हरिद्वार जा रहे हैं तो कहां से लाएं गंगाजल? हरिद्वार के किस घाट पर गिरी थीं अमृत की बूंदें
हरिद्धार में पूरे साल श्रद्धालुओं और पर्यटक आते हैं। यहां के हर की पौड़ी पर बने ब्रह्मकुंड घाट की मान्यता काफी पुरानी है। इसका कनेक्शन समुद्र मंथन से भी है। इसी वजह से लोग यहां से गंगाजल जरूर लाते हैं।

देवभूमि उत्तराखंड में कई ऐसे धार्मिक और पवित्र जगहें हैं जिनका शास्त्रों में भी वर्णन होता है। इन्हीं में से एक हरिद्वार है। ये एक ऐसी विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगरी है जहां पूरे साल देश विदेश से कई श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। किसी खास त्योहार या फिर तिथि पर लोग स्नान करने यहां पहुंचते हैं। वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान भी लाखों की संख्या में लोग यहां गंगा स्नान करने आते हैं। वैसे तो हरिद्वार के सभी गंगा घाट पवित्र और शुभ माने जाते हैं लेकिन हर की पौड़ी का महत्व काफी अलग है और इसका जिक्र पुराणों में भी है।
हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार हर की पौड़ी का ब्रह्म कुंड घाट सबसे पवित्र जगह है। माना जाता है कि यहां गंगा स्नान करने के बाद गंगाजल घर जरूर लाना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है। यही वजह है कि लोग हरिद्वार जाकर ब्रह्म कुंड घाट से ही गंगाजल ले आते हैं। अब इसके पीछे क्या मान्यता है इसे जानते हैं।
समुद्र मंथन का कनेक्शन
पौराणिक कथा के अनुसार अनादि काल के दौरान ही देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन हुआ था। इस मंथन में वासुकी नाग का सिर राक्षसों की ओर था उसकी पूंछ देवताओं की तरफ थी। अब जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से 14 बेशकीमती रत्न निकले। इसमें एक अमृत से भरा कलश भी था। माना जाता है कि जब देवता उस अमृत कलश को अपने साथ लेकर जा रहे थे तभी उसमें से कुछ बूंदें हरिद्वार के हर की पौड़ी के ब्रह्म कुंड घाट पर गिरी थी और इसी वजह से इस घाट को इतना पवित्र माना जाता है।
इन तिथियों पर होती है खूब भीड़
हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार अमावस्या से लेकर किसी भी शुभ तिथि पर यहां पर स्नान करना शुभ होता है। माना जाता है कि हर शुभ दिन पर यहां का जल अमृत बन जाता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या से लेकर मौनी अमावस्या, वैशाख अमावस्या, गंगा दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा समेत कई विशेष दिनों पर यहां स्नान जरूर करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान यहां पर स्नान करने से सारे पाप मिट जाते हैं और फिर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवान ब्रह्मा ने की तपस्या
एक मान्यता ऐसी भी है कि समुद्र मंथन से काफी पहले भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्म कुंड में ही कई हजार साल तक कठिन तपस्या की थी। इसी वजह से इस जगह का नाम ब्रह्म कुंड पड़ा। बता दें कि इस कुंड का जिक्र तो स्कंद पुराण के अलावा कई अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों में भी है। इसी वजह से हर साल श्रद्धालु हर की पौड़ी आकर ब्रह्म कुंड घाट से गंगाजल जरूर ले आते हैं। माना जाता है कि यहां से लाए गए गंगाजल को घर पर लाने से पॉजिटिव एनर्जी आती है।
डिस्क्लेमर- (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए आसपास के जानकार की सलाह जरूर लें।)




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