के बाद शहर के विकास कार्यों को गति देने का काम शुरू किया।
राजनीति में आने से पहले गुड्डू अपने दिवंगत पिता बच्चू साह की मिठाई की दुकान संचालित करते थे।मुरारका कॉलेज से स्नातक धारक गुड्डू की समाज में काफी अच्छी छवि थी। इलाके का सबसे चर्चित मिठाई की दुकान पर हर समय लोगों की भीड़ लगी रहती थी। दुकान पर आने वाले हर ग्राहक से काफी सम्मान के साथ पेश आते थे। उनके इस अच्छे व्यवहार से पूरा शहर परिचित था। इसका लाभ उन्हें नगर निकाय चुनाव में मिला। पहली बार राजनीति में आने के साथ ही वह नगर परिषद सुल्तानगंज के सभापति पद पर आसीन हो गए। उनके कार्यकाल में सुल्तानगंज शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण, हर घर नल का जल समेत अन्य श्रावणी मेला का बेहतर आयोजन हुआ। उन्होंने ही सुल्तानगंज का नाम बदलकर अजगैवीनाथ धाम का प्रस्ताव पारित कर सरकार के पास अनुशंसा के लिए भेजा था। उनके सभापति बनने पर आमलोगों ने एक स्वर में कहा था कि कई वर्ष बाद सुल्तानगंज में साफ सुथरी छवि का नेतृत्व मिला है।सामान्य पृष्ठभूमि के गुड्डू की ताजपोशी से दबंगों को मिली चुनौतीसामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले राजकुमार गुड्डू की सभापति पद पर ताजपोशी होना दबंगों को नागवार गुजरा। भाजपा में शामिल हुए राजकुमार गुड्डू ने चार दिन पहले अपने फेसबुक पोस्ट पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ अपनी फोटो पोस्ट की थी। सभापति पद पर सक्रिय रहने के बावजूद वह भाजपा के विभिन्न कार्यक्रम में नियमित भागीदारी करते रहे। नगर परिषद में सक्रिय रहने वाले जनप्रतिनिधियों की माने तो नगर परिषद के सरकारी फंड में लूट खसोट का मौका हाथ से गंवाने के कारण गुड्डू दबंगों के निशाने पर आ गए थे। खासकर श्रावणी मेला के दौरान होने वाले अंधाधुंध सरकारी खर्च में हिस्सा नहीं मिलना भी इस हादसे का कारण हो सकता है।आपराधिक वारदातों से सुल्तानगंज का कारोबार हुआ चौपटश्रावणी मेला को लेकर देश-दुनिया में विख्यात सुल्तानगंज कभी व्यापार का मुख्य केंद्र था। पुराने लोगों की माने तो कभी भागलपुर से ज्यादा व्यापार सुल्तानगंज से होता था। यहां पर अनाज, खाद्य तेल, कपड़े व अन्य कृषि उत्पाद का बड़ा बाजार था। यहां पर कई मिलों का संचालन किया जाता था। नाव के माध्यम से कोसी क्षेत्र से अनाज की आवक होती थी। जो रेलवे के माध्यम से बिहार व देश के अन्य हिस्से में निर्यात किए जाते थे। 90 के दशक तक यहां पर मारवाड़ी व देशवाली समाज के कई व्यापारिक प्रतिष्ठान थे। लेकिन अपराधियों की फिरौती व अवैध वसूली को लेकर कई कारोबारियों की हत्या कर दी गई। असुरक्षा के भय से कारोबारियों का समूह धीरे-धीरे यहां से पलायन कर गया। इसके साथ ही सुल्तानगंज का कारोबार चौपट हो गया। इस दौरान सुल्तानगंज अपराधियों का अड्डा बन गया।
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