भगवान के नाम लिखते हैं लेटर, नैनीताल से कुछ किमी दूर इस मंदिर में क्यों बंधी हैं हजारों घंटियां?
Golu Devta Mandir: उत्तराखंड के नैनीताल से कुछ ही दूर स्थित गोलू देवता के मंदिर को लेकर लोगों में खूब आस्था देखी जाती है। इस आस्था का प्रतीक है यहां पर बंधी घंटियां। जानते हैं आखिर इस मंदिर की क्या मान्यता है?

हमारे देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जिन्हें देखकर समझ आ जाएगा कि भगवान में लोगों का भरोसा कितना अटूट है। कभी भगवान के नाम आपने कोई लेटर लिखा है? कभी सोचा है कि भगवान लेटर को पढ़कर जवाब भी देते हैं? आप सोचेंगे कि ऐसा कहां ही होता है। अगर आप ये सोच रहे हैं तो आपको नैनीताल से लगभग 18 किमी दूर बने गोलू भगवान के मंदिर में आना चाहिए। कुमाऊं के कुल देवता कहे जाने वाले गोल भगवान का मंदिर घोड़ाखाल में है। माना जाता है कि इस मंदिर में अगर भगवान के नाम से लेटर लिखकर कोई मन्नत मांगी जाए तो वो जरूर पूरी होती है।
मन्नत पूरी होने का सबूत
आपके मन में ये भी सवाल आएगा कि आखिर कैसे मान लिया जाए कि लिखी हुई मन्नत पूरी हो जाती है। इस मंदिर में आकर आपको इस पर भरोसा होगा। यहां के परिसर में एक नहीं दो नहीं बल्कि हजारों घंटियां लगी हुई हैं। ये घंटियां ही इस बात का सबूत हैं कि यहां पर आकर भगवान को लेटर लिखने वालों की सुन ली जाती है। दरअसल जो लोग यहां मन्नत मांगकर जाते हैं, वो कुछ हफ्ते या महीने में ही वापस आकर घंटी बांधकर जाते हैं। दरअसल ये वही लोग हैं जिनकी मन्नत पूरी हो जाती है।
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न्याय के देवता है गोलू भगवान
उत्तराखंड के स्थानीय लोग गोलू भगवान को अपने न्याय का देवता कहते हैं। लोग इन्हें ग्वल देवता के साथ-साथ दूधाधारी देवता के नाम से भी जानते हैं। लोगों का अटूट भरोसा है कि गोलू देवता के मंदिर में न्याय जरूर मिलता है। बता दें कि गोलू देवता की उत्पत्ति को गौर भैरव यानि शिव के अवतार के रूप में माना जाता है। लंबे समय से लोग मानते चले आए हैं कि एक बार इस मंदिर में जाने के बाद कोई भी व्यक्ति निराश नहीं होता है।
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