9 माह की बेटी मां-बाप की शादी की गवाह, कोर्ट में लगे 7 फेरे; बिहार में अजब प्रेम की गजब कहानी
अलग अलग जाति से होने के कारण परिवार वाले शादी को तैयार नहीं हुए तो गूंजा और विपुल घर छोड़कर फरार हो गए। इसी दौरान गूंजा गर्भवती हो गई।

बिहार के औरांगाबाद में अजब प्रेम की एक गजब कहानी सामने आई है। जमानत पर छूटे प्रेमी ने कोर्ट परिसर स्थित मंदिर में प्रेमिका के गले में वरमाला डालकर सात फेरे लिए। माता-पिता, अधिवक्ताओं और आम जनों के साथ इनकी 9 माह की बेटी भी इनकी शादी की गवाह बनी। यह शादी चर्चा का विषय बनी हुई है। युगल जोड़ी प्रेम के साथ जीवन यापन करने की कसमें खा रहे हैं। एक बेटी को मां का आंचल तो पिता का साया मिल गया है।
कहानी कुछ ऐसी है। औरंगाबाद जिले के मुफसिल थाना इलाके के सिलाढ़ गांव के विपुल और टंडवा थाना इलाके के गमीडीह गांव की निवासी गूंजा के बीच प्रेम प्रसंग चल रहा था। गूंजा के गांव में विपुल की मौसी रहती है। रिश्तेदारों से मिलने आते विपुल की गूंजा से पहचान हुई। दोनों के बीच प्रेम पनप गया। लेकिन अलग अलग जाति से होने के कारण उनके परिवार वाले शादी को तैयार नहीं हुए। इस वजह से दोनों घर छोड़कर फरार हो गए। कुछ दिनों बाद गूंजा को घर भेजकर विपुल फरार हो गया। गूंजा से उसने संपर्क भी नहीं करता था।
लेकिन गूंजा प्रेग्नेंट हो गई। वह विपुल के बच्चे की मां बनने वाली थी। गूंजा पर परिवार वालों ने दबाव डाला लेकिन वह बच्चे को जन्म देने पर अमादा हो गयी। विपुल उसे पत्नी के रूप में रखने को तैयार नहीं हुआ तो दोनों गांवों के प्रबुद्ध जनों ने पंचायत की। विपुल फिर भी शादी को तैयार नहीं हुआ तो गूंजा के परिजन थाना पहुंच गए। पीड़िता के बयान पर पुलिस ने कांड दर्ज कर लिया। कार्रवाई में विपुल पकड़ा गया। पुलिस ने उसे जेल भेज दिया।
इस बीच गूंजा ने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी को पिता नाम दिलाना फिर बड़ा प्रश्न बनकर सामने आया। विपुल करीब आठ माह से जेल में था। कोर्ट से उसे बेल नहीं मिला तो दोनों परिवार समझौता के लिए तैयार हो गए। वकीलों की मदद से शादी शर्त पर जमानत की स्थिति तैयार हुई। माननीय अदालत ने मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए विपुल को जमानत दे दी।
बुधवार को विपुल बेल मिलने पर जेल से निकला। औरंगाबाद कोर्ट परिसर में ही दोनों की शादी का फैसला हुआ। दोनों परिवार कोर्ट परिसर स्थित मंदिर पहुंचे जहां लोगों की भीड़ जुट गई। भगवती और बड़ी भीड़ के सामने विपुल ने गूंजा को जीवन संगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी भीड़ में उनकी नौ माह की बेटी भी मौजूद थी।




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