Impact of Vikramshila Bridge Collapse on Travel and Trade between Katihar and Bhagalpur विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त, कटिहार-भागलपुर कनेक्टिविटी पर बड़ा झटका, Katihar Hindi News - Hindustan
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विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त, कटिहार-भागलपुर कनेक्टिविटी पर बड़ा झटका

विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त, कटिहार-भागलपुर कनेक्टिविटी पर बड़ा झटका विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त, कटिहार-भागलपुर कनेक्टिविटी पर बड़ा झटकाविक्रमशिला पुल

Mon, 4 May 2026 10:10 PMNewswrap हिन्दुस्तान, कटिहार
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विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त, कटिहार-भागलपुर कनेक्टिविटी पर बड़ा झटका

कटिहार, वरीय संवाददाता विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त होने से कटिहार और भागलपुर के बीच आवागमन व व्यापारिक गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है। हर दिन लगभग 30 के करीब बसों का परिचालन इस रूट पर होता था, जिनसे सैकड़ों यात्री रोजाना दोनों जिलों के बीच आवाजाही करते थे। अब पुल बाधित होने से बस ओनरों के सामने रूट बदलने और लागत बढ़ने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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बस सेवा प्रभावित

सोमवार को मनिहारी मोड़ से भागलपुर जाने वाली सभी बस नवगछिया जीरोमाइल तक ही गयी। बस संचालकों ने कहा कि अभी आगे के रुट पर बात नहीं हुई है। आज पहला दिन था इसलिए जो भी बस खुली व नवगछिया तक ही गयी है।

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वैकल्पिक मार्ग की चुनौतियाँ

आगे वैकल्पिक मार्ग लंबा होने के कारण डीजल खर्च और समय दोनों बढ़ेंगे। इसका सीधा असर किराए पर पड़ सकता है, जिससे यात्रियों को अधिक भुगतान करना पड़ेगा। पहले जहां सीधी और तेज यात्रा संभव थी, वहीं अब लोगों को अतिरिक्त समय और असुविधा झेलनी पड़ेगी।

व्यापार पर असर

इस स्थिति का असर सिर्फ यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर भी गहरा पड़ेगा। कटिहार के व्यापारियों को भागलपुर से आने वाले सामान की आपूर्ति में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर रोजमर्रा की वस्तुओं और थोक सामग्रियों की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है।

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बस सेवा ठप, 100 किमी ज्यादा घूमकर जाना मजबूरी, बालू-गिट्टी महंगी होने के आसार

कुरसेला, निज प्रतिनिधि

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने का असर अब कुरसेला इलाके में साफ दिखने लगा है। सेतु से आवाजाही बाधित होने के कारण भागलपुर के लिए बसों का परिचालन प्रभावित हो गया है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले जहां सीधे भागलपुर पहुंचना आसान था, अब उन्हें 100 किलोमीटर से अधिक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय और किराया दोनों बढ़ गए हैं। खासकर मरीजों, छात्रों और रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों की दिक्कतें काफी बढ़ गई हैं। इसका असर व्यापार पर भी पड़ने लगा है। बालू और गिट्टी के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि आपूर्ति बाधित होने लगी है, जिससे आने वाले दिनों में निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने के आसार हैं। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार लंबा रूट होने से लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ेगा। सड़कों पर भी बदलाव नजर आ रहा है। आम दिनों की तुलना में भारी वाहन कम दिख रहे हैं, जिससे स्थानीय बाजारों में हलचल भी कम हुई है। छोटे व्यापारियों का कहना है कि माल की आवाजाही धीमी पड़ने से उनके कारोबार पर असर पड़ रहा है। फिलहाल विक्रमशिला सेतु की घटना का असर कुरसेला समेत आसपास के इलाकों में व्यापक रूप से महसूस किया जा रहा है।

स्टीमर सेवा पर निर्भरता

फिर लौटे ‘स्टीमर वाले दिन’, विक्रमशिला सेतु टूटने से बढ़ी दूरी

तीन-चार माह तक पुल बहाली मुश्किल

शाम ढलते ही भागलपुर जाना लगभग असंभव

कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि

विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने के बाद कटिहार और आसपास के इलाकों के लोगों की जिंदगी मानो 25-30 वर्ष पीछे लौट गई है। अब भागलपुर जाने के लिए लोगों को एक बार फिर गंगा पार करने के लिए स्टीमर का सहारा लेना पड़ेगा। पुल के पुनर्निर्माण में कम से कम तीन से चार माह का समय लगने की संभावना जताई जा रही है, जिससे आम जनजीवन पर व्यापक असर पड़ना तय है।

स्थानीय निवासियों की परेशानियाँ

कुर्सेला, समेली, बरारी, फलका और सीमावर्ती रुपौली व भवानीपुर जैसे इलाकों के लोगों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन गई है। पहले जहां लोग दिन-रात कभी भी वाहन से सीधे भागलपुर पहुंच जाते थे, वहीं अब स्टीमर सेवा पर निर्भरता बढ़ गई है, जो समय और मौसम दोनों पर निर्भर करती है।

स्थानीय निवासी रमेश मंडल, संतोष कुमार और प्रमोद सिंह बताते हैं कि यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी तीन दशक पहले हुआ करती थी। उस समय भी लोगों को गंगा पार करने के लिए स्टीमर का सहारा लेना पड़ता था। अब आधुनिक समय में फिर वही हालात बन गए हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

शाम की दिक्कतें

सबसे बड़ी दिक्कत शाम के बाद सामने आ रही है। पहले रात में भी वाहन से आसानी से भागलपुर जाया जा सकता था, लेकिन अब स्टीमर सेवा सीमित समय तक ही उपलब्ध रहती है। शाम ढलते ही गंगा पार करना मुश्किल हो जाता है, जिससे आपात स्थिति में लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।

व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका असर साफ दिखने लगा है। भागलपुर जाने वाले मरीज, छात्र और व्यवसायी सभी इस बाधा से प्रभावित हो रहे हैं।

स्थानीय निवासियों की मांग

स्थानीय लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द पुल निर्माण कार्य शुरू कर इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि आवागमन की यह गंभीर समस्या दूर हो सके। फिलहाल, विक्रमशिला सेतु के टूटने से पूरे क्षेत्र की रफ्तार थम सी गई है.

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