महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग: बच्चे की भक्ति से प्रसन्न हुए थे शिवजी, बजरंगबली ने कही ये बात
Ujjain Mahakal Story: मध्य प्रदेश के उज्जैन के शिप्रा नदी के तट पर बने श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर 2 कथाएं प्रचलित हैं। चलिए जानते हैं कि आखिर कैसे बना महाकाल का ये मंदिर? साथ ही जानेंगे दर्शन की टाइमिंग से लेकर टिकट की डिटेल्स…

Mahakaleshwar Jyotirlinga Story in Hindi: शिव भक्तों के लिए सारे ज्योतिर्लिंग का दर्शन करना सपने के पूरा होने जैसा है। बता दें कि जिन 12 पवित्र जगहों पर भगवान शिव खुद प्रकट हुए थे, वहीं पर अब ज्योतिर्लिंग हैं। हर एक ज्योतिर्लिंग के पीछे एक कहानी है। आज बात करेंगे मध्य प्रदेशन के उज्जैन की पावन धरती पर स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की। यह ज्योतिर्लिंग शिप्रा नदीं के तट पर है। मान्यता है कि ये एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जोकि दक्षिणमुखी है। यहां हर सुबह बाबा महाकाल की भस्म आरती की जाती है। महाकाल की भस्त आरती देखने के लिए यहां पर हर दिनों हजारों संख्या में श्रद्धालु आते हैं। तो चलिए जानते हैं श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा। साथ ही जानेंगे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन टाइमिंग के साथ-साथ टिकट डिटेल्स...
शिव के बड़े भक्त थे उज्जैन के राजा
उज्जैन के राजा चंद्रसेन शिव के बड़े भक्त थे। एक बार वो शिव की पूजा कर रहे थे। उन्हें देखकर एक छोटा बच्चा अपने घर पर एक पत्थर ले गया और पूजा करने लगा। शिव की पूजा में वो इतना खो गया कि उसे किसी भी चीज की सुध बुध नहीं थी। ना तो वो बच्चा खाना खाता और ना किसी से बात करता था। ऐसे में उसकी मां ने उस पत्थर को बाहर फेंक दिया। ये देखकर वो बच्चा खूब रोया और शिव का नाम पुकार-पुकारकर वो वहीं पर बेहोश हो गया।
भक्ति से प्रसन्न हुए भगवान शिव
छोटे बच्चे की भक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हुए। जैसे ही उस बच्चे को होश आया, उसे अपने सामने एक खूबसूरत मंदिर दिखाई दिया। ये देखते ही वो बच्चा फिर से शिव की आराधना में जुट गया। जैसे ही बच्चे की मां को ये बात पता चली तो भागी-भागी उस मंदिर को देखने आई और अपने बच्चे को सीने से लगा लिया। उज्जैन के राजा चंद्रसेन को भी ये बात पता चली तो वो भी चले आए। देखते ही देखते वहां कई लोग आ गए।
हनुमानजी हुए प्रकट
उसी जगह पर हनुमानजी प्रकट हुए और वहां मौजूद लोगों से कहा कि भगवान शिव की भक्ति से तुरंत फल मिलता है। इस छोटे बच्चे की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे वो चीज दी है जो सालों साल तक कोई बड़ा ऋषि मुनि तक नहीं कर पाता है। उन्होंने ये भी कहा कि इस बच्चे की आठवीं पीढ़ी में नंदगोप जन्म लेंगे। द्वापर में यहां भगवान कृष्णावतार लेकर कई तरह की लीलाएं करेंगे। इसके बाद राजा चंद्रसेन और वो बच्चा भगवान शिव की पूजा करते रहे।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूसरी कथा
बता दें कि उज्जैन महाकाल को लेकर एक दूसरी कथा भी लोगों के बीच काफी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार उज्जैन में एक ब्राह्मण थे जोकि शिव की भक्ति में लीन रहते थे। जब भी ये ब्राह्मण तपस्या करनी शुरू करते तो दूषण नाम का एक राक्षस उनकी तपस्या बार-बार भंग कर देता था। भगवान शिव ने इस राक्षस को अपनी हुंकार से ही खत्म कर दिया था। इसी के बाद उनका नाम महाकाल हो गया।
श्रीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की मान्यता
ऐसी मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से उज्जैन महाकाल में आकर भगवान शिव को याद करते हैं, वह मोक्ष के अधिकारी हो जाते हैं। साथ ही महाकाल के दर्शन भर मात्र से लोगों के अंदर से हर तरह का भय निकल जाता है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन और आरती का समय
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का गर्भगृह ठीक 4 बजे खुल जाता है और इसके बाद महाकाल की भस्म आरती होती है। इसके बाद महाकाल की आरती सुबह 7, साढ़े 10 और शाम 7 बजे होती है। रात साढ़े 19 बजे महाकाल की शयन आरती का समय होता है। मंदिर सुबह 4 बजे से रात 11 बजे तक खुला रहता है।
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन के लिए टिकट
महाकालेश्वेर ज्योतिर्लिंग के महाकाल के दर्शन के लिए आप ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं। ये बुकिंग 60 दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। वहीं दर्शन से 2 दिन पहले भी टिकट बुक कराई जा सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि एक व्यक्ति अपने अकाउंट से एक बार में कुल 10 लोगों की टिकट बुक करवा सकेगा। ऑनलाइन बुकिंग में 200 रुपये लगते हैं। वहीं गर्भगृह से महाकाल के दर्शन के लिए अलग टिकट है, जिसकी कीमत 750 और 1500 रुपये भी है। गर्भगृह से महाकाल के दर्शन की टाइमिंग सुबह 6 बजे से लेकर दोपहर साढ़े 12 बजे तक ही है।
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