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भारत को छोड़ तोड़ अमेरिका से मक्का खरीद रहा बांग्लादेश, कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार के किसान परेशान

सप्लायर कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि उनके दोनों गोदाम में मक्का भरा पड़ा है l व्यापारियों का कहना है कि इथेनॉल तैयार करने में मक्का का अधिक उपयोग किया जाए तो यह समस्या नहीं रहेगी l मक्के का उपयोग इथेनॉल तैयार करने में कंपनी कर ही नहीं रही है l

Wed, 11 March 2026 10:11 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान, भागलपुर/कटिहार
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भारत को छोड़ तोड़ अमेरिका से मक्का खरीद रहा बांग्लादेश, कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार के किसान परेशान

पड़ोसी देश बांग्लादेश ने भारत से खराब हुए रिश्ते को देखते हुए अब अमेरिका से मक्के की खरीद शुरू की है। इससे बिहार खासकर कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार के उत्तरी इलाके में भरपूर उपजने वाले मक्के का भाव औंधे मुंह गिर गया है। मक्का किसानों को लागत की कीमत नहीं निकल रही है। हाल यह कि 1400 रुपये प्रति क्विंटल बाजार भाव में भी मक्का के खरीदार नहीं मिल रहे हैं। अप्रैल में रबी सीजन का मक्का बाजार में आने पर कीमत और गिरने की संभावना से किसान सशंकित हैं।

व्यापारियों का कहना है कि बांग्लादेश में हाल में हुए चुनाव के पूर्व तक कम ही सही, लेकिन मक्का की आपूर्ति होती थी। बांग्लादेश में चुनाव खत्म होने के बाद मक्का की आपूर्ति पूरी तरह बंद है। मक्का के बड़े सप्लायर संतोष भगत बताते हैं कि हाल के दिनों में बांग्लादेश में अमेरिका अपना मक्का भेज रहा है। इस कारण पड़ोसी देश में भारतीय मक्के की डिमांड नहीं के बराबर रह गई है।

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सप्लायर कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि उनके दोनों गोदाम में मक्का भरा पड़ा है l व्यापारियों का कहना है कि इथेनॉल तैयार करने में मक्का का अधिक उपयोग किया जाए तो यह समस्या नहीं रहेगी l मक्के का उपयोग इथेनॉल तैयार करने में कंपनी कर ही नहीं रही है l इससे गोदाम में रखे मक्का की खपत नहीं हो पा रही है। मक्का व्यापारी संतोष भगत ने बताया कि व्यापारियों से इथेनॉल कंपनी मक्का नहीं ले रही है।

कुछ माह पूर्व तक बांग्लादेश के बाजारों में मक्का भेजा गया था। वहां चुनाव होने के कारण बॉर्डर पर पिछले कुछ दिनों से मक्का लदा वाहन कई दिनों तक खड़ा रहा। किसान राजेश चौधरी, अक्षय लाल चौधरी ने बताया कि पिछले वर्ष जनवरी माह तक मक्का की कीमत ठीक थी। भाव कम होने के कारण खरीद दाम में भी व्यापारी बेच नहीं पा रहे हैं।

कटिहार में उपज का ब्योरा (रकबा हेक्टेयर व उत्पादन क्विंटल ,अनुमानित)

साल - रकबा - उत्पादन

2021 - 85 हजार - 76.50 लाख

2022 - 88 हजार - 80 लाख

2023 - 90 हजार - 80.10 लाख

2024 - 90 हजार - 82.80 लाख

2025 - 91 हजार - 86.45 लाख

पूर्णिया में इथेनॉल प्लांट के निदेशक विशेष वर्मा ने कहा कि इथेनॉल प्लांट किसानों से मक्का लेती है। प्लांट का दो सायलो गोदाम है। दोनों गोदाम भरा है। इस कारण किसानों से मक्का नहीं लिया जा रहा है l भंडारित मक्का की खपत होने के बाद ही नए सिरे से मक्का की खरीद की जाएगी।

इथेनॉल प्लांट पर बंदी का मंडरा रहा खतरा

केन्द्र सरकार की नई इथेनॉल नीति के तहत बिहार में तेल कंपनियों की ओर से इथेनॉल खरीद को 100 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिए जाने से पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड के गणेशपुर पंचायत अंतर्गत घरारी गांव स्थित इथेनॉल प्लांट इन दिनों गंभीर संकट का सामना करने लगा है। मक्का और चावल से इथेनॉल बनाया जा रहा है। विडम्बना है कि 100 फीसदी उत्पादन में महज 40 फीसदी ही निर्यात हो रहा है और शेष 60 फीसदी लिक्विड प्लांट में रह जाता है जिससे आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

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