फारबिसगंज के कारोबारियों और यात्रियों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
फारबिसगंज में विक्रमशिला पुल ध्वस्त होने के बाद व्यापार और श्रद्धालुओं पर असर पड़ा है। पुल के बंद होने से माल ढुलाई में देरी और लागत बढ़ने की आशंका है। किराना और खाद्य सामग्री की कीमतों में वृद्धि हो सकती है। यात्रियों को भी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे किराए में बढ़ोतरी संभव है।

फारबिसगंज, एक संवाददाता। कोसी और अंग प्रदेश को जोड़ने वाला नवगछिया-भागलपुर स्थित अति महत्वपूर्ण विक्रमशिला पुल ध्वस्त होने के बाद इसका सीधा असर सीमावर्ती फारबिसगंज के कारोबारियों और आम लोगों पर साफ दिखाई देने लगा है। पुल के बंद होने से जहां व्यापार प्रभावित हुआ है, वहीं नेपाल सहित आसपास के जिलों से देवघर जाने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कारोबारियों की बढ़ी चिंता, लागत में इजाफे की आशंका:
स्थानीय लोहा कारोबारी दिलीप कुमार, मनोज अग्रवाल और शंकर माहेश्वरी ने बताया कि पुल ध्वस्त होने से माल ढुलाई पर सीधा असर पड़ेगा। अब वाहनों को मुंगेर, जमालपुर, खगड़िया और पूर्णिया होते हुए लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा, जिससे समय के साथ डीजल की खपत भी बढ़ेगी। इसका सीधा असर माल भाड़े पर पड़ेगा और लागत बढ़ेगी।
खाद्य सामग्री के दाम बढ़ने की संभावना:
किराना व्यवसायी शिखर बैद और पीसी अग्रवाल ने बताया कि भागलपुर से कतरनी चूड़ा और चावल बड़ी मात्रा में आता है। परिवहन बाधित होने से भाड़ा बढ़ेगा, जिससे इन वस्तुओं के दाम बढ़ाने की नौबत आ सकती है। वहीं घी कारोबारी मनोहर शर्मा ने बताया कि भागलपुर से पापड़ और शुद्ध घी मंगाया जाता था, लेकिन अब बढ़े हुए परिवहन खर्च के कारण इन उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि तय है।
यात्रियों की जेब पर भी पड़ेगा असर:
पुल के ध्वस्त होने का असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। बसों को लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे किराए में बढ़ोतरी की संभावना है। इसका सीधा बोझ आम यात्रियों पर पड़ेगा।
समय और संसाधनों की बर्बादी:
कारोबारियों का कहना है कि पुल के ध्वस्त होने से न सिर्फ आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि समय की भी भारी बर्बादी होगी। इससे क्षेत्रीय व्यापार और आपूर्ति शृंखला पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
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