premanand ji maharaj told about hell punishment for theft and violence चोरी और हिंसा करने वालों को नरक में कैसी सजा मिलती है? प्रेमानंद जी महाराज से जानें
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चोरी और हिंसा करने वालों को नरक में कैसी सजा मिलती है? प्रेमानंद जी महाराज से जानें

वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज अपने सत्संगों में गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्रों के आधार पर नरक की यातनाओं का वर्णन करते हैं। महाराज जी कहते हैं कि नरक कोई कल्पना नहीं, बल्कि कर्मों का फल है।

Mon, 15 Dec 2025 08:43 PMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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चोरी और हिंसा करने वालों को नरक में कैसी सजा मिलती है? प्रेमानंद जी महाराज से जानें

हिंदू शास्त्रों में कर्मों के अनुसार, फल मिलने की बात कही गई है। अच्छे कर्मों से स्वर्ग और बुरे कर्मों से नरक की यातनाएं भोगनी पड़ती हैं। चोरी और हिंसा जैसे पापों को बहुत गंभीर माना गया है, क्योंकि ये दूसरों का हक छीनते हैं और जीवों को कष्ट देते हैं।

वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज अपने सत्संगों में गरुड़ पुराण और अन्य शास्त्रों के आधार पर नरक की यातनाओं का वर्णन करते हैं। महाराज जी कहते हैं कि नरक कोई कल्पना नहीं, बल्कि कर्मों का फल है। चोरी और हिंसा करने वालों को यमलोक में भयंकर सजाएं मिलती हैं। आइए महाराज जी की शिक्षाओं से जानते हैं।

चोरी करने वालों को नरक में क्या यातना मिलती है?

प्रेमानंद जी महाराज गरुड़ पुराण का हवाला देते हुए बताते हैं कि चोरी करने वाला व्यक्ति नरक में तामिस्र और अंधतामिस्र नामक नरकों में जाता है। यहां यमदूत उसे अंधेरे में बांधकर पीटते हैं। चोर को कीड़ों वाले गड्ढे में डाला जाता है, जहां लाखों कीड़े उसके शरीर को खाते हैं। महाराज जी कहते हैं कि जिसने दूसरों का धन चुराया, उसी धन की रक्षा करने वाले यमदूत उसे लोहे की गर्म सलाखों से जलाते हैं।

चोरी छोटी हो या बड़ी, उसका फल भयंकर होता है। अगर किसी गरीब या ब्राह्मण का धन चुराया तो सजा और कठोर होती है। महाराज जी हंसते हुए कहते हैं कि कलियुग में लोग छोटी-छोटी चोरी को मामूली समझते हैं, लेकिन यमराज के यहां हिसाब बहुत बारीक होता है। इसलिए ईमानदारी से जीवन जीना चाहिए।

हिंसा करने वालों को नरक में कैसी सजा?

हिंसा सबसे बड़ा पाप है। प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जीव हत्या करने वाला रौरव, महारौरव और कालसूत्र नरक में जाता है। यहां यमदूत उसे उसी प्राणी के रूप में बदलकर उसी हथियार से मारते हैं जिससे उसने हिंसा की थी। यदि किसी निर्दोष को मारा तो लोहे के गर्म खंभे में बांधकर जलाया जाता है।

महाराज जी बताते हैं कि जो व्यक्ति हिंसा करता है, उसे नरक में हजारों जन्म तक उसी प्राणी की यातना भोगनी पड़ती है। मांस खाने वाले भी इसी श्रेणी में आते हैं क्योंकि वे परोक्ष रूप से हिंसा कराते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि हिंसा से मन में क्रोध बढ़ता है और आत्मा अशांत रहती है। महाराज जी सलाह देते हैं कि अहिंसा का पालन करें, नहीं तो नरक की यातनाएं भोगनी पड़ेंगी।

इन पापों से बचने का उपाय क्या है?

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि पाप किया है तो भी घबराएं नहीं। राधा नाम जप और भगवान की शरण से सब पाप नष्ट हो जाते हैं। राधा नाम की महिमा इतनी बड़ी है कि कलियुग के सारे पाप धो देती है। चोरी और हिंसा के पाप से मुक्ति के लिए रोजाना हनुमान चालीसा, विष्णु सहस्रनाम या राधा नाम जप करें। दान-पुण्य करें, गरीबों की मदद करें और प्रायश्चित करें। जो व्यक्ति सच्चे मन से पश्चाताप करता है और भक्ति करता है, उसे नरक नहीं भोगना पड़ता। भगवान क्षमाशील हैं।

कलियुग में इन पापों से कैसे बचें?

कलियुग में चोरी और हिंसा आम हो गई है। प्रेमानंद जी महाराज सलाह देते हैं कि सत्संग सुनें, अच्छी संगति रखें और नाम जप करें। आज लोग छोटी चोरी को स्मार्टनेस समझते हैं, लेकिन यमराज के पास कोई स्मार्टनेस नहीं चलती है। इसलिए सत्य, अहिंसा और ईमानदारी अपनाएं। रोजाना राधा-राधा जप करें तो मन शुद्ध होता है और पाप करने की इच्छा ही नहीं रहती।

प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि नरक की यातनाएं भयंकर हैं, लेकिन भक्ति से मुक्ति आसान है। चोरी-हिंसा से दूर रहें और भगवान की शरण में आएं।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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