varuthini ekadashi 2026 13 april panchak effects puja vidhi muhurat and paran time Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी पर पंचक का साया, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पारण और उपाय, एस्ट्रोलॉजी न्यूज़ - Hindustan
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Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी पर पंचक का साया, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पारण और उपाय

Varuthini Ekadashi 2026: 13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी पर पंचक का साया है। पंचक लगने के कारण लोगों के मन में इसके प्रभाव को लेकर कई सवाल है। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी पर पंचक काल का कैसा प्रभाव रहेगा

Sat, 11 April 2026 11:38 AMNavaneet Rathaur लाइव हिन्दुस्तान
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Varuthini Ekadashi 2026: वरुथिनी एकादशी पर पंचक का साया, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, पारण और उपाय

सनातन धर्म में एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है। इस व्रत से पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साल 2026 में वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल को है, लेकिन इस बार इस तिथि पर राज पंचक भी शुरू हो रहा है। पंचक लगने के कारण लोगों के मन में इसके प्रभाव को लेकर कई सवाल है। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से।

वरुथिनी एकादशी 2026

पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी तिथि 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रात 1:16 बजे शुरू होगी और 14 अप्रैल 2026 को रात 1:08 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 13 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।

पारण का समय: 14 अप्रैल 2026 को सुबह लगभग 6:54 बजे से 8:31 बजे तक रहेगा। हरि वासर समाप्त होने के बाद ही पारण करना चाहिए। इसलिए 13 अप्रैल को व्रत रखें और 14 अप्रैल को पारण करें।

राज पंचक का प्रभाव

13 अप्रैल से 17 अप्रैल 2026 तक राज पंचक चल रहा है। सामान्य पंचक को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, लेकिन राज पंचक सोमवार से शुरू होने वाला पंचक है, जिसे ज्योतिष में शुभ माना जाता है। यह सुख, समृद्धि और यश का प्रतीक है। इसलिए वरुथिनी एकादशी पर राज पंचक का साया पड़ने के बावजूद व्रत और पूजा करना शुभ फलदायी रहेगा।

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वरुथिनी एकादशी का महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत दस हजार वर्ष की तपस्या के बराबर पुण्य देता है। इस व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के समय स्वर्ण दान करने जितना पुण्य प्राप्त होता है। दुखी सधवा स्त्री यदि यह व्रत करे तो उसे सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं में राजा मान्धाता और धुन्धुमार को इस व्रत से स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी।

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वरुथिनी एकादशी पूजा विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पूजा घर की सफाई कर लें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की फोटो रखें और उनके सामने व्रत का संकल्प लें। अब इसके बाद फूल, दीपक, धूप, भोग और अन्य जरूरी पूजा सामग्री भगावन श्रीहरि को अर्पित करें। पूजा की सामग्री अर्पित करने के बाद विष्णु सहस्रनाम, एकादशी व्रत कथा और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। इसके बाद अंत में आरती करें और भोग लगाए प्रसाद को परिवार के सदस्यों के बीच बांटें। पूरे दिन फलाहार या निर्जल व्रत रखें और सही समय पर पारण करें।

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पंचक में वरुथिनी एकादशी पर क्या करें और क्या ना करें?

राज पंचक शुभ होने के कारण व्रत और पूजा करना पूरी तरह सुरक्षित और फलदायी है। लेकिन कुछ कार्यों से बचें:

  • लकड़ी या ईंधन का संग्रह ना करें।
  • दक्षिण दिशा की यात्रा टालें।
  • नया निर्माण कार्य या छत डालना टालें।
  • पलंग या चारपाई का निर्माण ना करें।

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वरुथिनी एकादशी व्रत से पापों का नाश, सौभाग्य, स्वास्थ्य, संतान सुख और आर्थिक उन्नति मिलती है। राज पंचक के साथ होने से इन लाभों की मात्रा और बढ़ जाती है। जो भक्त सच्चे भाव से व्रत रखते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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