माया क्या है और इसका क्या उद्देश्य है? जानिए प्रेमानंद महाराज का जवाब
एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि माया क्या है और इसका उद्देश्य क्या है। चलिए जानते हैं प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया। इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि ब्रह्म। ब्रह्म को ढक करके नानात्व का दर्शन कराना ही माया है।

एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा कि माया क्या है और इसका उद्देश्य क्या है। चलिए जानते हैं प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया। इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि ब्रह्म। ब्रह्म को ढक करके नानात्व का दर्शन कराना ही माया है। वेद कहता है कि ब्रह्म के सिवा किंचिन मात्र कुछ और नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि माया का कार्य है ब्रह्म के सिवा और कुछ प्रतीत करवाना। ब्रह्म का अनुभव ना होने देना।
वो कहते हैं कि सर्वत्र ब्रह्म हैं, उसको आच्छादित करके और सबकुछ अनुभव कराना। स्त्री, पुरुष, धन, सुख, लाभ हानि, पर ब्रह्म का अनुभव ना होने देना। महाराज जी कहते हैं कि माया का स्वरूप क्या है-मैं अरु मोर तोर तैं माया। जेहिं बस कीन्हे जीव निकाया॥ गो गोचर जहँ लगि मन जाई। सो सब माया जानेहु भाई॥
महाराज जी कहते हैं कि माया का स्मरण जो होता है, वो मैं, मेरा, तू-तेरा और जहां तक इंद्रियां और मन जाए सब माया है। महाराज जी आगे कहते हैं कि तिनके से लेकर ब्रह्म लोक तक सब माया द्वारा रचा गया है। सत्य है, तो केवल हरि और उनका नाम ब्रह्म। दूसरा सत्य कुछ भी नहीं है। तो माया क्या है, मैं और मोर और तोर-तय माया। इसका विस्तार कितना है- तिनके से लेकर ब्रह्म लोक तक। इसका कार्य क्या है- ब्रह्म को ढककर के अन्य सबकुछ दिखाई देना। लेकिन भगवान को ना दिखाई देना।
प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि भगवान ही हैं, जब हम साधना करते हैं, तो यह सबकुछ खत्म हो जाता है। जैसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने जब भगवान श्रीराम की आराधना की और आराधना परिपक्व अवस्था में पहुंची, तब वो देख रहे हैं, जड़ चेतन जग जीव जत सकल राम मैं जानु। महाराज जी कहते हैं कि माया खत्म हो गई। सब कुछ राम दिखाई दे रहा है। सर्वत्र सियाराम विराजमान हैं, माया का भ्रम खत्म हो गया।
महाराज जी कहते हैं कि इसी माया पर विजय प्राप्त करने के लिए साधना की जाती है। गुरुजनों की शरण में जाया जाता है और भगवान का स्मरण करते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।




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