नदी ने रोकी नौनिहालों की राह, शिक्षक बोले-बिना पढ़ाए कैसे लें वेतन; बिहार में एक स्कूल ऐसा भी
स्कूल के पास की आबादी बागमती बांध से विस्थापित हो चुकी है। स्कूल तक पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। डर के मारे अभिभावक बच्चों को छोटी नाव से स्कूल नहीं भेजते। शिक्षक 9 से 3 ड्यूटी कर लौट जाते हैं।

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक ऐसा भी स्कूल है, जहां बच्चे नहीं आते। स्कूल में शिक्षक रोज सुबह 9 बजे से शाम 3 बजे तक बैठकर चले जाते हैं। शिक्षकों की पीड़ा है कि बिना बच्चों को पढ़ाए हम वेतन ले रहे हैं। ऐसे में जहां बच्चे हैं, वहां पढ़ाने की इजाजत दी जाए। औराई के प्राथमिक विद्यालय चैनपुर राघोपुर के शिक्षकों ने विभाग से यह गुहार लगाई है। उनका कहना है कि पिछले एक महीने से बच्चों का आना बंद है। पहले 5-10 बच्चे आ भी रहे थे, मगर अब कोई नहीं आता।
दरअसल, नौनिहालों की पढ़ाई की राह बागमती नदी ने रोक दी है। स्कूल के पास की आबादी बागमती बांध से विस्थापित हो चुकी है। स्कूल तक पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। इसके लिए नाव ही सहारा है। यह नाव सरकारी नहीं, बल्कि ग्रामीणों द्वारा बनाई गई छोटी नाव है। अभिभावकों का कहना है कि जहां स्कूल है, वहां बच्चे को जान की डर की वजह से नहीं भेज सकते हैं। वहीं, शिक्षकों की पीड़ा कि एक भी बच्चा स्कूल नहीं आता, ऐसे में हम बिना पढ़ाएं कैसे वेतन लें।
स्कूल की जगह बदले या जाकर पढ़ाने का मिले आदेश
स्कूल के प्रभारी राम सुरेश, शिक्षक अभिषेक समेत अन्य ने कहा कि पहले नामांकन 100-150 होता था, मगर अभी मुश्किल से 40-42 बच्चे हैं। इनमें एक भी बच्चा नहीं आ रहा है। स्कूल में वर्तमान में चार शिक्षक हैं। इसमें एक महिला भी है। शिक्षकों ने कहा कि जहां नया गांव बसा है, स्कूल वहीं संचालित करने का आदेश मिले या हमें वहीं जाकर बच्चों को पढ़ाने की अनुमति दी जाए। तत्कालीन डीईओ अजय कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षकों का आवेदन मिला है। विभागीय निर्देशानुसार इस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
150 से अधिक बच्चों की पढ़ाई हो गई बंद
अभिभावक मौसमी कुमारी ने कहा कि उनके बच्चे दूसरी और तीसरी कक्षा में हैं। डर से स्कूल नहीं भेज रहे हैं। अभिभावकों ने कहा कि हमलोग नई जगह बस चुके हैं। यहां कोई स्कूल नहीं है। ऐसे में हमारे गांव के 150 से अधिक बच्चों की पढ़ाई बंद ही रहती है। अभिभावकों ने कहा कि हमलोग जहां आकर बसे हैं, वहीं पर स्कूल संचालित कराने की व्यवस्था हो जाए तो बच्चों की पढ़ाई भी हो सकेगी और जान माल का खतरा भी नहीं रहेगा।
जहां बस्ती, स्कूल भी वहीं किया जाए स्थापित
अभिभावक अंजू देवी ने कहा कि पहले गांव वहीं था, जहां अभी स्कूल है। अब पूरा गांव बागमती के कारण दक्षिण की तरफ विस्थापित हो चुका है, मगर स्कूल पुरानी जगह रह गया। बच्चों को नाव से भेजने में डर लगता है। मेरे दो बच्चे उसी स्कूल में नामांकित हैं। सोनिया देवी ने कहा कि उनके दो बच्चे प्राथमिक विद्यालय राघोपुर में पढ़ते हैं। एक दूसरी और दूसरा चौथी कक्षा में है। नदी में पानी का बहाव तेज है। ऐसी स्थिति में अपने छोटे बच्चों को कैसे भेजें।




साइन इन